नशे के नेटवर्क पर प्रहार, बड़े तस्करों की संपत्ति होगी कुर्क, सरकार ने बनाई समिति, मेडिकल स्टोर्स जद में आए

Arun Tiwari | Oct 29, 2026, 12:18 IST
छत्तीसगढ़ में नशा तस्करों पर शिकंजा
Chhattisgarh government cracks down on drug trafficking networks and big smugglers
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नशे के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। अब सिर्फ गांजा पकड़ने और छोटे विक्रेताओं को गिरफ्तार करने से काम नहीं चलेगा। सरकार की नजर नशे का पूरा कारोबार चलाने वाले बड़े तस्करों पर भी होगी। नशे की सप्लाई कहां से होती है? इसे कौन पहुंचाता है? बिक्री कौन करता है? इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे।

सरकार अब तस्करी के पूरे नेटवर्क को तोड़ने की तैयारी में है। नशे से कमाए गए पैसों और संपत्तियों की भी जांच होगी। तस्करी में इस्तेमाल होने वाले वाहनों पर भी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे वाहनों को जब्त करने और उनकी नीलामी की प्रक्रिया तेज होगी। सरकार का मकसद साफ है। नशे के कारोबार की जड़ तक पहुंचना और पूरे नेटवर्क को खत्म करना।



छोटे पैडलरों के साथ बड़े तस्कर भी निशाने पर

छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों की समीक्षा की गई। इस दौरान नशीले पदार्थों की जब्ती और आरोपियों पर हुई कार्रवाई की जानकारी ली गई। लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई।



गृह मंत्री ने कहा कि सिर्फ छोटे विक्रेताओं पर कार्रवाई करना काफी नहीं है। नशीले पदार्थों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने वालों के साथ बड़े कारोबारियों की पहचान भी जरूरी है।



पुलिस को अब कई अहम सवालों के जवाब तलाशने होंगे। नशीले पदार्थ कहां से आ रहे हैं? इनकी सप्लाई कौन कर रहा है? स्थानीय स्तर पर बिक्री कौन संभाल रहा है? इन सभी पहलुओं की जांच की जाएगी।



गांजा और दूसरे नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों की मैपिंग भी होगी। इससे तस्करी के रास्तों का पता लगाया जाएगा। सप्लायरों और मुख्य कारोबारियों की पहचान की जाएगी।



सरकार चाहती है कि नशे की पूरी Supply Chain तोड़ी जाए। इससे तस्करों के दोबारा कारोबार शुरू करने की संभावना कम होगी।




नशे की कमाई से बनाई संपत्तियों की जांच

सरकार अब तस्करों की कमाई पर भी शिकंजा कसने जा रही है। नशे के कारोबार से कमाए गए पैसों की जांच होगी। इन पैसों से खरीदी गई संपत्तियों का भी पता लगाया जाएगा।



ऐसी संपत्तियों को कानून के अनुसार कुर्क किया जाएगा। जब्ती की कार्रवाई भी तेज होगी। इसके लिए एनडीपीएस एक्ट और सफेमा के तहत हुई कार्रवाइयों की समीक्षा की गई है।



अवैध कमाई की जांच के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी। इसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल होंगे। वित्तीय और कानूनी विशेषज्ञ भी समिति का हिस्सा होंगे।



यह समिति पैसों के लेन-देन की जांच करेगी। इससे पता लगाया जाएगा कि नशे से कमाया गया पैसा कहां लगाया गया है। किन संपत्तियों में निवेश हुआ है? इस कारोबार के पीछे कौन लोग हैं? इन सभी बातों की पड़ताल की जाएगी।



इस तरह तस्करों के Financial Network की पहचान की जा सकेगी। इसके बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी।




मेडिकल स्टोरों पर भी रहेगी नजर

सरकार नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर भी रोक लगाना चाहती है। इसके लिए मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच होगी। ड्रग इंस्पेक्टरों के साथ मिलकर यह कार्रवाई की जाएगी।



स्कूलों और कॉलेजों के आसपास खास निगरानी रखी जाएगी। युवाओं की आवाजाही वाले इलाकों पर भी ध्यान दिया जाएगा।



इन जगहों पर प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री की जांच होगी। नशीले कैप्सूल बेचने वालों पर भी नजर रखी जाएगी। नशे के लिए इस्तेमाल होने वाली सिरिंज और नीडल की अवैध बिक्री पर भी कार्रवाई होगी।



हर जिले में ऐसे स्थानों की पहचान की जाएगी, जहां नशे की बिक्री या सेवन की शिकायतें मिलती हैं। इन इलाकों का नियमित निरीक्षण होगा। शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी। इसके बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी।




तीन महीने में कार्रवाई तेज करने का लक्ष्य

नशे की तस्करी में इस्तेमाल होने वाले वाहनों पर भी सरकार सख्ती करेगी। ऐसे वाहनों को कानून के अनुसार राजसात किया जाएगा। इसके बाद उनकी नीलामी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।



सरकार ने अगले तीन महीनों में ज्यादा से ज्यादा पात्र मामलों में कार्रवाई पूरी करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।



जिन मामलों में न्यायालय की जरूरत है, उन्हें विशेष न्यायालयों में प्रभावी ढंग से पेश किया जाएगा। लंबित मामलों में भी तेजी लाई जाएगी।



तस्करी के दौरान पुलिस पर हमला करने वाले आरोपियों को भी नहीं बख्शा जाएगा। उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



31 दिसंबर 2026 तक पुराने जब्त नशे को किया जाएगा नष्ट

सरकार ने जब्त किए गए नशीले पदार्थों को नष्ट करने की समय सीमा भी तय की है। यह प्रक्रिया 31 दिसंबर 2026 तक पूरी करनी है।



इसमें उन नशीले पदार्थों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें 30 जून 2026 तक जब्त किया गया था। ये पदार्थ छह महीने से अधिक पुराने होने चाहिए। साथ ही, उनके निस्तारण की कानूनी प्रक्रिया पूरी होनी जरूरी है।



इसके लिए न्यायालय से जुड़ी औपचारिकताएं समय पर पूरी की जाएंगी। प्रशासनिक प्रक्रिया में भी देरी नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।



इससे पुराने जब्त नशीले पदार्थों का समय पर नष्टीकरण हो सकेगा।




हेल्पलाइन नंबर 1933 का होगा प्रचार

नशे के खिलाफ लड़ाई में आम लोगों की भागीदारी भी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए राष्ट्रीय मादक पदार्थ निषेध हेल्पलाइन ‘मानस’ के टोल फ्री नंबर 1933 का प्रचार किया जाएगा।



इस नंबर के जरिए लोग नशे के अवैध कारोबार की जानकारी संबंधित एजेंसियों तक पहुंचा सकेंगे। इससे तस्करी से जुड़ी गतिविधियों की सूचना मिलने में मदद मिलेगी।



स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। सोशल मीडिया के जरिए नशे के नुकसान बताए जाएंगे। युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक किया जाएगा।



सरकार का मानना है कि सिर्फ गिरफ्तारी से नशे का कारोबार खत्म नहीं होगा। इसके लिए पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई जरूरी है। तस्करों की कमाई, सप्लाई के रास्तों और बिक्री से जुड़े लोगों की पहचान करनी होगी। इसी दिशा में अब कार्रवाई तेज करने की तैयारी है।

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