छत्तीसगढ़ के वन कर्मचारियों के लिए खरीदी जा रही 29 हजार की लाठी, बाजार से दोगुनी कीमत पर उठे सवाल

Arun Tiwari | Oct 30, 2026, 17:48 IST
छत्तीसगढ़ में 29 हजार रुपए की एक लाठी! दुर्ग वन मंडल की स्मार्ट स्टिक खरीदी पर उठ रहे हैं सवाल
Chhattisgarh’s Durg Forest Division faces questions over its ₹46.40 lakh tender for 160 smart batons
छत्तीसगढ़ में वनकर्मियों की सुरक्षा के लिए आधुनिक स्मार्ट लाठी खरीदने की तैयारी है। लेकिन इस खरीदी की कीमत अब चर्चा का विषय बन गई है। दुर्ग वन मंडल ने 160 स्मार्ट स्टिक खरीदने के लिए जेम (GeM) पोर्टल पर टेंडर जारी किया है। इसके लिए 46 लाख 40 हजार रुपए का बजट तय किया गया है।

इस हिसाब से एक लाठी की कीमत करीब 29 हजार रुपए बैठ रही है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर एक लाठी के लिए इतनी बड़ी रकम क्यों खर्च की जा रही है? बताया जा रहा है कि बाजार में इस तरह की स्टिक दो से तीन गुना कम कीमत पर मिल जाती हैं। ऐसे में सरकारी खरीदी की दर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, टेंडर में शामिल स्टिक की असली तकनीकी खूबियों की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं, वन विभाग की ओर से भी अभी कोई सफाई नहीं दी गई है।



समझें क्या है पूरा मामला

  • दुर्ग वन मंडल ने जेम पोर्टल पर स्मार्ट स्टिक का टेंडर निकाला है।
  • 160 स्मार्ट स्टिक खरीदी जानी हैं। इसके लिए 46 लाख 40 हजार रुपए का फंड तय है।
  • एक स्मार्ट स्टिक की कीमत करीब 29 हजार रुपए पड़ रही है।
  • बाजार में कीमत दो से तीन गुना कम बताई जा रही है।
  • कीमत पर सवाल उठे हैं, लेकिन वन विभाग का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।

दुर्ग वन मंडल का टेंडर कब निकला?

जानकारी के मुताबिक, दुर्ग वन मंडल ने यह टेंडर 15 अक्टूबर को जेम पोर्टल पर जारी किया था। इसे बंद करने की तारीख 30 अक्टूबर तय की गई थी। वहीं, 31 अक्टूबर को टेंडर खोलने की तारीख रखी गई है।



टेंडर के तहत 160 स्मार्ट स्टिक खरीदी जानी हैं। इन्हें पोलीकार्बोनेट लाठी बताया गया है। इनकी खरीदी के लिए कुल 46 लाख 40 हजार रुपए का बजट निर्धारित किया गया है।



इस हिसाब से एक स्टिक की औसत कीमत 29 हजार रुपए बैठती है। इसी गणना के बाद खरीदी की दर पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, यह जानना भी जरूरी है कि टेंडर में शामिल स्टिक की तकनीकी विशेषताएं क्या हैं। इसके बिना बाजार में मिलने वाली सामान्य स्टिक से सीधी तुलना करना सही नहीं होगा।



स्मार्ट स्टिक में क्या-क्या सुविधाएं होती हैं?

सामान्य लाठी और स्मार्ट स्टिक में अंतर उनकी सुविधाओं का होता है। स्मार्ट स्टिक में कई तरह के आधुनिक उपकरण लगाए जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल सुरक्षा और आपात स्थिति में किया जाता है।



इस तरह की स्टिक में आमतौर पर ये सुविधाएं हो सकती हैं:



  • टॉर्च और रात में रोशनी की व्यवस्था।
  • आपात स्थिति में सायरन या पैनिक अलार्म।
  • मोबाइल चार्ज करने की सुविधा।
  • रिचार्जेबल बैटरी।
  • जंगली जानवरों से बचाव के लिए सुरक्षा उपकरण।

हालांकि, दुर्ग वन मंडल के टेंडर में इन सभी सुविधाओं का होना स्पष्ट नहीं है। टेंडर की वास्तविक तकनीकी जानकारी सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि इन स्टिक में कौन-कौन से उपकरण दिए जा रहे हैं।




बाजार से तुलना में क्या है अंतर?

स्मार्ट स्टिक की कीमत को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा बाजार दर से तुलना की वजह से हो रही है। इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सामान्य लाठियों की कीमत करीब 120 रुपए से शुरू होती है। वहीं, कुछ महंगी स्टिक की कीमत 10 हजार रुपए तक बताई गई है।



अब अगर 10 हजार रुपए वाली स्टिक को आधार मानकर गणना करें, तो 160 स्टिक की कुल कीमत 16 लाख रुपए होती है। दूसरी तरफ, दुर्ग वन मंडल के टेंडर में 160 स्टिक के लिए 46.40 लाख रुपए का बजट रखा गया है।



दोनों राशियों के बीच 30.40 लाख रुपए का अंतर है। इसी वजह से सरकारी खरीदी की कीमत पर सवाल उठ रहे हैं।



हालांकि, बाजार में मिलने वाली सभी स्टिक एक जैसी नहीं होतीं। उनकी गुणवत्ता, तकनीक और सुविधाओं में अंतर हो सकता है। इसलिए सही तुलना के लिए समान तकनीक और सुविधाओं वाले उत्पादों की कीमत देखना जरूरी है।




खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर क्या सवाल?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर है। अगर स्मार्ट स्टिक की कीमत बाजार में उपलब्ध समान उत्पादों से ज्यादा है, तो इसकी वजह बताई जानी चाहिए।



यह भी देखना जरूरी है कि टेंडर में कितनी कंपनियों ने हिस्सा लिया। क्या सभी कंपनियों को बराबर मौका मिला? प्राप्त निविदाओं के आधार पर कीमतों का सही मूल्यांकन किया गया या नहीं? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब सामने आना जरूरी है।



जेम पोर्टल से खरीदी का मतलब सही कीमत?

सरकारी विभागों में सामान खरीदने के लिए जेम यानी Government e-Marketplace पोर्टल का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य सरकारी खरीद को पारदर्शी बनाना और कंपनियों को प्रतिस्पर्धा का मौका देना है।



लेकिन जेम पोर्टल से खरीदी होने भर से किसी उत्पाद की कीमत सही साबित नहीं हो जाती। इसके लिए उत्पाद की जरूरत, तकनीकी विशेषताएं, गुणवत्ता और बाजार में उपलब्ध कीमतों की तुलना करना भी जरूरी है।



दुर्ग वन मंडल की स्मार्ट स्टिक खरीदी में भी यही सवाल सामने है। 160 लाठियों के लिए 46.40 लाख रुपए का बजट रखा गया है। ऐसे में विभाग को बताना चाहिए कि एक स्टिक की कीमत करीब 29 हजार रुपए कैसे तय हुई।




विभाग को क्या स्पष्ट करना चाहिए?

इस मामले में वन विभाग का पक्ष सामने आना जरूरी है। विभाग को बताना चाहिए कि स्मार्ट स्टिक में कौन-कौन सी आधुनिक सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही, इनकी कीमत तय करने का आधार क्या है।



अगर इन स्टिक में ऐसी खास तकनीक है, जो वनकर्मियों की सुरक्षा और गश्त के दौरान मदद करती है, तो उसकी जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।



इसके अलावा, बाजार में उपलब्ध समान उत्पादों से कीमत की तुलना और टेंडर में मिली निविदाओं का विवरण भी सामने आना चाहिए। इससे खरीदी की पूरी प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।



फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में विभाग की ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसलिए अभी खरीदी में गड़बड़ी होने का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। लेकिन कीमत को लेकर उठे सवालों का जवाब मिलना जरूरी है।



पहले भी उठे हैं सरकारी खरीदी पर सवाल

छत्तीसगढ़ में सरकारी खरीदी को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। अलग-अलग मामलों में सरकारी सामान की कीमतों को लेकर चर्चा हुई है।



जानकारी के मुताबिक, पहले एक जग की कीमत 32 हजार रुपए बताए जाने का मामला सामने आया था। वहीं, स्मार्ट टीवी की लाखों रुपए में खरीदी को लेकर भी सवाल उठे थे।



जेम पोर्टल के जरिए होने वाली सरकारी खरीदी पर भी अलग-अलग मौकों पर विवाद सामने आते रहे हैं। कुछ मामलों में टेंडर निरस्त किए जाने की जानकारी भी दी गई है।

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