वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने काफिले से कम की गाड़ियां, वीआईपी कल्चर छोड़ेंगे मंत्री
NEWS IN SHORT
- प्रधानमंत्री की सलाह पर छत्तीसगढ़ सरकार घटाएगी मंत्रियों का काफिला।
- वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने प्रोटोकॉल वाहन छोड़ने का निर्णय लिया।
- ढाई साल में सरकारी गाड़ियों पर खर्च हुए 300 करोड़ रुपये।
- काफिले में 20 की जगह अब केवल सीमित गाड़ियां दौड़ेंगी।
- पेट्रोल-डीजल की खपत कम कर फिजूलखर्ची रोकना सरकार का लक्ष्य।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की सड़कों पर अब मंत्रियों और विधायकों के पीछे दौड़ने वाली गाड़ियों की लंबी कतारें जल्द ही कम होती नजर आएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और संसाधनों के उचित उपयोग की सलाह के बाद, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य में मंत्रियों के काफिले को छोटा करने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की सलाह वर्तमान परिस्थितियों में बेहद सटीक है और उनकी सरकार जल्द ही इस पर औपचारिक निर्णय लेकर अमल करेगी।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने पेश की मिसाल
मुख्यमंत्री के संकेतों के बीच प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इस दिशा में बड़ी पहल की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (ट्विट्टर) के जरिए घोषणा की कि वे प्रधानमंत्री की अपील का सम्मान करते हुए अपने काफिले से गाड़ियां घटा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
"अति अनिवार्य सुरक्षा परिस्थितियों को छोड़कर, अब मेरे साथ कोई पायलट या फॉलो गाड़ी/प्रोटोकॉल वाहन नहीं चलेगा।" वित्त मंत्री का यह कदम अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए एक नजीर माना जा रहा है।
ढाई साल में 300 करोड़ का खर्च
सरकारी आंकड़ों और हालिया पड़ताल में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि पिछले ढाई सालों में सरकारी वाहनों के ईंधन और रखरखाव पर लगभग 300 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। पुलिस और सुरक्षा वाहनों पर होने वाला यह भारी-भरकम खर्च राज्य के खजाने पर बड़ा बोझ है। अक्सर देखा गया है कि नियमों के मुताबिक एक मंत्री के काफिले में 3 से 5 गाड़ियां होनी चाहिए, लेकिन वास्तविकता में यह संख्या 10 से 20 तक पहुँच जाती है।
काफिले में क्यों बढ़ती है गाड़ियों की संख्या?
पड़ताल में यह बात निकलकर आई है कि मंत्रियों के साथ केवल सुरक्षा वाहन ही नहीं, बल्कि निम्नलिखित गाड़ियाँ भी शामिल हो जाती हैं:
पायलट और एस्कॉर्ट वाहन: सुरक्षा कारणों से तैनात।
निजी स्टाफ और विभागीय वाहन: अधिकारियों और सहायकों की आवाजाही के लिए।
समर्थकों की गाड़ियां: अक्सर स्थानीय नेता और समर्थक भी अपने वाहनों को काफिले का हिस्सा बना लेते हैं, जिससे सड़क पर जाम और ईंधन की बर्बादी होती है।
FAQ
1. सरकार काफिले में गाड़ियां कम क्यों कर रही है?
ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की खपत कम करने, सरकारी खर्च बचाने और प्रधानमंत्री की सलाह पर अमल करने के लिए।
2. वर्तमान में एक मंत्री के काफिले में कितनी गाड़ियां होती हैं?
नियमतः 3-5 गाड़ियां होनी चाहिए, लेकिन वास्तविकता में सुरक्षा और समर्थकों को मिलाकर यह संख्या 10-20 तक पहुंच जाती है।
3. वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने क्या घोषणा की है?
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सुरक्षा की अनिवार्य स्थितियों को छोड़कर पायलट, फॉलो या प्रोटोकॉल गाड़ियों का उपयोग नहीं करेंगे।
निष्कर्ष
सरकार के इस फैसले से न केवल करोड़ों रुपये के पेट्रोल-डीजल की बचत होगी, बल्कि आम जनता को भी वीआईपी मूवमेंट के दौरान होने वाली ट्रैफिक की समस्याओं से निजात मिलेगी। 12 मई को प्रकाशित खबरों और प्रधानमंत्री की अपील के बाद, अब छत्तीसगढ़ प्रशासन एक ऐसी गाइडलाइन तैयार कर रहा है जिससे सुरक्षा और प्रोटोकॉल भी बना रहे और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग भी रुके।
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