बेहतर इलाज के लिए मिला 2 करोड़ का फंड, दुर्ग जिला अस्पताल में अफसरों के कमरों में लग गए एसी

Arun Tiwari | Apr 28, 2026, 11:05 IST
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दुर्ग जिला अस्पताल में मिले 2 करोड़ सीएसआर फंड का अधिकांश हिस्सा अधिकारियों के कमरों में एसी खरीदने पर खर्च किया गया, जबकि मरीजों की सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा गया।

RAIPUR : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल में बेहतर इलाज और दवाओं के लिए मिले फंड से अफसरों ने एसी खरीद लिए। कोरोना काल के दौरान बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के मकसद से भिलाई स्टील प्लांट से मिले सीएसआर फंड के उपयोग को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।



दुर्ग के जिला अस्पताल को मिले 2 करोड़ रुपए मिले। इनमें से करीब 40 लाख रुपए एयर कंडीशनर (एसी) खरीदने में खर्च कर दिए गए। जबकि बाकी राशि का पूरा हिसाब अब तक स्पष्ट नहीं किया गया है। इस मामले में अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।



ये है पूरा मामला:

जानकारी के मुताबिक कोरोना की तीसरी लहर के समय मरीजों के इलाज और अस्पताल की सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सीएसआर मद से यह राशि दी गई थी। लेकिन जांच में सामने आया है कि इस फंड का बड़ा हिस्सा मरीजों की जरूरतों के बजाय अधिकारियों और डॉक्टरों के कमरों में एसी लगाने में खर्च कर दिया गया।



यहां तक कि बाबुओं के कमरों में भी एसी लग गए। वहीं अस्पताल के वार्ड और वेटिंग हॉल जैसी जगहों पर आवश्यक सुविधाओं का अभाव बना रहा। इक्का दुक्का जगहों पर अफसरों के कमरों से निकले एसी लगा दिए गए।



राशि के खर्च का ब्यौरा ही नहीं:

बताया जा रहा है कि 5 अप्रैल 2023 को यह राशि कलेक्टर के सीएसआर खाते में ट्रांसफर की गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग को इस फंड के उपयोग की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन विभाग अब तक केवल 16.49 लाख रुपये का ही स्पष्ट ब्यौरा दे पाया है।



इसमें भी करीब 8 लाख 24 हजार रुपए के उपयोग का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया है, जबकि शेष राशि के खर्च का कोई हिसाब किताब ही उपलब्ध नहीं है।



एक कमरे में 2 एसी:

यह भी सामने आया है कि अस्पताल के कई अधिकारियों और डॉक्टरों के कमरों में एक-एक नहीं बल्कि दो-दो एसी लगाए गए हैं। इसके उलट मरीजों के वार्डों में बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि जिस फंड का उद्देश्य मरीजों को राहत देना था उसका उपयोग प्राथमिकता के अनुसार क्यों नहीं किया गया।



तीन साल बाद भी हिसाब नहीं:

अस्पताल प्रबंधन से जुड़े अधिकारी का कहना है, यह एसी पहले के अधिकारियों ने खरीदे हैं। तीन साल बीत जाने के बाद भी इस फंड का पूरा हिसाब न होना प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। अधिकारियों का कहना है कि उपयोगिता प्रमाण पत्र जुटाने और दस्तावेजों के संकलन की प्रक्रिया जारी है, लेकिन अब तक संतोषजनक जवाब सामने नहीं आया है।



इस मामले की आरटीआई से भी जानकारी नहीं दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीएसआर फंड का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए खासकर तब जब यह राशि सीधे जनहित से जुड़ी हो।



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