छत्तीसगढ़ की अदालत ने बिना लाइसेंस बाइक चलाने पर बेटे के साथ पिता को भी भेजा जेल, जानें पूरा मामला
समझें क्या है पूरा मामला
- सुपेला थाना क्षेत्र में 4 अगस्त 2025 की रात बाइक और एक्टिवा की टक्कर हुई।
- हादसे में एक्टिवा सवार शादान अली की मौके पर मौत हो गई।
- बाइक चला रहे मोहित कुमार बघेल के पास वैध लाइसेंस नहीं था।
- पुलिस जांच में उसके पिता मोहन लाल बघेल पर बाइक देने की बात सामने आई।
- कोर्ट ने पिता को तीन महीने की कैद और 5 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी।
4 अगस्त 2025 की रात क्या हुआ था?
सुपेला थाना क्षेत्र में स्मृतिनगर चौकी के पास इंदु आईटी स्कूल के नजदीक बाइक और एक्टिवा आपस में टकरा गईं। बाइक मोहित कुमार बघेल चला रहा था। टक्कर इतनी तेज थी कि एक्टिवा सवार शादान अली की मौके पर मौत हो गई। उनके साथ बैठे उत्तम पांडेय गंभीर रूप से घायल हुए।
जांच में क्या सामने आया?
स्मृतिनगर पुलिस ने जांच की। जांच में पता चला कि बाइक चला रहे मोहित के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। इसके बावजूद वह बाइक चला रहा था। पुलिस के मुताबिक उसके पिता मोहन लाल बघेल ने उसे बाइक चलाने को दी थी। पुलिस ने साक्ष्य जुटाकर कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया।
बेटे को क्या सजा मिली?
सत्र न्यायालय ने 31 अक्टूबर 2026 को मोहित कुमार बघेल को दोषी माना। सजा इस तरह है:
भारतीय न्याय संहिता की धारा 105(2) में पांच साल की सजा और एक हजार रुपए जुर्माना
धारा 110(2) में तीन साल का कारावास और एक हजार रुपए जुर्माना
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 में 10 महीने का कारावास
धारा 3/181 में तीन महीने का कारावास
पिता को क्या सजा मिली?
कोर्ट ने सिर्फ बाइक चालक को नहीं, वाहन देने वाले पिता को भी जिम्मेदार माना। मोहन लाल बघेल को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 5/180 में दोषी ठहराया गया। सजा तीन महीने का कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माना है। जुर्माना न देने पर सात दिन की अतिरिक्त जेल होगी।
दुर्ग पुलिस ने क्या अपील की?
फैसले के बाद दुर्ग पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है। उसने कहा है कि नाबालिग या बिना वैध लाइसेंस वाले बच्चों को वाहन चलाने के लिए न दें। पुलिस के मुताबिक चाबी देना छोटी बात लग सकती है। पर नियमों की अनदेखी किसी की जान जाने और परिवार के जेल पहुंचने की वजह बन सकती है।
अब आगे क्या?
फिलहाल अदालत के इस फैसले में पिता को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बिना लाइसेंस वाले व्यक्ति को वाहन चलाने देना भी कानूनी रूप से भारी पड़ सकता है।
यह खबर क्यों जरूरी है
कई परिवारों में बच्चे या बिना लाइसेंस वाले सदस्य बाइक चला लेते हैं। इस फैसले से साफ होता है कि वाहन देने वाले भी कानून के दायरे में आ सकते हैं। यह मामला एक व्यक्ति की मौत से जुड़ा है। इसलिए यह सिर्फ चालान या जुर्माने की बात नहीं रही। पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि बिना लाइसेंस वालों को वाहन न दें। साथ ही यह भी जरूरी है कि सजा, धाराएं और उसके असर की सही जानकारी पाठकों तक पहुंचे। मृतक के परिवार की स्थिति और मुआवजे जैसे सवाल अभी सामने नहीं आए हैं।
FAQ
सवाल: दुर्ग की अदालत ने पिता को क्या सजा सुनाई?
जवाब: मोटर वाहन अधिनियम की धारा 5/180 में तीन महीने की साधारण कैद और 5 हजार रुपये जुर्माना। जुर्माना न देने पर सात दिन की अतिरिक्त जेल होगी।
सवाल: हादसा कब और कहां हुआ था?
जवाब: 4 अगस्त 2025 की रात सुपेला थाना क्षेत्र में स्मृतिनगर चौकी के पास इंदु आईटी स्कूल के नजदीक। एक्टिवा सवार शादान अली की मौके पर मौत हो गई थी।
सवाल: बेटे को क्या सजा मिली?
जवाब: भारतीय न्याय संहिता की धारा 105(2) में पांच साल और 110(2) में तीन साल की सजा। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 में 10 महीने और 3/181 में तीन महीने की सजा भी मिली।