भूमिहीन परिवारों की जिंदगी बदल रही विष्णु भैया की योजना, हर साल मिल रहा ₹10 हजार का सहारा
Raipur. जिस परिवार के पास अपनी खेती की जमीन नहीं होती, उसके लिए हर दिन रोजगार और खर्च की चिंता साथ चलती है। ऐसे ही लाखों भूमिहीन परिवारों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना बड़ी राहत बनकर सामने आई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना के तहत पात्र परिवारों को हर साल 10 हजार रुपए सीधे उनके बैंक खाते में दिए जा रहे हैं। यह राशि आज कई परिवारों के लिए आर्थिक सहारा बनने के साथ उनके भविष्य में भरोसा भी जगा रही है।
प्रदेश में इस योजना का उद्देश्य भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक सुरक्षा देना है। हर साल मिलने वाली यह सहायता राशि ऐसे परिवारों के लिए मददगार साबित हो रही है, जिनकी आय सीमित है और रोजगार भी नियमित नहीं मिल पाता। परिवार इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, इलाज, घरेलू जरूरतों और रोजमर्रा के खर्च पूरे करने में कर रहे हैं। कई हितग्राही इस पैसे का कुछ हिस्सा बचाकर छोटा रोजगार शुरू करने या खेती से जुड़ा काम बढ़ाने की तैयारी भी कर रहे हैं।
10 हजार रुपए से बढ़ा आत्मविश्वास
योजना से जुड़े हितग्राहियों का कहना है कि पहले उन्हें इस तरह की आर्थिक सहायता की उम्मीद नहीं थी। अब हर साल मिलने वाली राशि से परिवार की कई जरूरी जरूरतें पूरी हो जाती हैं। बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में मदद मिल रही है, इलाज कराना आसान हुआ है और भविष्य को लेकर भरोसा भी बढ़ा है। परिवारों का कहना है कि इस सहायता ने आर्थिक चिंता कुछ हद तक कम की है।
केस 01: जनेऊराम के परिवार की बदली तस्वीर
फोटो है सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम करजी निवासी जनेऊराम नायक का परिवार इस बदलाव की मिसाल है। भूमिहीन होने के कारण उनका परिवार वर्षों तक कृषि मजदूरी पर निर्भर रहा। अब उन्हें दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत हर साल 10 हजार रुपए मिल रहे हैं। इससे घर के खर्च संभालने में मदद मिल रही है।
जनेऊराम के परिवार को अन्य सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिला है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उन्हें पक्का घर मिला है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन मिलने के बाद रसोई धुएं से मुक्त हुई है। वहीं महतारी वंदन योजना के तहत परिवार की महिला सदस्य को हर महीने आर्थिक सहायता मिल रही है। इन योजनाओं के संयुक्त लाभ से परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है और भविष्य को लेकर उनका विश्वास मजबूत हुआ है।
केस 02: 10 हजार रुपए से शुरू की बंटाई पर खेती
सरकार की इस योजना ने कई परिवारों को आगे बढ़ने का अवसर भी दिया है। ऐसा ही उदाहरण ग्राम मालगांव निवासी प्रकाश शांडिल्य का है। वे भूमिहीन हैं और मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। योजना के तहत मिलने वाले 10 हजार रुपए का उपयोग उन्होंने दूसरे किसानों की जमीन बंटाई पर लेकर खेती शुरू करने में किया।
प्रकाश शांडिल्य बताते हैं कि खेती से उन्हें अतिरिक्त आय मिलने लगी है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी है। उनका कहना है कि यह योजना उनके लिए बहुत उपयोगी साबित हुई है और इससे आत्मविश्वास भी बढ़ा है। उन्होंने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।
करीब 6 लाख परिवारों को मिल रहा लाभ
प्रदेश में इस योजना के तहत करीब 6 लाख हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें बैगा-गुनिया समुदाय के हितग्राही भी शामिल हैं। योजना का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ नगर पंचायत क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों को भी दिया जा रहा है।
योजना के तहत भूमिहीन कृषि मजदूर, चरवाहा, नाई, धोबी, मोची और वनोपज संग्राहक जैसे परिवार पात्र हैं। लाभ पाने के लिए आवेदक का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना जरूरी है। साथ ही परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर कृषि योग्य भूमि नहीं होनी चाहिए।
आर्थिक मदद के साथ आत्मनिर्भरता की राह
सरकार का कहना है कि यह योजना सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य भूमिहीन परिवारों को आत्मविश्वास देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाना भी है। कई परिवार इस राशि का उपयोग आय बढ़ाने वाले छोटे कार्यों में कर रहे हैं, जिससे उनके लिए अतिरिक्त कमाई के अवसर बन रहे हैं। योजना का असर अब गांवों में साफ दिखाई दे रहा है। जिन परिवारों के लिए रोजमर्रा का खर्च जुटाना मुश्किल था, उन्हें हर साल मिलने वाली सहायता राहत दे रही है। हितग्राहियों का कहना है कि इससे आर्थिक सुरक्षा का एहसास बढ़ा है और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता भी कम हुई है।
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