दुर्ग में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: बोलेरो पिकअप के सीक्रेट चेंबर से मिले 4 करोड़ रूपए, दो लोग हिरासत में
दुर्ग जिले में पुलिस ने पिकअप से 4 करोड़ रुपए कैश जब्त किया। रकम गाड़ी के पिछले हिस्से में छिपी थी। पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है।
सूचना के आधार पर यह कार्रवाई 26 अक्टूबर की रात हुई। मामला खुर्सीपार थाना क्षेत्र के डबरापारा का है। Durg news की इस खबर में सबसे अहम सवाल है: पैसा किसका था?
समझें क्या है पूरा मामला
- दुर्ग पुलिस ने पिकअप से 4 करोड़ रुपए कैश जब्त किया है।
- रकम पिकअप के पिछले हिस्से में बने सीक्रेट चेंबर में रखी थी।
- वाहन रायपुर से नागपुर जा रहा था।
- पुलिस ने पिकअप सवार दो लोगों को हिरासत में लिया है।
- आगे की जांच अब आयकर विभाग करेगा।
4 करोड़ रुपए यानी कितना पैसा
4 करोड़ रुपए यानी 400 लाख रुपए। अगर सभी नोट 500 रुपए के हों, तो गिनती 80 हजार नोट बैठती है। 10 हजार रुपए महीना कमाने वाले को 333 साल लगेंगे इतनी रकम जोड़ने में।
वाहन चेकिंग में कैश बरामद
खुर्सीपार थाना पुलिस को रात करीब 11 बजे सूचना मिली। इसके बाद वाहन चेकिंग शुरू हुई। सफेद रंग की बोलेरो मैक्स पिकअप रोकी गई। उसका नंबर CG 04 QU 5996 था। वह रायपुर से नागपुर जा रही थी। यहीं से मामला पलट गया।
पिकअप में सीक्रेट चेंबर मिला
पुलिस ने पिकअप की जांच की। उसका पिछला हिस्सा बदला हुआ मिला। इसे ऐसे बंद किया गया कि अंदर रखी चीजें बाहर न दिखें। बारीकी से तलाशी हुई तो पिकअप में सीक्रेट चेंबर मिला।
सीक्रेट चेंबर (गुप्त खाना) वह जगह है, जहां सामान बाहर से दिखाई न दे। चेंबर खोलने पर अंदर कैश रखा था। गिनती हुई तो रकम 4 करोड़ रुपए निकली।
अलग-अलग चेंबर में छिपे नोट
पिछले हिस्से में अलग-अलग सीक्रेट चेंबर बने थे। इतनी रकम छिपाकर ले जाने पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार पिकअप में दो लोग सवार थे। हिरासत का मतलब पूछताछ के लिए रोकना है। इसका मतलब यह नहीं कि दोनों दोषी साबित हो गए।
कौन हैं पिकअप में सवार दोनों
उनकी पहचान भवेशभाई जीनाभाई डाभी और विष्णुदेव दुबे के रूप में हुई है। भवेशभाई जीनाभाई डाभी वाहन चला रहा था। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया है और पूछताछ कर रही है। अब तक सार्वजनिक जानकारी में दोनों के पते या पेशे का जिक्र नहीं है।
अब तक पता नहीं चला कि पैसा किसका था। यह भी साफ नहीं कि इसे किसके पास पहुंचना था। बताया जा रहा है कि रकम किसी ट्रांसपोर्टर की है। आखिर इतनी रकम इस तरह छिपाकर क्यों ले जाई जा रही थी?
रायपुर से नागपुर कैश का रूट
शुरुआती जानकारी के मुताबिक रकम भनपुरी (रायपुर) के जीडी ट्रांसपोर्ट से लोड हुई। इसे नागपुर ले जाया जा रहा था। रायपुर से नागपुर कैश ले जाने की वजह पुलिस अभी खोज रही है।
पुलिस को आशंका है कि यह हवाला का पैसा है। हवाला (बैंक के बाहर पैसा भेजने का तरीका) में बैंक रिकॉर्ड नहीं बनता। हवाला का पैसा होने की बात फिलहाल आशंका के स्तर पर है।
पुलिस की इस कार्रवाई में रकम गुप्त खानों में छिपी मिली। यह छत्तीसगढ़ पुलिस कार्रवाई फिलहाल शुरुआती चरण में है।
पुलिस ने मामले की जानकारी आयकर विभाग को पत्र लिखकर दी है। अब आयकर विभाग जांच करेगा कि रकम कहां से आई। आयकर विभाग का काम रकम के स्रोत और हिसाब को परखना होता है।
पुलिस अब क्या-क्या जांच रही
पुलिस यह भी जांच रही है कि सीक्रेट चेंबर कब और किसने बनवाया। बरामद रकम के कौन से दस्तावेज हैं, यह भी देखा जा रहा है। दुर्ग पुलिस कैश जब्त करने के बाद अब हर सुराग खंगाल रही है।
अब तक चार बातें साफ नहीं हैं। पहली, पैसा किसका था। दूसरी, उसे किसके पास पहुंचना था। तीसरी, सीक्रेट चेंबर कब और किसने बनवाया। चौथी, रकम के दस्तावेज क्या हैं। इन्हीं सवालों के जवाब पुलिस और आयकर विभाग को खोजने हैं।
यह पूरा मामला वाहन चेकिंग में कैश बरामद होने से शुरू हुआ।
यह खबर क्यों जरूरी है:
नकदी का हिसाब हर नागरिक और कारोबारी के लिए मायने रखता है। भारी रकम बिना दस्तावेज सड़क पर ले जाई जाए, तो सवाल उठते हैं। पुलिस रकम का स्रोत खोज रही है और आयकर विभाग आगे जांच करेगा। कानून की नजर में हर व्यक्ति दोष साबित होने तक निर्दोष माना जाता है। इसलिए जांच पूरी होने तक किसी को दोषी कहना ठीक नहीं। सबक साफ है: मोटी रकम का लेन-देन बैंक और दस्तावेज के साथ करें।