लंबे समय का इंतजार हुआ समाप्त, शासन ने किया रिजल्ट जारी, कई अफसर हुए पास, फेल को दोबारा मौका

VINAY VERMA | Apr 29, 2026, 12:42 IST
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छत्तीसगढ़ के विभागीय परीक्षा परिणाम जारी हो गए हैं, जिसमें कई अधिकारी पास हुए, जबकि कुछ विभागों में शून्य परिणाम ने सवाल खड़े किए। असफल अभ्यर्थियों को फिर से मौका दिया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में महीनों से टकटकी लगाए बैठे अफसरों और कर्मचारियों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। गृह विभाग के विभागीय परीक्षा प्रकोष्ठ ने एक साथ कई अहम विभागों की परीक्षाओं के परिणाम जारी कर दिए हैं। जनवरी-फरवरी 2026 में हुई इन परीक्षाओं के नतीजों ने जहां सफल उम्मीदवारों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है, वहीं असफल रहे अभ्यर्थियों को दोबारा मौका देने का संकेत भी दिया गया है। शासन के इस फैसले को प्रशासनिक व्यवस्था में नई ऊर्जा भरने वाला माना जा रहा है।



पुलिस विभाग में चमके IPS और DSP, कई नाम चर्चा में

सबसे ज्यादा चर्चा पुलिस विभाग के परिणामों की रही। ‘पुलिस शाखा’ और ‘न्यायिक शाखा’ की परीक्षाओं में आईपीएस अधिकारियों ने शानदार प्रदर्शन किया। वैशाली जैन, आदित्य कुमार और साकोरे मानसी नानाभाऊ जैसे नाम प्रमुख रूप से उभरे हैं। वहीं डीएसपी स्तर के अधिकारियों—विवेक सिंह राठौर, नंदिनी ठाकुर और निलय मरकाम—ने भी परीक्षा पास कर अपनी अर्हता साबित की। इन नतीजों के बाद विभाग में पदोन्नति की रफ्तार तेज होने की संभावना जताई जा रही है।



वन सेवा और IFS में भी दमदार प्रदर्शन, ACF ने मारी बाजी

वन विभाग और भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारियों ने भी इस बार अच्छा प्रदर्शन किया है। सहायक वन संरक्षक (ACF) स्तर पर ‘वन विधि’ और ‘सामान्य विधि’ जैसे विषयों में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए हैं। तन्मय कौशिक, गौतम पडिहार और कुणाल मिश्रा जैसे अधिकारियों ने प्रक्रिया, लेखा और हिंदी जैसे विषयों में सफलता दर्ज कराई है। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और अंबिकापुर केंद्रों से आए परिणामों ने विभाग की तैयारी का स्तर भी दिखाया है।





राजस्व और प्रशासन में डिप्टी कलेक्टरों की पकड़ मजबूत

राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने भी इस परीक्षा में अपनी पकड़ मजबूत साबित की है। ‘पंचायत राज विधि’ और ‘सिविल विधि’ जैसे विषयों में डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारियों ने शानदार प्रदर्शन किया। लखेश्वर यादव, सारिका मित्तल, शुभम देव और सत्येंद्र बंजारे जैसे नाम प्रमुख हैं। वहीं तहसीलदार संवर्ग में मधुसूदन और नरेंद्र पैकरा ने सफलता हासिल की है। इन परिणामों से राजस्व विभाग की कार्यक्षमता और मजबूत होने की उम्मीद है।



महिला एवं बाल विकास और GST विभाग में भी सफलता के झंडे

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने भी परीक्षा में अपनी योग्यता साबित की। दिव्या माणिकपुरी और मलय धुरंधर जैसे अधिकारियों ने ‘लेखा’ विषय में सफलता हासिल की। दूसरी ओर वाणिज्यिक कर (GST) और आबकारी विभाग में अभिषेक चंद्राकर, दिनदयाल, राहुल सिंह बघेल और अनुला झाड़े जैसे अधिकारियों ने परीक्षा पास कर विभागीय दक्षता को मजबूत किया है। इससे राजस्व संग्रह और प्रशासनिक पारदर्शिता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।



पंजीयन और सहकारिता विभाग ने भी दिखाया दम

पंजीयन विभाग में जिला पंजीयक माधव ने ‘पंजीयन विधि’ और ‘कार्यालयीन प्रक्रिया’ दोनों में सफलता हासिल कर अपनी पकड़ साबित की है। वहीं सहकारिता विभाग में शिवागी महार, विनय कश्यप, सुरेंद्र कश्यप और कामेश कश्यप जैसे अधिकारियों ने ‘बैंकिंग’ और ‘व्यवहारिक परीक्षा’ में सफलता पाई है। यह परिणाम सहकारिता तंत्र के सुदृढ़ीकरण के संकेत माने जा रहे हैं।



कुछ विभागों में सन्नाटा, शून्य परिणाम ने खड़े किए सवाल

जहां एक ओर कई विभागों में सफलता की कहानियां लिखी गईं, वहीं कुछ जगहों पर पूरी तरह निराशा हाथ लगी। पशु चिकित्सा विभाग की ‘लेखा’ परीक्षा में एक भी अभ्यर्थी पास नहीं हो सका। इसी तरह ‘दाण्डिक विधि’ और आदिम जाति विकास विभाग की ‘लेखा’ परीक्षा में भी शून्य परिणाम सामने आए हैं। यह स्थिति परीक्षा प्रणाली और तैयारी के स्तर पर सवाल खड़े कर रही है, जिस पर शासन को गंभीरता से विचार करना होगा।



आदिम जाति विकास विभाग में मिली मिश्रित प्रतिक्रिया

आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग में ‘समाजशास्त्र’ विषय में वैभव कौशिक और खुशबू शास्त्री ने सफलता हासिल की है। लेकिन ‘लेखा’ विषय में एक भी उम्मीदवार का पास न होना विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है। इससे यह साफ है कि कुछ विषयों में प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की कमी बनी हुई है।



स-पुस्तक और बिना पुस्तक परीक्षा का मिला-जुला असर

इस बार परीक्षाएं स-पुस्तक (With Books) और बिना पुस्तक (Without Books) दोनों मोड में आयोजित की गई थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन विषयों में प्रैक्टिकल समझ ज्यादा जरूरी थी, वहां परिणाम बेहतर आए, जबकि सैद्धांतिक और तकनीकी विषयों में अभ्यर्थी पिछड़ गए। इससे परीक्षा पैटर्न की प्रभावशीलता पर भी बहस शुरू हो गई है।



पदोन्नति और वेतन वृद्धि का रास्ता साफ, राजपत्र में होगा प्रकाशन

गृह विभाग के सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, सभी परिणामों को राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा और संबंधित विभागों को सूचित कर दिया गया है। इन परीक्षाओं में सफल अधिकारियों के लिए अब पदोन्नति, वेतन वृद्धि और सेवा पुष्टिकरण का रास्ता साफ हो गया है। वहीं असफल अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा का अवसर मिलने से उम्मीद जगी है कि वे अगली बार बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।



संदेश साफ: मेहनत का मिला फल, लेकिन सुधार की जरूरत बरकरार

इन परिणामों ने एक ओर जहां मेहनती अधिकारियों को उनका हक दिलाया है, वहीं यह भी दिखा दिया है कि कुछ विभागों में सुधार की गुंजाइश अभी बाकी है। शासन के लिए यह एक संकेत है कि प्रशिक्षण, परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन प्रक्रिया को और मजबूत किया जाए, ताकि आने वाले समय में ‘शून्य परिणाम’ जैसी स्थिति से बचा जा सके।



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