छत्तीसगढ़ में इबोला का अलर्ट, रायपुर में बना विशेष आइसोलेशन वार्ड

Aishwarya Dwivedi | Jun 06, 2026, 10:46 IST
ebola-virus-suspect-durg-raipur-alert
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में इबोला का संदिग्ध मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। रायपुर में आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है और जांच के लिए सैंपल पुणे भेजे गए हैं।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ के दुर्ग में इबोला का एक संदिग्ध मरीज मिला।
  • रायपुर में एहतियातन चार बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार।
  • इबोला हवा से नहीं, संक्रमित मरीज के सीधे संपर्क से फैलता है।
  • डब्ल्यूएचओ के अनुसार इबोला में मृत्यु दर पचास फीसदी है।
  • छत्तीसगढ़ में जांच व्यवस्था न होने से सैंपल पुणे भेजे गए।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में इबोला वायरस का एक संदिग्ध मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। एहतियात के तौर पर राजधानी रायपुर में 4 बेड का एक विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है। इबोला एक बेहद खतरनाक और जानलेवा बीमारी है, इसलिए प्रशासन किसी भी तरह की कोताही नहीं बरत रहा है।



हवा से नहीं, संपर्क से फैलता है इबोला

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला वायरस कोरोना की तरह हवा के जरिए नहीं फैलता है। हालांकि, यह बेहद संक्रामक है। सिविल सर्जन डॉ. भेनुज सिन्हा और एमडी (मेडिसीन) डॉ. योगेंद्र महोत्रा ने बताया कि यह वायरस संक्रमित मरीज के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।



संक्रमण के मुख्य माध्यम : मरीज का खून, पसीना, लार, मल, उल्टी या शरीर के अन्य तरल पदार्थ।



अप्रत्यक्ष माध्यम : संक्रमित व्यक्ति के इस्तेमाल किए गए कपड़े, बिस्तर, तौलिया या अन्य वस्तुएं भी संक्रमण का कारण बन सकती हैं। यही वजह है कि संदिग्ध मरीजों को सख्त आइसोलेशन में रखने के निर्देश दिए गए हैं।



मृत्यु दर 50 फीसदी तक, ये हैं मुख्य लक्षण

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, इबोला वायरस डिजीज (EVD) एक बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी है। इसकी औसत मृत्यु दर लगभग 50% है, जो अलग-अलग प्रकोपों में 25 से 90% तक देखी गई है। आमतौर पर अफ्रीकी देशों जैसे कांगो, युगांडा, सूडान और इथियोपिया में इसके मामले सामने आते रहते हैं।



इसके लक्षण संक्रमण के 2 से 21 दिनों के भीतर नजर आने लगते हैं, जिनमें शामिल हैं:



  • अचानक तेज बुखार और अत्यधिक कमजोरी
  • सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश
  • गंभीर स्थिति में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और त्वचा पर चकत्ते
  • लिवर और किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होना

छत्तीसगढ़ में जांच की व्यवस्था नहीं

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ में फिलहाल इबोला की जांच के लिए कोई प्रयोगशाला (लैब) उपलब्ध नहीं है। इसलिए संदिग्ध मरीजों के सैंपल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे भेजे जा रहे हैं।



सुरक्षा के लिहाज से सैंपल को बेहद सुरक्षित 3 लेयर (तीन परतों) में पैक किया जाता है, ताकि रास्ते में यह किसी के भी संपर्क में न आए। पहली रिपोर्ट आने के बाद, चाहे वह पॉजिटिव हो या नेगेटिव, लगभग 48 घंटे बाद दूसरा सैंपल लेकर दोबारा जांच कराई जाती है। जरूरत पड़ने पर तीसरी बार भी परीक्षण किया जाता है ताकि संक्रमण की पुष्टि पूरी सटीकता से हो सके। फिलहाल स्वास्थ्य अमला पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में इबोला के संदिग्ध मामले ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है। हालांकि यह वायरस हवा से नहीं फैलता, लेकिन इसकी पचास प्रतिशत की उच्च मृत्यु दर को देखते हुए कड़ी निगरानी और पुख्ता आइसोलेशन जरूरी है। स्थानीय स्तर पर लैब न होने से त्वरित जांच एक चुनौती बनी हुई है।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ में इबोला का मामला कहाँ आया है?
    Ans. दुर्ग जिले में एक संदिग्ध मरीज मिला है, पुष्टि होना बाकी है।
  2. क्या इबोला कोरोना की तरह हवा से फैलता है?
    Ans. नहीं, यह हवा से नहीं बल्कि मरीज के सीधे संपर्क (खून, पसीना, लार) से फैलता है।
  3. इबोला के मुख्य लक्षण क्या हैं?
    Ans. अचानक तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सिरदर्द, उल्टी-दस्त और शरीर पर चकत्ते।
  4. छत्तीसगढ़ में इसकी जांच कहाँ हो रही है?
    Ans. राज्य में लैब नहीं है, इसलिए सैंपल जांच के लिए NIV, पुणे भेजे जा रहे हैं।

यह खबरें भी पढ़ें...

राजस्थान में मिला इबोला वायरस का पहला संदिग्ध, डॉक्टरों ने किया आइसोलेट



रायपुर एयरपोर्ट पर हाई अलर्ट : इबोला वायरस को लेकर विशेष जांच शुरू



इबोला वायरस का डर, सिम्स अस्पताल में हाई अलर्ट, स्टाफ को स्पेशल ट्रेनिंग



इबोला वायरस का बढ़ा खतरा, WHO ने घोषित की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी, भारत सरकार ने जारी की एडवाइजरी



Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • स्वास्थ्य विभाग
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन
  • आइसोलेशन
  • राजधानी रायपुर
  • इबोला वायरस