दुर्ग में डॉक्टर की घिनौनी करतूत: नाबालिग छात्र से अश्लील हरकत
समझें क्या है पूरा मामला
- मेडिकल सर्टिफिकेट के बहाने छात्र से गलत हरकत का आरोप
- दुर्ग में डॉक्टर गिरफ्तार, नाबालिग छात्र ने लगाए गंभीर आरोप
- 10वीं के छात्र की शिकायत पर डॉक्टर पर POCSO केस
- बोरसी सेंटर में मामला, जांच में जुटी पुलिस
- छात्र के आरोपों के बाद प्रशासन ने शुरू की जांच
Durg। जिले के पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र में नाबालिग छात्र के साथ कथित अश्लील हरकत का मामला सामने आया है। आरोप है कि मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने पहुंचे 10वीं कक्षा के छात्र के साथ डॉक्टर ने जांच के दौरान गलत व्यवहार किया। छात्र की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।
मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए सेंटर पहुंचा था छात्र
पुलिस के मुताबिक, घटना 24 जुलाई की बताई जा रही है। 10वीं कक्षा में पढ़ने वाला छात्र अपने एक दोस्त के साथ बोरसी स्थित सेवा भारती मातृ छाया एडॉप्शन सेंटर पहुंचा था। छात्र को किसी काम के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की जरूरत थी।
इसी सिलसिले में वह सेंटर में मेडिकल जांच कराने गया था। आरोप है कि जांच प्रक्रिया के दौरान सेंटर संचालक डॉक्टर सुधीर हिसीकर ने छात्र के साथ अनुचित व्यवहार किया।
छात्र ने घर पहुंचने के बाद पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। इसके बाद परिवार के लोग छात्र को लेकर पद्मनाभपुर थाना पहुंचे और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के बाद पुलिस ने की कार्रवाई
नाबालिग छात्र की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया।
इसके बाद आरोपी डॉक्टर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। जांच के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और न्यायालय में पेश किया। कोर्ट के आदेश के बाद आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।
पुलिस कर रही मामले की जांच
दुर्ग सीएसपी हर्षित मेहर ने बताया कि नाबालिग की शिकायत मिलने के बाद मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा रही है।
पुलिस अब छात्र के बयान, उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य संबंधित जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
प्रशासन ने एडॉप्शन सेंटर की जांच के दिए निर्देश
घटना सामने आने के बाद जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने महिला एवं बाल विकास विभाग को मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन ने संबंधित एडॉप्शन सेंटर की कार्यप्रणाली और उसके पंजीयन की भी समीक्षा करने को कहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह सेंटर पहले भी बच्चों को गोद देने की प्रक्रिया से जुड़ा रहा है।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
इस घटना के बाद बच्चों की सुरक्षा और संस्थानों में होने वाली गतिविधियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन और पुलिस दोनों ही स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार पूरी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है।
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