विधानसभा में वृक्षों पर चर्चा, अब आगे नहीं लगेंगे सप्तवर्णी के पेड़, जानिए क्या है नुकसान
NEWS IN SHORT
- सप्तपर्णी वृक्ष: औषधीय खजाना और प्राकृतिक छाया देने वाला पेड़
- फायदे और सावधानियाँ: जानें सप्तपर्णी वृक्ष के लाभ और हानियाँ
- प्रकृति की औषधि: मलेरिया और त्वचा रोग में लाभकारी सप्तपर्णी
- सप्तपर्णी वृक्ष: सदाबहार पेड़ जिसके फूलों की गंध से सावधानी जरूरी
- आयुर्वेद में सप्तपर्णी: स्वास्थ्य लाभ और एलर्जी से बचाव के उपाय
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को रायपुर में छातिम (सप्तवर्णी) वृक्षों के रोपण का मुद्दा जोरशोर से उठा। रायपुर पश्चिम से भाजपा विधायक सुनील सोनी ने प्रश्नकाल में इस विषय पर सवाल उठाए। दरअसल छातिम (सप्तवर्णी) के वृक्षों से अस्थमा की समस्या हो सकती है।
छातिम वृक्ष को लेकर विधायक में उठे सवाल
विधायक ने सवाल किया कि शहर में बड़ी संख्या में छातिम वृक्ष लगाए जा रहे हैं, जिन्हें लेकर लोगों में स्वास्थ्य संबंधी चिंता है।
इस पर वन एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने जवाब दिया कि फिलहाल छातिम वृक्षों के रोपण पर कोई रोक नहीं लगी है। मंत्री ने कहा कि वर्तमान में छातिम का रोपण रोकने का कोई प्रस्ताव नहीं है, लेकिन भविष्य में इन वृक्षों के रोपण पर विचार किया जाएगा।
छातिम के वृक्ष से नुकसान
मंत्री चौधरी ने बताया, “पेड़ लोगों की सेहत और स्वास्थ्य के लिए लगाए जाते हैं। अगर किसी वृक्ष से नुकसान होता है, तो हम सकारात्मक निर्णय लेंगे। फिलहाल सप्तवर्णी के संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है, लेकिन भविष्य में इन वृक्षों के पौधे नहीं लगाए जाएंगे। जो पौधे पहले ही लगाए जा चुके हैं, उनके संबंध में आगे चर्चा की जाएगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि पीपल के वृक्षों के रोपण की प्रक्रिया लगातार जारी है और लोगों की सेहत तथा पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए नई पौधरोपण योजनाएं जारी रहेंगी।
जानिए सप्तपर्णी वृक्ष के विषय में
सप्तपर्णी वृक्ष अपने औषधीय गुणों के कारण अत्यधिक फायदेमंद है, लेकिन इसके फूलों की तीव्र गंध से कुछ लोगों में सिरदर्द की समस्या होती है। इतना ही नहीं इससे एलर्जी या अस्थमा जैसी समस्या हो सकती है। यह एक सदाबहार पेड़ है। जो हर मौसम में फल - फूल देता है। इसमें प्रदूषण सहने की भी छमता होती हैं।
सप्तपर्णी वृक्ष के फायदे
औषधीय गुण: इसकी छाल का उपयोग मलेरिया, पीलिया, दस्त, पेचिश और त्वचा रोगों के इलाज में होता है।
श्वसन स्वास्थ्य: खांसी, जुकाम और ब्रोंकाइटिस जैसी सांस संबंधी बीमारियों में इसके अर्क का उपयोग लाभदायक माना जाता है।
दर्द निवारक: इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक गुण होते हैं, जो दर्द में आराम देते हैं
पारिस्थितिक महत्व: यह सदाबहार पेड़ है, जो अच्छी छाया देता है और हवा को शुद्ध करने में मदद करता है।
घाव भरना: इसके दूधिया लेटेक्स (रस) का उपयोग घावों और अल्सर को ठीक करने के लिए किया जाता है।
सप्तपर्णी वृक्ष से हानि
तीव्र गंध: अक्टूबर-दिसंबर में इसके फूलों से बहुत तेज गंध आती है, जिससे सेंसिटिव लोगों को सिरदर्द या मतली हो सकती है।
एलर्जी और अस्थमा: इसके फूल और परागकण से एलर्जी, हाई फीवर, और अस्थमा के रोगियों को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
त्वचा में जलन: इसके पौधे का दूधिया रस (sap) त्वचा के संपर्क में आने पर जलन पैदा कर सकता है।
गर्भावस्था में अस्वस्थ: इसके अधिक सेवन से गर्भाशय में संकुचन का खतरा हो सकता है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को इससे बचना चाहिए।
मिथक: लोग इसे 'शैतान का पेड़' मानते हैं और इसके आस-पास नकारात्मक ऊर्जा का डर बना रहता है, हालांकि यह एक आयुर्वेदिक औषधि है।
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