जिलों में दबा पड़ा डीएमएफ का पैसा, ढाई हजार करोड़ जमा, 10 डिस्ट्रिक में ऑडिट तक नहीं

Arun Tiwari | Apr 30, 2026, 13:17 IST
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छत्तीसगढ़ के 10 जिलों में खनिज न्यास निधि (DMF) के तहत ₹2681 करोड़ का भारी-भरकम फंड जमा हुआ है। कोरबा ₹446 करोड़ के साथ सबसे आगे है, जबकि बस्तर और जांजगीर में भी बड़ी राशि उपलब्ध है।

NEWS IN SHORT

  • जिलों में दबा है डीएमएफ का पैसा
  • 2681 करोड़ रुपए जिलों में जमा
  • 10 जिलों में डीएमएफ का ऑडिट ही नहीं
  • कोरबा में हुए डीएमएफ घोटाले की जांच 10 जिलों तक पहुंची
  • पीएमओ तक पहुंची कोरबा डीएफएफ की जांच
  • इस जांच में ईडी की भी हो चुकी इंट्री

NEWS IN DETAIL

RAIPUR : छत्तीसगढ़ में डीएमएफ बहुत चर्चा में रहता है। छत्तीसगढ़ माइनिंग स्टेट है इसलिए यहां भारी भरकम डीएमएफ मिलता है। यहां डीएमएफ घोटाले की भी बहुत चर्चा होती है। कोरबा के डीएमएफ घोटाले की जांच 10 जिलों तक फैल गई है। इसकी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक हो गई है। द सूत्र की पड़ताल में सामने आया है कि छत्तीसगढ़ के जिलों में ढाई हजार करोड़ का फंड जमा है। 10 जिले तो ऐसे हैं जहां पर डीएमएफ का ऑडिट ही नहीं हुआ है। कुछ जिलों में तो दो साल से ऑडिट नहीं हुआ है। इसे सरकार प्रगतिरत ही बता रही है। डीएमएफ जिले का पैसा होता है और उसी जिले में खर्च होता है। तो सबसे बड़ा सवाल है कि यह पैसा खर्च क्यों नहीं हो रहा। यहीं से इस फंड के हेरफेर की शुरुवात हो जाती है।



जिलों में दबा पड़ा डीएमएफ का पैसा:



छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) फंड एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राज्य खनिज संपदा से भरपूर है इसलिए यहां डीएमएफ के तहत बड़ी राशि जमा होती है। लेकिन हालात यह हैं कि विकास कार्यों के लिए बना यह फंड जिलों में खर्च होने के बजाय दबाकर रखा जा रहा है।



पड़ताल में सामने आया है कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में करीब ढाई हजार करोड़ रुपए डीएमएफ के खाते में जमा हैं जबकि 10 जिलों में अब तक इस फंड का ऑडिट तक नहीं हुआ है। सूत्रों के मुताबिक कई जिलों में अधिकारी जानबूझकर फंड को रोककर बैठे हैं।



इसका कारण संभावित गड़बड़ी तक बताया जा रहा है। जहां योजनाएं स्वीकृत भी हुईं वहां काम शुरू होने में महीनों लग रहे हैं। इससे यह संदेह और गहरा हो रहा है कि कहीं न कहीं फंड के उपयोग में पारदर्शिता की कमी है।



इन जिलों में जमा इतना फंड :



रायपुर - 5796 लाख


बलौदाबाजार - 12347 लाख


राजनांदगांव - 10182 लाख


कबीरधाम - 9510 लाख


बस्तर - 26663 लाख


दंतेवाड़ा - 15490 लाख


कोरबा - 44640 लाख


जांजगीर - 21020 लाख


रायगढ़ - 18757 लाख


बिलासपुर - 4067 लाख


कुल - 2681 करोड़



Funds Accumulated in These Districts


10 जिलों में ऑडिट अपूर्ण :

सबसे चिंताजनक बात यह है कि 10 जिलों में डीएमएफ फंड का ऑडिट ही नहीं हुआ। यानी न तो खर्च का पूरा हिसाब है और न ही यह स्पष्ट है कि पैसा कहां और कैसे उपयोग हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑडिट न होना ही गड़बड़ी की सबसे बड़ी वजह बनता है क्योंकि इससे जवाबदेही तय नहीं हो पाती।



विशेषज्ञों का कहना है कि डीएमएफ जैसे महत्वपूर्ण फंड की नियमित मॉनिटरिंग और समय-समय पर ऑडिट जरूरी है। साथ ही खर्च की जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर डालने से पारदर्शिता बढ़ सकती है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो यह फंड भी अन्य योजनाओं की तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ सकता है।



इन जिलों में डीएमएफ का ऑडिट नहीं :



कबीरधाम,कांकेर, बालोद,दंतेवाड़ा ,सुकमा, बिलासपुर, रायगढ़, सरगुजा, सूरजपुर, सारंगढ़



Districts Where DMF Audits Have Not Been Conducted


10 जिलों तक पहुंचा कोरबा का डीएमएफ घोटाला :

कोरबा जिले में सामने आए 350 करोड़ का घोटाला अब तक 500 करोड़ तक पहुंच चुका है। कोरबा के डीएमएफ घोटाले के बाद इस मुद्दे ने और तूल पकड़ लिया है। जांच का दायरा बढ़ते-बढ़ते 10 जिलों तक पहुंच चुका है और शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी की गई है। इस जांच में ईओडब्ल्यू के अलावा ईडी की भी एंट्री हो चुकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब एक जिले में गड़बड़ी सामने आई है तो बाकी जिलों में स्थिति कितनी पारदर्शी है।



क्या होता है डीएमएफ से :

डीएमएफ का मकसद खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देना है। जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क और रोजगार से जुड़े प्रोजेक्ट इस फंड से संचालित होते हैं। नियम के मुताबिक यह पैसा उसी जिले में खर्च होना चाहिए जहां से खनिज निकाला जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। फंड पड़ा है पर योजनाएं या तो शुरू नहीं हो रहीं या अधूरी हैं। जांच में ये भी सामने आया है कि जिले का फंड अधिकारियों ने अपनी मनमर्जी से कहीं और भी खर्च कर दिया है।



निष्कर्ष :

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब हजारों करोड़ रुपए उपलब्ध हैं तो खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास क्यों नहीं दिख रहा। सरकार और प्रशासन को इस पर गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है ताकि डीएमएफ का असली उद्देश्य पूरा हो सके और आम लोगों को इसका लाभ मिल सके।



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