जनगणना ड्यूटी पर कर्मचारियों की मांग, अब फैसला राज्य सरकार के पाले में
जनगणना-2027 की तैयारी शुरू होने से पहले ही कर्मचारियों ने अपने हक की लड़ाई छेड़ दी है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने भीषण गर्मी में जनगणना ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों के लिए विशेष अर्जित अवकाश और लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान मांगा था। अब इस मांग पर केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि फैसला उसका नहीं, बल्कि राज्य सरकार का होगा। जनगणना कार्य निदेशालय ने पूरा मामला आवश्यक कार्रवाई के लिए छत्तीसगढ़ शासन को भेज दिया है।
45 डिग्री की ड्यूटी का सवाल
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने 3 जुलाई 2026 को जनगणना संचालन निदेशक को लेटर भेजा था। जिसमें पूछा गया कि मई 2027 में जब प्रदेश का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है, उसी दौरान जनगणना का पहला चरण प्रस्तावित है। ऐसे में कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष अर्जित अवकाश दिया जाना चाहिए।
मानदेय पर भी उठी आवाज
फेडरेशन ने सिर्फ अवकाश की मांग नहीं की। यह भी कहा गया कि जनगणना कार्य से जुड़े कर्मचारियों का लंबित मानदेय जल्द जारी किया जाए। साथ ही भविष्य में राष्ट्रीय महत्व के ऐसे कार्यों में लगे कर्मचारियों के लिए समयबद्ध मानदेय और सुविधाओं की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि हर बार भुगतान के लिए संघर्ष न करना पड़े।
केंद्र ने झाड़ा पल्ला
2026 को जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ के संयुक्त निदेशक प्रदीप कुमार साव ने गृह विभाग को पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया कि विशेष अवकाश और मानदेय का विषय राज्य शासन के अधिकार क्षेत्र में आता है। यानी केंद्र ने इस मामले में निर्णय लेने की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर छोड़ दी है।
अब गृह विभाग की बारी
जनगणना निदेशालय ने मामला आगे बढ़ा दिया है। अब नजर छत्तीसगढ़ के गृह विभाग पर है कि वह कर्मचारियों की मांग पर क्या फैसला लेता है। यदि सरकार विशेष अवकाश और समय पर मानदेय को मंजूरी देती है तो इसका लाभ हजारों कर्मचारियों को मिलेगा, जिन्हें अगले वर्ष जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के अभियान में मैदान में उतरना है।
सरकार के फैसले पर टिकी नजर
जनगणना देश का सबसे बड़ा प्रशासनिक अभियान माना जाता है। इसमें शिक्षकों से लेकर विभिन्न विभागों के हजारों कर्मचारी लगाए जाते हैं। फेडरेशन का तर्क है कि जब कर्मचारी भीषण गर्मी में घर-घर जाकर राष्ट्रीय जिम्मेदारी निभाते हैं तो उन्हें अतिरिक्त सुविधाएं और समय पर मानदेय मिलना चाहिए। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस मांग को स्वीकार करती है या फाइलें फिर दफ्तरों के चक्कर काटती रहती हैं।
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