राखड़ डैम रिसाव : CSPGCL पर 27.60 लाख का जुर्माना

Umeshwari Baghel | Jun 22, 2026, 18:46 IST
राखड़ डैम रिसाव CSPGCL पर 27.60 लाख जुर्माना
कोरबा में राखड़ डैम में दरार से राखयुक्त पानी फैला। पर्यावरण मंडल ने CSPGCL को जिम्मेदार मानते हुए 27.60 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। निरीक्षण में प्रदूषण की पुष्टि हुई। जल स्रोत प्रभावित हुए और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा।

समझें क्या है पूरा मामला

Korba : कोरबा से सामने आया राखड़ बांध (ऐश डाइक) रिसाव मामला अब गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई में बदल गया है। हसदेव ताप विद्युत गृह (पूर्व) के ऐश डाइक में आई दरार और उससे निकले राखयुक्त पानी के कारण हुए प्रदूषण पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने कड़ा रुख अपनाते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) पर 27 लाख 60 हजार रुपए का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाया है।



राख डैम से फैला प्रदूषण, स्थानीय जल स्रोत प्रभावित

यह मामला तब सामने आया जब हसदेव ताप विद्युत गृह के ऐश डाइक में दरार आने के बाद बड़ी मात्रा में राख मिश्रित पानी बाहर निकल गया। यह पानी आसपास के क्षेत्रों की ओर बहने लगा, जिससे न केवल भूमि बल्कि स्थानीय जल स्रोत भी प्रभावित हुए।



विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का राखयुक्त पानी मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाता है और लंबे समय तक जलचक्र को भी प्रभावित कर सकता है। स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर इसका असर स्पष्ट रूप से देखा गया, जहां जल प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो गई।



घटना के बाद क्षेत्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी और ग्रामीणों ने भी जल स्रोतों के दूषित होने की शिकायतें दर्ज कराईं। धीरे-धीरे यह मामला पर्यावरणीय नुकसान के एक बड़े उदाहरण के रूप में सामने आया।



निरीक्षण में खुली अनदेखी, प्रबंधन को पहले ही चेतावनी

पर्यावरण संरक्षण मंडल की टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 18 मार्च 2026 को संयंत्र का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान ऐश डाइक से लगातार राख रिसाव और पानी के बहाव की पुष्टि हुई, जो सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है। टीम ने पाया कि संरचना में आवश्यक मरम्मत और रोकथाम के उपाय समय पर नहीं किए गए थे।



निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर मंडल ने प्रबंधन को जल और वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियमों के तहत नोटिस जारी किया था। इसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं और आगे किसी भी प्रकार के रिसाव को रोका जाए। हालांकि, प्रारंभिक स्तर पर सुधार की गति को लेकर संतोषजनक स्थिति नहीं देखी गई।



पर्यावरण मंडल की सख्त कार्रवाई, लगाया आर्थिक दंड

लगातार निगरानी और रिपोर्टों के आधार पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने CSPGCL पर 27.60 लाख रुपए की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने का निर्णय लिया। यह राशि पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के तौर पर वसूली जाएगी। मंडल ने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि इनका असर केवल तत्काल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता बल्कि दीर्घकालिक पारिस्थितिक असंतुलन पैदा करता है।



यह कार्रवाई न केवल संबंधित कंपनी के लिए चेतावनी है बल्कि अन्य औद्योगिक इकाइयों के लिए भी एक संकेत है कि पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी अब महंगी पड़ सकती है।



औद्योगिक सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बड़े विद्युत संयंत्रों में राख प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐश डाइक जैसी संरचनाओं में नियमित निरीक्षण और तकनीकी अपग्रेड बेहद जरूरी होते हैं, ताकि रिसाव जैसी घटनाओं को रोका जा सके।



स्थानीय स्तर पर भी लोग अब पर्यावरण सुरक्षा को लेकर अधिक जागरूक नजर आ रहे हैं। जल स्रोतों के प्रदूषित होने का सीधा असर ग्रामीण जीवन और कृषि पर पड़ता है, जिससे लंबे समय में सामाजिक और आर्थिक नुकसान बढ़ सकता है।



भविष्य के लिए सख्त निगरानी की जरूरत

पर्यावरण मंडल की यह कार्रवाई संकेत देती है कि आने वाले समय में औद्योगिक प्रदूषण को लेकर निगरानी और सख्त हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जुर्माना लगाना ही समाधान नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिससे रिसाव और प्रदूषण की घटनाएं शुरुआत में ही रोकी जा सकें।



कोरबा का यह मामला अब राज्य स्तर पर एक उदाहरण बन गया है, जहां पर्यावरणीय लापरवाही पर प्रशासन ने स्पष्ट और कठोर संदेश दिया है।



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