FIR के बाद कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप पर गिरी गाज, महिला कर्मचारी के वेतन मामले में FIR और वित्तीय अधिकार छीने जाने के बाद बड़ा फैसला

VINAY VERMA | Sept 29, 2026, 21:16 IST
दुर्ग यूनिवर्सिटी वेतन घोटाला
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को आखिरकार कुलसचिव की कुर्सी से हटा दिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने 29 सितंबर को आदेश जारी कर उन्हें उच्च शिक्षा संचालनालय, इंद्रावती भवन में पदस्थ कर दिया है। उनकी जगह शासकीय वी.वाय.टी. महाविद्यालय, दुर्ग के इतिहास के प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार पांडेय को प्रभारी कुलसचिव बनाया गया है।

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को आखिरकार कुलसचिव की कुर्सी से हटा दिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने 29 सितंबर को आदेश जारी कर उन्हें उच्च शिक्षा संचालनालय, इंद्रावती भवन में पदस्थ कर दिया है। उनकी जगह शासकीय वी.वाय.टी. महाविद्यालय, दुर्ग के इतिहास के प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार पांडेय को प्रभारी कुलसचिव बनाया गया है।



FIR के बाद बढ़ा था दबाव

कुलदीप को हटाने का फैसला ऐसे समय हुआ है, जब उनके खिलाफ गंभीर आरोपों को लेकर विवाद चल रहा है। 3 अगस्त 2026 को मोहन नगर थाने में उनके खिलाफ FIR दर्ज हुई थी। मामला विश्वविद्यालय की एक दैनिक वेतनभोगी महिला कर्मचारी के वेतन से कथित तौर पर रकम ट्रांसफर कराने और पद के दुरुपयोग के आरोपों से जुड़ा है। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था, हालांकि बाद में जमानत मिल गई।




वेतन मामले ने मचाया था हड़कंप

शिकायत के मुताबिक महिला कर्मचारी के वेतन का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर ऑनलाइन उनके बेटे के खाते में ट्रांसफर कराया जाता था। सामने आए दस्तावेजों और रिपोर्टों में कथित रकम करीब 1.49 लाख रुपए बताई गई है। विश्वविद्यालय की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के बाद पुलिस कार्रवाई की स्थिति बनी थी।




पहले वित्तीय अधिकार छीने

FIR के बाद मामला सिर्फ पुलिस तक सीमित नहीं रहा। अगस्त के आखिर में विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने कुलदीप के वित्तीय अधिकार वापस ले लिए थे। भुगतान संबंधी दस्तावेजों और बैंकिंग लेन-देन में उनकी जगह दूसरे अधिकारी को अधिकृत किया गया। यानी कुलसचिव रहते हुए भी वित्तीय फैसलों में उनकी भूमिका सीमित कर दी गई थी।



दुर्ग यूनिवर्सिटी वेतन घोटाला

हाईकोर्ट से भी राहत नहीं

कुलदीप ने अपने खिलाफ शुरू हुई जांच और FIR को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। इसके बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी रहने की स्थिति बनी रही।




अब संचालनालय में अटैच

अब उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें विश्वविद्यालय से हटाकर उच्च शिक्षा संचालनालय भेज दिया है। आदेश में नई जिम्मेदारी के तौर पर संचालनालय, इंद्रावती भवन में पदस्थापना दी गई है। वहीं डॉ. अनिल कुमार पांडेय प्रभारी कुलसचिव के रूप में विश्वविद्यालय का काम संभालेंगे।



कार्रवाई के पीछे यही कड़ियां?

सरकारी आदेश में कुलदीप को हटाने की अलग से वजह नहीं बताई गई है। लेकिन समयक्रम देखें तो FIR, गिरफ्तारी, वित्तीय अधिकारों की वापसी और अब कुलसचिव पद से हटाकर संचालनालय अटैच किया जाना—ये सभी घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी नजर आती हैं। खासकर जब वित्तीय अधिकार पहले ही सीमित किए जा चुके थे, ऐसे में विवादित अधिकारी को विश्वविद्यालय के शीर्ष प्रशासनिक पद से हटाना प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव है।




सवाल अब जांच पर

हालांकि कुलदीप पर लगे आरोपों का अंतिम फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा। लेकिन विभाग के ताजा आदेश ने इतना साफ कर दिया है कि विवाद के बीच अब दुर्ग यूनिवर्सिटी की कमान उनके हाथ में नहीं रहेगी। अब नजर इस बात पर होगी कि FIR और विश्वविद्यालय के प्रशासनिक- वित्तीय कामकाज से जुड़े बाकी मामलों में आगे क्या कार्रवाई होती है।

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