डोंगरगढ़ BJP विवाद पर बड़ा एक्शन : 5 नेताओं को 6 साल के लिए पार्टी से किया बाहर
समझें क्या है पूरा मामला
Rajnandgaon। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में भाजपा के डोंगरगढ़ शहर मंडल में चल रहा अंदरूनी विवाद अब संगठन की सख्त कार्रवाई तक पहुंच गया है। पार्टी ने अनुशासनहीनता और गुटबाजी के आरोपों में पांच नेताओं को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही डोंगरगढ़ शहर मंडल की पूरी कार्यसमिति को भी तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।
भाजपा प्रदेश संगठन की ओर से यह फैसला जिला संगठन की रिपोर्ट और अंदरूनी जांच के बाद लिया गया। पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि संगठन के खिलाफ गतिविधियों और सार्वजनिक बयानबाजी को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इन नेताओं पर गिरी कार्रवाई की गाज
भाजपा ने डोंगरगढ़ विवाद में प्रिंस कक्कड़, वीरेंद्र साहू, संतोष राव, परविंदर सिंह मोंटी भाटिया और अनिल पांडे को पार्टी से बाहर कर दिया है।
इन नेताओं पर आरोप था कि वे संगठन के फैसलों के खिलाफ लगातार बयानबाजी कर रहे थे और मंडल स्तर पर विवाद को बढ़ावा दे रहे थे। पार्टी की ओर से पहले भी इन्हें अनुशासन बनाए रखने को लेकर नोटिस जारी किया गया था।
111 कार्यकर्ताओं के इस्तीफे से बढ़ा था विवाद
डोंगरगढ़ भाजपा में विवाद उस समय खुलकर सामने आया जब 27 जुलाई को 111 कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया था। इन कार्यकर्ताओं ने मंडल अध्यक्ष जसमीत बन्नोआना के कामकाज को लेकर नाराजगी जताई थी।
कार्यकर्ताओं ने संगठन में भेदभाव और अनदेखी जैसे आरोप लगाए थे। इसके बाद कुछ और कार्यकर्ताओं ने भी इस्तीफे दिए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला भाजपा ने दोनों पक्षों से बातचीत शुरू की थी।
मंडल अध्यक्ष को लेकर भी उठे थे सवाल
विवाद का एक बड़ा कारण डोंगरगढ़ शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत बन्नोआना को लेकर नाराजगी भी थी। एक पक्ष उनके खिलाफ लगातार शिकायतें कर रहा था।
वहीं दूसरे पक्ष की गतिविधियों को लेकर भी संगठन असहज था। भाजपा ने विवाद खत्म करने के लिए मंडल कार्यसमिति को ही भंग करने का फैसला लिया।
संभागीय बैठक के बाद आया फैसला
राजनांदगांव में भाजपा की संभागीय बैठक के बाद यह कार्रवाई की गई। बैठक में क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय भी मौजूद थे।
बताया जा रहा है कि संगठन पहले से ही इस मामले में कार्रवाई की तैयारी कर चुका था। बैठक के बाद प्रदेश नेतृत्व की मंजूरी मिलते ही आदेश जारी कर दिया गया।
पार्टी ने दिया अनुशासन का संदेश
भाजपा के इस फैसले को संगठन में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि अंदरूनी मतभेदों को सार्वजनिक करने और संगठन की छवि खराब करने वालों पर कार्रवाई होगी।
डोंगरगढ़ का यह मामला अब जिले की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में नए मंडल गठन और संगठन में बदलाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
क्या था पूरा विवाद?
डोंगरगढ़ भाजपा में मंडल अध्यक्ष को लेकर नाराजगी बढ़ी थी।
कुछ कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक रूप से विरोध दर्ज कराया था।
14 जुलाई को चार कार्यकर्ताओं को अनुशासनहीनता का नोटिस दिया गया था।
27 जुलाई को 111 कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफा दिया।
जिला संगठन की जांच के बाद प्रदेश भाजपा को रिपोर्ट भेजी गई।
इसके बाद पांच नेताओं को निष्कासित और मंडल कार्यसमिति को भंग कर दिया गया।
FAQ
- डोंगरगढ़ भाजपा विवाद में कितने नेताओं पर कार्रवाई हुई है?
डोंगरगढ़ भाजपा विवाद में पांच नेताओं को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया गया है। - भाजपा ने यह कार्रवाई क्यों की?
पार्टी ने गुटबाजी, अनुशासनहीनता और संगठन के खिलाफ गतिविधियों के आरोपों के बाद यह कार्रवाई की है। - डोंगरगढ़ मंडल विवाद कैसे शुरू हुआ था?
मंडल अध्यक्ष को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ी थी। इसके बाद 111 कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफा दिया, जिसके बाद संगठन ने जांच कर कार्रवाई की।
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