छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग का एक्शन, प्रसव और बुखार की कई दवाएं फेल
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ में कई जरूरी दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल।
- प्रसव में उपयोगी ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन गंभीर रूप से अमानक।
- दर्द, बुखार और सर्दी की दवाओं पर तत्काल रोक।
- सभी मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों में स्टॉक ज़ब्त करने के निर्देश।
- साइड इफेक्ट या शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने प्रसव, दर्द, बुखार और सर्दी-जुकाम में इस्तेमाल होने वाली कई दवाओं को अवमानक (सब-स्टैंडर्ड) और मिथ्याछाप घोषित कर दिया है। सरकार ने इन दवाओं की बिक्री, भंडारण और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
इन कंपनियों की दवाएं पाई गईं अवमानक
भारत सरकार के ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) और रायपुर की कालीबाड़ी स्थित खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कड़ी कार्रवाई की गई है। मुख्य रूप से निम्नलिखित दवाओं के विशिष्ट बैच मानकों पर खरे नहीं उतरे
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन आईपी 5 एमएल (बैच नंबर 1-7881) : प्रसव के दौरान इस्तेमाल होने वाले इस इंजेक्शन को गंभीर रूप से अवमानक पाया गया है।
नाक्पैन-पी (बैच एमटी-250777) : हरिद्वार की मैटिन्स हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड की यह दवा भी फेल हुई है।
फ्लामो स्टार-एपी : हसुलिया स्थित एनोन फार्मास्युटिकल की दर्द निवारक दवा।
एसीएचई पी (बैच एलवी 25डीटी-066बी) : हिमाचल प्रदेश के सोलन की एलवी लाइफसाइंसेज द्वारा निर्मित।
कोल्ड जिया टैबलेट्स : नालागढ़ स्थित गो-ईश रेमेडीज लिमिटेड की सर्दी की दवा।
मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों में सघन जांच के निर्देश
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक ने राज्य के सभी जिला औषधि नियंत्रण अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सभी मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं और सरकारी व निजी अस्पतालों में सघन जांच अभियान चलाया जाएगा और संबंधित बैच की दवाओं का स्टॉक तुरंत जब्त किया जाएगा।
पुराना है नकली और अवमानक दवाओं का कनेक्शन
छत्तीसगढ़ में दवाओं की खराब गुणवत्ता का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की सितंबर 2025 की रिपोर्ट में देशभर की 112 दवाओं के सैंपल फेल हुए थे, जिनमें 10 दवाएं छत्तीसगढ़ से जुड़ी थीं। इसके अलावा, बच्चों को दी जाने वाली कृमिनाशक 'एल्बेंडाजोल टैबलेट' के चार बैच (जो जनवरी 2025 में बाजार में आए थे) फेल पाए गए थे, जिन पर जनवरी 2026 में रोक लगाई गई। वहीं नवंबर 2024 में सप्लाई की गई 'एमोक्सिसिलिन टैबलेट' में भी सक्रिय तत्व कम मिले थे। हद तो तब हो गई जब फंगल इन्फेक्शन की एक क्रीम पूरी तरह नकली पाई गई, जिसका निर्माता बिना वैध लाइसेंस के दूसरी कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर रहा था।
साइड इफेक्ट होने पर यहाँ करें शिकायत
एफडीए ने आम जनता से अपील की है कि वे इन दवाओं के इस्तेमाल को लेकर बेहद सतर्क रहें। यदि किसी भी दवा के सेवन के बाद कोई विपरीत प्रभाव (साइड इफेक्ट) दिखता है या दवा की गुणवत्ता पर संदेह होता है, तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 9340597097 पर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभागप्रसव और बुखार जैसी जरूरी दवाओं का टेस्ट में फेल होना जनस्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की यह सख्त कार्रवाई और अलर्ट सराहनीय है, लेकिन भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए दवा निर्माताओं पर कड़ी कानूनी कार्रवाई और नियमित जांच बेहद जरूरी है।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में किन दवाओं पर रोक लगाई गई है?
प्रसव के समय इस्तेमाल होने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन, और दर्द, बुखार व सर्दी-जुकाम की कुछ विशेष बैच की दवाओं पर। - इन दवाओं को क्यों रोका गया है?
सरकारी और लैब जांच में इन दवाओं के सैंपल 'अवमानक' (सब-स्टैंडर्ड/खराब गुणवत्ता) और मिथ्याछाप पाए गए हैं। - प्रशासन ने इस पर क्या एक्शन लिया है?
पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों से इन दवाओं का स्टॉक तुरंत जब्त करने के निर्देश दिए हैं। - साइड इफेक्ट या शिकायत होने पर कहाँ संपर्क करें?
किसी भी तरह की गड़बड़ी या साइड इफेक्ट दिखने पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के हेल्पलाइन नंबर 9340597097 पर शिकायत करें।
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