छत्तीसगढ़ के इस गांव में 7 दिन पहले मनाई जाती है दिवाली, होली समेत 4 त्योहारों की भी है अनोखी परंपरा

Harrison Masih | Nov 08, 2026, 12:05 IST
देश से 7 दिन पहले क्यों जगमगाता है छत्तीसगढ़ का यह गांव? जानिए सिरदार देव की अनूठी और दिलचस्प कहानी
A unique village in Chhattisgarh celebrates Diwali, Holi and other major festivals seven days before the scheduled dates, following a centuries-old tradition.
देशभर में लोग दिवाली का इंतजार करते हैं। घरों की सफाई होती है। बाजार सजते हैं और लोग दीप जलाकर त्योहार मनाते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के एक गांव में दिवाली बाकी जगहों से सात दिन पहले ही मना ली जाती है। इतना ही नहीं, यहां होली, हरियाली और पोला जैसे त्योहार भी तय तारीख से एक सप्ताह पहले मनाए जाते हैं।

देशभर में लोग दिवाली का इंतजार करते हैं। घरों की सफाई होती है। बाजार सजते हैं और लोग दीप जलाकर त्योहार मनाते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के एक गांव में दिवाली बाकी जगहों से सात दिन पहले ही मना ली जाती है। इतना ही नहीं, यहां होली, हरियाली और पोला जैसे त्योहार भी तय तारीख से एक सप्ताह पहले मनाए जाते हैं। यह अनोखी परंपरा धमतरी जिले के सेमरा सी गांव में सदियों से चली आ रही है। इसके पीछे गांव के आराध्य देव सिरदार देव से जुड़ी एक खास मान्यता है। आज भी गांव के लोग अपने पूर्वजों की इस परंपरा को पूरी श्रद्धा से निभाते हैं।



आखिर 7 दिन पहले क्यों मनाते हैं त्योहार?

सेमरा सी गांव में त्योहार समय से पहले मनाने की परंपरा कोई नई नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, यह रिवाज उनके पूर्वजों के समय से चला आ रहा है। इसके पीछे सिरदार देव की कहानी जुड़ी हुई है।



कहा जाता है कि पुराने समय में गांव में छोटे-छोटे घर थे। चारों तरफ घने जंगल हुआ करते थे। उस दौर में ग्रामीणों को जंगली जानवरों से काफी परेशानी होती थी। लोगों के लिए गांव में रहना भी आसान नहीं था। आए दिन जंगली जानवरों का खतरा बना रहता था।



इसी दौरान सिरदार नाम का एक व्यक्ति गांव पहुंचा। उन्होंने ग्रामीणों को जंगली जानवरों के आतंक से बचाने में मदद की। इस दौरान उन्होंने लोगों की सुरक्षा के लिए संघर्ष किया। इसी संघर्ष में उनकी मृत्यु हो गई। ग्रामीण उन्हें वीर पुरुष के रूप में याद करते हैं। बाद में उन्हें सिरदार देव के रूप में पूजा जाने लगा।




पुजारी को सपने में मिले थे निर्देश

ग्रामीणों की मान्यता के अनुसार, सिरदार देव की मृत्यु के बाद गांव के पुजारी को एक सपना आया था। इसमें सिरदार देव ने उन्हें कुछ निर्देश दिए थे। कहा जाता है कि गांव में कोई भी बड़ा त्योहार मनाने से पहले उनकी पूजा की जानी चाहिए। इसके बाद ही गांव के लोग त्योहार मनाएं।



इसी मान्यता के बाद गांव में सभी प्रमुख त्योहार सात दिन पहले मनाने की परंपरा शुरू हुई। ग्रामीणों का विश्वास है कि सिरदार देव की पूजा के बाद ही गांव में सुख-शांति बनी रहती है।



बताया जाता है कि एक बार गांव के लोगों ने इस परंपरा को तोड़ने की कोशिश की थी। उन्होंने तय तारीख पर ही त्योहार मनाया। इसके बाद गांव में बीमारियां फैलने लगीं। अकाल जैसी परेशानियां भी सामने आईं। ग्रामीण इन घटनाओं को अपनी परंपरा से जोड़कर देखते हैं। इसके बाद से लोगों ने फिर कभी इस नियम को नहीं तोड़ा।




दिवाली के साथ चार त्योहार भी मनाए जाते हैं पहले

सेमरा सी गांव की खासियत सिर्फ दिवाली तक सीमित नहीं है। यहां कुल चार बड़े त्योहार सामान्य तारीख से सात दिन पहले मनाए जाते हैं।



इनमें शामिल हैं:



  • दिवाली: गांव में दीपावली मुख्य तारीख से सात दिन पहले मनाई जाती है।
  • होली: रंगों का त्योहार भी एक सप्ताह पहले मनाया जाता है।
  • हरियाली: इस पर्व को भी गांव के लोग तय तारीख से सात दिन पहले मनाते हैं।
  • पोला: किसानों और बैलों से जुड़ा यह त्योहार भी समय से पहले मनाया जाता है।

इन सभी त्योहारों में ग्रामीण पारंपरिक तरीके से शामिल होते हैं। इस दौरान घरों में दीये जलाए जाते हैं। आंगन में रंगोली बनाई जाती है। लोग एक-दूसरे से मिलते हैं और खुशियां बांटते हैं।




सिरदार देव के मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित

गांव की इस परंपरा का एक और खास पहलू है। यहां सिरदार देव के मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। मंदिर में केवल पुरुष ही जाकर पूजा-पाठ करते हैं।



ग्रामीणों के अनुसार, यह व्यवस्था भी कई पीढ़ियों से चली आ रही है। गांव के लोग आज भी इस परंपरा का पालन करते हैं। त्योहारों के दौरान सिरदार देव की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।



दो दिनों तक गांव में लगता है मेला

इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचते हैं। त्योहार के दौरान सेमरा सी गांव में दो दिनों तक मेले जैसा माहौल रहता है।



गांव के सरपंच छबिलेश कुमार सिन्हा के मुताबिक, इस परंपरा में शामिल होने के लिए आसपास के 15 से 20 गांवों से लोग आते हैं। कई परिवार अपने रिश्तेदारों के घर मेहमान बनकर पहुंचते हैं। इससे गांव में काफी भीड़ जुट जाती है।



कई बार आने वाले लोगों की संख्या गांव की आबादी से भी ज्यादा हो जाती है। हर तरफ उत्सव का माहौल दिखाई देता है। लोग मिलकर त्योहार मनाते हैं और पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं।




नई पीढ़ी भी निभा रही है पुरानी परंपरा

आज के समय में भी सेमरा सी गांव के लोग अपनी इस खास पहचान को बनाए हुए हैं। गांव के बुजुर्ग ही नहीं, युवा भी इस परंपरा को आगे बढ़ाने में रुचि दिखा रहे हैं।



ग्रामीणों का मानना है कि सिरदार देव से जुड़ी यह परंपरा उनके गांव की पहचान है। इसलिए इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।



कुल मिलाकर, धमतरी जिले का सेमरा सी गांव अपनी अनोखी परंपरा के कारण अलग पहचान रखता है। जहां देशभर में लोग तय तारीख पर दिवाली और दूसरे त्योहार मनाते हैं, वहीं इस गांव में सात दिन पहले ही उत्सव शुरू हो जाता है। सदियों पुरानी मान्यता, सिरदार देव के प्रति आस्था और ग्रामीणों की भागीदारी इस परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है।

Tags:
  • 7 दिन पहले मनाई जाती है दिवाली
  • unique diwali celebration
  • धमतरी सेमरा सी गांव
  • धमतरी
  • दिवाली