धमतरी धर्मांतरण विवाद: गंगाजल पिलाकर परिवार की हिंदू धर्म में वापसी, फिर मिली अंतिम संस्कार की अनुमति
इसके बाद महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से कराया गया।
समझें क्या है पूरा मामला
- भटगांव के सुरेश ध्रुव (35) ने करीब चार साल पहले ईसाई धर्म अपनाया था।
- 4 अक्टूबर को उनकी पत्नी सरस्वती ध्रुव (28) की मौत हो गई।
- अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच समाज के कुछ लोगों ने हंगामा किया।
- विवाद की स्थिति बनने पर समाज के लोगों की बैठक शुरू हुई।
- सहमति बनने के बाद सरस्वती का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से हुआ।
मामला रूद्री थाना क्षेत्र के भटगांव का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, भटगांव निवासी सुरेश ध्रुव ने करीब चार साल पहले अपनी इच्छा से ईसाई धर्म अपनाया था। 4 अक्टूबर को उनकी पत्नी सरस्वती ध्रुव (28) की मौत हो गई। इसके बाद परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था।
अंतिम संस्कार को लेकर ग्रामीणों ने किया विरोध
अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान समाज के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। इससे गांव में विवाद की स्थिति बन गई। मामले को लेकर ग्रामीणों की बैठक हुई। स्थिति को देखते हुए विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पूर्व जिला अध्यक्ष संदीप अग्रवाल को भी मौके पर बुलाया गया।
बैठक में परिवार से समाज के रीति-रिवाजों का पालन करने को लेकर बातचीत की गई। संदीप अग्रवाल ने परिवार को समझाइश दी। इसके बाद सुरेश ध्रुव ने हिंदू धर्म और समाज के रीति-रिवाजों को मानने की इच्छा जताई।
तिलक और गंगाजल के बाद समाज में शामिल करने का दावा
बैठक के बाद ग्रामीणों ने परिवार को तिलक लगाया और गंगाजल से स्नान कराने के साथ गंगाजल पिलाकर दोबारा समाज में शामिल किया। इसके बाद मृत महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से कराया गया।
वीएचपी की ओर से परिवार से लिखित सहमति भी लिए जाने की बात सामने आई है। इसमें सुरेश ध्रुव ने कथित तौर पर बिना किसी दबाव के हिंदू धर्म में वापस आने और आगे समाज के रीति-रिवाजों का पालन करने की सहमति दी।
सुरेश ध्रुव बोले- अपनी इच्छा से धर्म बदला था
सुरेश ध्रुव के मुताबिक, उन्होंने करीब चार साल पहले अपनी इच्छा से ईसाई धर्म अपनाया था। अब उन्होंने दोबारा ईसाई धर्म में नहीं जाने और हिंदू धर्म में रहने की बात कही है। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में वापस लौटने का फैसला किया है।
करीब एक घंटे तक चली बातचीत के बाद समाज के लोगों के बीच सहमति बनी। इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
धमतरी में धर्मांतरण को लेकर फिर चर्चा
भटगांव की इस घटना के बाद धर्मांतरण, धार्मिक पहचान और सामाजिक रीति-रिवाजों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, परिवार की ओर से धर्म परिवर्तन और वापस लौटने को लेकर अपनी इच्छा की बात कही गई है। मामले में किसी तरह के दबाव या जबरदस्ती के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
- धमतरी में अंतिम संस्कार को लेकर विवाद क्यों हुआ?
बताई गई जानकारी के अनुसार, मृत महिला के परिवार द्वारा ईसाई धर्म अपनाए जाने की बात सामने आने के बाद कुछ ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार का विरोध किया। - क्या धर्मांतरण गैरकानूनी है?
धर्मांतरण हर स्थिति में गैरकानूनी नहीं है। हालांकि, जबरदस्ती, धोखे या प्रलोभन के जरिए धर्म परिवर्तन कई राज्यों के कानूनों के तहत प्रतिबंधित या दंडनीय हो सकता है। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण से जुड़े मामलों पर राज्य के लागू कानून और परिस्थितियों के आधार पर कार्रवाई का प्रावधान है। - धमतरी धर्मांतरण विवाद में परिवार ने क्या फैसला लिया?
परिवार की ओर से बताया गया कि उन्होंने दोबारा ईसाई धर्म नहीं अपनाने और हिंदू धर्म में रहने का फैसला किया है।