30 अप्रैल तक पूरे करें IGOT के 3 कोर्स, वरना रुक जाएगा अप्रैल का वेतन
NEWS IN SHORT
- IGOT प्लेटफॉर्म पर कर्मचारियों का पंजीकरण 73.4% तक हुआ।
- 6 जिलों ने 100% से ज्यादा की प्रगति की।
- 12 जिले 20% से भी कम में हैं।
- 30 अप्रैल तक प्रशिक्षण पूरा करना अनिवार्य है।
- कोर्स न पूरा करने पर वेतन रोका जाएगा।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में IGOT कर्मयोगी भारत प्लेटफॉर्म पर कर्मचारियों के ऑनबोर्डिंग को लेकर एक विरोधाभासी तस्वीर सामने आई है। जहाँ एक ओर प्रशासनिक तत्परता के चलते 6 जिलों ने 100% से अधिक पंजीकरण का लक्ष्य हासिल कर मिसाल पेश की है, वहीं 12 जिलों की सुस्त रफ्तार ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। ये जिले वर्तमान में 'रेड जोन' में बने हुए हैं, जहाँ पंजीकरण का आंकड़ा 20% के निचले स्तर को भी पार नहीं कर पाया है।
प्रगति और चुनौतियां
21 अप्रैल तक जारी आधिकारिक डेटा के अनुसार, विभाग के कुल 1 लाख 92 हजार कर्मचारियों में से अब तक 1 लाख 41 हजार कर्मचारियों ने ही अपना पंजीकरण पूरा किया है। राज्य की औसत प्रगति वर्तमान में 73.4% दर्ज की गई है। हालांकि औसत आंकड़ा संतोषजनक लग सकता है, लेकिन जिलों के बीच का बड़ा अंतर प्रशासनिक विफलता की ओर संकेत कर रहा है।
30 अप्रैल है डेडलाइन
शासन ने इस मामले में बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि:
अनिवार्य पंजीकरण: वर्ग 3 और उससे ऊपर के सभी अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है।
कोर्स की बाध्यता : त्येक कर्मचारी को कम से कम 3 ऑनलाइन कोर्स सफलतापूर्वक पूरे करने होंगे।
वेतन पर रोक : यदि 30 अप्रैल तक निर्धारित कोर्स पूरे नहीं किए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारी का अप्रैल माह का वेतन रोक दिया जाएगा।
भविष्य के करियर पर भी पड़ेगा असर
सरकार केवल वेतन रोकने तक ही सीमित नहीं है। मिशन कर्मयोगी के तहत अब इसे सेवा नियमों का स्थायी हिस्सा बनाया जा रहा है। 2026-27 से कर्मचारियों के वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) में IGOT कोर्स की प्रगति को अनिवार्य रूप से जोड़ा जाएगा। यानी, भविष्य में प्रमोशन और अन्य विभागीय लाभों के लिए यह प्रशिक्षण एक मुख्य आधार बनेगा।
सख्ती के मूड में प्रशासन
विभागीय प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन इस प्रक्रिया की निगरानी करें। शासन का मानना है कि डिजिटल युग में कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए यह प्रशिक्षण अनिवार्य है। अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि लापरवाही बरतने वाले जिलों के नोडल अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।
निष्कर्ष
IGOT प्लेटफॉर्म पर कर्मचारियों का ऑनबोर्डिंग असंतुलित है। कुछ जिलों ने 100% से ज्यादा प्रगति की, जबकि अन्य जिलों में यह 20% से भी कम रही। शासन ने 30 अप्रैल तक प्रशिक्षण पूरा करने का निर्देश दिया है, नहीं तो वेतन रुक सकता है। कर्मचारियों के प्रदर्शन को भविष्य में ACR से जोड़ा जाएगा।
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