हीटवेव पर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में, हर जिले में हीट स्ट्रोक रूम बनाने के आदेश
RAIPUR : छत्तीसगढ़ में बढ़ती गर्मी और संभावित हीटवेव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम (NPCCHH) के तहत संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं ने सभी जिलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। साफ कहा गया है कि इस बार लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होगी, क्योंकि 2026 में तापमान सामान्य से ज्यादा रहने का अनुमान है।
जारी आदेश के मुताबिक, हर जिला अस्पताल (DH) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में “हीट स्ट्रोक मैनेजमेंट रूम” बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। इन कमरों में बर्फ के पैक, कूलिंग उपकरण, ठंडे IV फ्लूड और जरूरी दवाएं उपलब्ध रहनी चाहिए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मरीज को अस्पताल पहुंचते ही तत्काल ठंडा करने की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि मौत के मामलों को रोका जा सके।
एंबुलेंस से लेकर वार्ड तक अलर्ट
सरकार ने एंबुलेंस सेवाओं को भी हाई अलर्ट पर रखने के निर्देश दिए हैं। मरीजों के परिवहन के दौरान ही प्री-हॉस्पिटल कूलिंग शुरू करने को कहा गया है। यानी अब एंबुलेंस सिर्फ मरीज ढोने का जरिया नहीं, बल्कि शुरुआती इलाज का केंद्र भी होगी। इसके साथ ही सभी स्वास्थ्य केंद्रों में ORS, IV फ्लूड और जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने के आदेश दिए गए हैं।
डिजिटल सर्विलांस और रोजाना रिपोर्टिंग
स्वास्थ्य विभाग ने इस बार निगरानी सिस्टम को भी मजबूत किया है। डिजिटल डेटा एंट्री और रिपोर्टिंग सिस्टम को अलर्ट मोड में रखा गया है। हर संदिग्ध हीट स्ट्रोक केस की जानकारी तुरंत दर्ज करनी होगी। राज्य स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग होगी, ताकि हालात बिगड़ने से पहले ही कदम उठाए जा सकें।
सबसे ज्यादा खतरा इन पर
आदेश में साफ कहा गया है कि बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और बाहर काम करने वाले मजदूर सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। ऐसे समूहों के लिए विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। गांव-गांव और शहरों में लोगों को बताया जाएगा कि दोपहर की धूप से कैसे बचें, ज्यादा पानी पिएं और लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाएं।
फायर सेफ्टी और बिजली पर भी फोकस
गर्मी के साथ आग लगने की घटनाएं भी बढ़ती हैं। इसे देखते हुए अस्पतालों में फायर ऑडिट और सुरक्षा इंतजाम दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। बिजली कटौती या उपकरण फेल होने की स्थिति में बैकअप व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
प्रशिक्षण और मैन्युअल अनिवार्य
स्वास्थ्य कर्मियों को हीटवेव से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। NCDC द्वारा जारी मैन्युअल के आधार पर डॉक्टरों और स्टाफ को तैयार किया जाएगा। विभाग चाहता है कि जमीनी स्तर पर हर कर्मचारी को हीट स्ट्रोक के लक्षण और इलाज की पूरी जानकारी हो।
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