छत्तीसगढ़ महंगाई भत्ता : अफसरों को मिला बढ़ा हुआ DA, सरकारी कर्मचारी आदेश के इंतजार में बैठे
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ न्यायिक सेवा अधिकारियों का महंगाई भत्ता 2% बढ़ाया गया।
- प्रदेश के साढ़े चार लाख कर्मचारी डीए आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
- देय तिथि से डीए न मिलने पर कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
- एरियर्स न मिलने से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
- कर्मचारी फेडरेशन ने लंबित एरियर्स जीपीएफ खाते में डालने की मांग की।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य न्यायिक सेवा के अधिकारियों के महंगाई भत्ते (डीए) में 2 फीसदी की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। केंद्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों के डीए में 2 प्रतिशत की वृद्धि किए जाने के बाद राज्य सरकार ने भी न्यायिक सेवा के अधिकारियों के लिए यह कदम उठाया है। इससे पहले, बढ़ती महंगाई को देखते हुए छत्तीसगढ़ पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीटीसीएल) भी अपने कर्मचारियों का डीए 2 फीसदी बढ़ा चुकी है।
अधिकारियों और बिजली कर्मियों के डीए में हुई इस बढ़ोतरी के बाद अब प्रदेश के करीब साढ़े चार लाख नियमित कर्मचारियों की नजरें सरकार पर टिकी हैं। कर्मचारियों को लंबे समय से अपने डीए बढ़ने का इंतजार है, और इस घोषणा में हो रही देरी के कारण अब कर्मचारियों के बीच आक्रोश तेजी से बढ़ता जा रहा है।
हर बार होता है एरियर्स का नुकसान
राज्य के शासकीय कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार हर बार महंगाई भत्ता देने में देरी करती है। इसके साथ ही, डीए को तय तिथि से लागू नहीं किया जाता, जिससे कर्मचारियों को हर बार भारी एरियर्स का नुकसान उठाना पड़ता है। कर्मचारियों ने सवाल उठाया है कि क्या महंगाई सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों, न्यायिक अधिकारियों और सीएसपीटीसीएल (CSPTCL) के कर्मियों के लिए ही बढ़ती है?
दरअसल, केंद्र सरकार हर साल जनवरी और जुलाई में डीए बढ़ाने की घोषणा करती है और इसी तर्ज पर राज्य सरकारें भी फैसला लेती हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों के मुताबिक, राज्य सरकार जब भी डीए बढ़ाती है, उसे देय तिथि से लागू नहीं करती। इसके कारण कर्मचारियों को चार से पांच महीने पुरानी दरों पर ही वेतन का भुगतान होता है, जो उनके साथ सीधा अन्याय है।
जनवरी में हुई थी 3 फीसदी की वृद्धि
इससे पहले वित्त विभाग के आदेशानुसार जनवरी 2026 में राज्य के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 3 फीसदी की वृद्धि की गई थी। इसके बाद सातवें वेतनमान के तहत डीए 58 प्रतिशत और छठवें वेतनमान के तहत 257 प्रतिशत हो गया था। बता दें कि कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की गणना उनके मूल वेतन (बेसिक सैलरी) के आधार पर की जाती है।
हर महीने हो रहा है 200 रुपए से 3 हजार रूपए तक का नुकसान
समय पर डीए और लंबित एरियर्स का भुगतान न होने से कर्मचारियों को हर महीने 200 रुपए से लेकर 3 हजार रूपए तक का सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन इस मामले को लेकर लगातार मुखर है। फेडरेशन की मांग है कि लंबित एरियर्स की पूरी राशि को कर्मचारियों के जीपीएफ (GPF) खाते में जमा किया जाए। अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपने से लेकर हाईकोर्ट तक का दरवाजा खटखटा चुके हैं।
क्या कहते हैं कर्मचारी नेता?
> "DA बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखा गया है। भाजपा शासित अन्य राज्यों जैसे राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश में DA की घोषणा की जा चुकी है। छत्तीसगढ़ सरकार को भी यहां जल्द से जल्द डीए बढ़ाने का ऐलान करना चाहिए।"
— कमल वर्मा, संयोजक, छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन
"सरकार को समय पर कर्मचारियों को डीए देना चाहिए ताकि उन्हें इस कमरतोड़ महंगाई से राहत मिल सके। इसके अलावा सरकार को देय तिथि से ही आदेश जारी करना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को कोई आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।"— राजेश चटर्जी, प्रांताध्यक्ष, छत्तीसगढ़ शिक्षक फेडरेशन
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ महंगाई भत्ता में न्यायिक सेवा और बिजली कर्मियों का बढ़ना स्वागत योग्य है, लेकिन साढ़े चार लाख राज्य कर्मचारियों की अनदेखी से आक्रोश बढ़ रहा है। सरकार को अन्य राज्यों की तरह समय पर और देय तिथि से डीए लागू करना चाहिए ताकि कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव न झेलना पड़े।
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