छत्तीसगढ़ दिव्यांग घोटाला : फर्जी प्रमाण पत्र और बीएड डिग्री से नौकरी

Aishwarya Dwivedi | Jul 22, 2026, 12:23 IST
नकली दिव्यांग बनकर नौकरी पाने के घोटाले की जांच
छत्तीसगढ़ के विभिन्न सरकारी विभागों में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों और जाली बीएड डिग्रियों के दम पर 127 लोग नौकरी कर रहे हैं। हाईकोर्ट के कड़े आदेश के बावजूद प्रशासनिक जांच अटकी पड़ी है।

समझें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी पाने का बड़ा मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि कई स्वस्थ लोगों ने डॉक्टरों से मिलकर मेडिकल बोर्ड से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए। यही नहीं, कई कर्मचारियों ने इग्नू और प्रदेश की अन्य यूनिवर्सिटी से बीएड (B.Ed – Bachelor of Education) की फर्जी डिग्रियां भी हासिल की हैं। हाईकोर्ट (High Court) के कड़े आदेशों के बाद भी कई संदिग्ध कर्मचारी जांच कराने नहीं पहुंच रहे हैं। इस मामले में दिव्यांग संघ ने 127 संदिग्ध कर्मचारियों की सूची शासन को सौंपी है।



सिस्टम और डॉक्टरों की साठगांठ

छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों में दिव्यांगों के लिए आरक्षित पदों पर फर्जी दिव्यांगों ने कब्जा जमा लिया है। पड़ताल में सामने आया कि स्वस्थ या आंशिक रूप से दिव्यांग लोगों ने डॉक्टरों से साठगांठ कर मेडिकल बोर्ड से असली प्रमाण पत्र हासिल कर लिए। शिक्षा, कृषि, उद्यानिकी और पंचायत विभाग में ऐसे लोग सालों से नौकरी कर रहे हैं। मुंगेली जिले के लोरमी ब्लॉक स्थित झाफल गांव से सबसे अधिक मामले सामने आए हैं, जहां कई लोग फर्जी दिव्यांगता के दम पर नौकरी कर रहे हैं।



छत्तीसगढ़ दिव्यांग घोटाला


कोर्ट के आदेश का उल्लंघन

मई 2023 में सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों को संदिग्ध दिव्यांगता प्रमाण पत्रों की जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद अगस्त 2024 में मुंगेली कलेक्टर ने कर्मचारियों की बर्खास्तगी और प्रमाण पत्र जारी करने वाले डॉक्टरों की जांच के आदेश जारी किए। जुलाई 2025 तक 27 कर्मचारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई और जनवरी 2026 में कृषि विभाग ने 17 संदिग्धों की सूची जिलों को भेजी। इसके बावजूद प्रशासनिक लापरवाही के चलते अधिकांश मामलों में कार्रवाई अब तक अधूरी है।



जांच से भाग रहे कर्मचारी

कार्रवाई के डर से कई कर्मचारी लगातार छुट्टियों का बहाना बना रहे हैं या जांच प्रक्रिया से भाग रहे हैं। मुंगेली के अपर कलेक्टर जेएल यादव के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश पर स्पेशल टीम बनाई गई थी, लेकिन संबंधित कर्मचारी जांच कराने ही नहीं आ रहे हैं। कई मामलों में मेडिकल लीव (Medical Leave) लेकर जांच टाली जा रही है। जांजगीर-चांपा में केवल 30 फीसदी दिव्यांगता वाले शिक्षक को भी नौकरी दे दी गई, जबकि नियमतः न्यूनतम 40 फीसदी दिव्यांगता अनिवार्य होती है।



फर्जी डिग्रियों का बड़ा जाल

दिव्यांगता के साथ-साथ कई कर्मचारियों की बीएड डिग्रियां भी जांच में फर्जी पाई गई हैं। गौरेला के एक व्याख्याता की बीएड डिग्री की जांच करने पर इग्नू (IGNOU – Indira Gandhi National Open University) ने लिखित रूप में बताया कि ऐसा प्रमाण पत्र उनके रिकॉर्ड से कभी जारी ही नहीं हुआ। इसके अलावा, किरींदुल की एक प्राचार्य पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी नौकरी में रहते हुए नियमित पढ़ाई करके वेतन भी उठाया। विभागीय जांच में अनियमितता मिलने के बाद भी कार्रवाई रुकी हुई है।



FAQ

  1. सरकारी नौकरी के लिए न्यूनतम कितनी दिव्यांगता अनिवार्य है?
    सरकारी नौकरियों में दिव्यांग आरक्षण का लाभ लेने के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता होना अनिवार्य है। इससे कम दिव्यांगता पर आरक्षण का लाभ नहीं मिलता।
  2. फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र मामले में कितने संदिग्धों की पहचान हुई है?
    दिव्यांग संघ के अनुसार 127 संदिग्ध कर्मचारियों की सूची शासन को सौंपी गई है। इनमें से 46 लोग जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट भी गए थे।

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