छत्तीसगढ़ वन विभाग का फैसला: 51 लाख यूकेलिप्टस रोपण पर बढ़ा विवाद
समझें क्या है पूरा मामला
- 51 लाख यूकेलिप्टस पौधों पर उठा बड़ा विवाद।
- जमीन सुखाने वाले पौधों के टेंडर जारी हुए।
- वन विभाग के फैसले पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता।
- पर्यावरण के लिए खतरा बन सकता है यूकेलिप्टस।
- फलदार पौधों की जगह यूकेलिप्टस की तैयारी शुरू।
नीलगिरी रोपण पर बवाल
छत्तीसगढ़ में पर्यावरण को लेकर एक नया विवाद शुरू हो गया है। वन विभाग बड़े पैमाने पर यूकेलिप्टस यानी नीलगिरी के पौधे लगाने जा रहा है। इसके लिए विभाग ने 10 अलग-अलग वन मंडलों के टेंडर जारी किए हैं। इस पूरी योजना पर कुल 4.09 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस फैसले के सामने आते ही पर्यावरण से जुड़े जानकारों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह पौधा भूजल स्तर को तेजी से गिराता है।
51 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
वन विभाग ने कुल 51.07 लाख क्लोनल यूकेलिप्टस पौधे खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें सबसे ज्यादा 12.59 लाख पौधे अनुसंधान एवं विस्तार मंडल जगदलपुर में लगेंगे। वहीं बस्तर वन मंडल में 12.12 लाख पौधे लगाने की योजना तैयार की गई है। इसके अलावा धमतरी, महासमुंद और पूर्व भानूप्रतापपुर में भी ये पौधे लगाए जाएंगे। केशकाल, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और बालोद में भी टेंडर दिए गए हैं। यानी कुल पौधों में से आधे से ज्यादा पौधे सिर्फ बस्तर संभाग में ही लगेंगे।
विशेषज्ञों ने जताई कड़ी चिंता
वन विभाग के इस कदम पर कृषि और वानिकी विशेषज्ञों ने सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यूकेलिप्टस की जगह फलदार पेड़ लगाने चाहिए। छायादार और स्थानीय प्रजातियों के पौधे जमीन और पानी दोनों के लिए बेहतर होते हैं। यूकेलिप्टस मिट्टी की नमी को पूरी तरह सोख लेता है।
इससे आसपास की जमीन बंजर होने लगती है। यूकेलिप्टस तेजी से बढ़ता है। पेपर और प्लाईवुड उद्योग में इसकी भारी मांग रहती है। इसी वजह से विभाग और किसान इसे पसंद करते हैं। कम उपजाऊ जमीन पर भी यह आसानी से उग जाता है।
जलभराव वाले क्षेत्रों में ही उपयोगी
वैज्ञानिकों के अनुसार यूकेलिप्टस बायोड्रेनेज का काम करता है। यह गहरे पानी को सोखकर जमीन को सूखा बनाता है। इसलिए जलभराव वाली जगहों पर ही इसका उपयोग सही माना जाता है।
सामान्य कृषि भूमि के पास इसे लगाने से फसलों पर बुरा असर पड़ता है। इसकी पत्तियों से निकलने वाले तत्व मिट्टी की उर्वरता को प्रभावित करते हैं। इसलिए विशेषज्ञों की सलाह है कि इसे खेती से दूर लगाया जाए।
FAQ
- यूकेलिप्टस लगाने पर विवाद क्यों हो रहा है?
यूकेलिप्टस जमीन से बहुत ज्यादा पानी सोखता है। इससे आसपास का भूजल स्तर गिर जाता है। इसी कारण इसके रोपण का विरोध हो रहा है। - छत्तीसगढ़ में कितने यूकेलिप्टस पौधे लगाए जाएंगे?
छत्तीसगढ़ वन विभाग 10 वन मंडलों में 51.07 लाख पौधे लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए 4.09 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए हैं। - क्या यूकेलिप्टस से किसानों को फायदा होता है?
हाँ, यूकेलिप्टस बहुत तेजी से बढ़ता है और प्लाईवुड उद्योग में बिकता है। इससे किसानों को कम समय में अच्छी कमाई हो जाती है।
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