छत्तीसगढ़ में सालों से छिपा गैंग्स ऑफ वासेपुर का गैंगस्टर, अंबिकापुर से फिर फरार
RAIPUR : फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की वास्तविक कहानी से जुड़ा कुख्यात गैंगस्टर सब्बीर आलम एक बार फिर पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। झारखंड के धनबाद जिले के वासेपुर का रहने वाला सब्बीर आलम पिछले कई वर्षों से छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में फर्जी पहचान के साथ किराए के मकान में रह रहा था। पुलिस ने तकनीकी निगरानी के जरिए उसकी लोकेशन तो खोज निकाली, लेकिन गिरफ्तारी से ठीक पहले वह पुलिस टीम को चकमा देकर भाग निकला।
वासेपुर का असली गैंगस्टर:
जानकारी के अनुसार सब्बीर आलम अंबिकापुर के हबीबनगर इलाके में एक मस्जिद के पास पहचान बदलकर रह रहा था। वह लंबे समय से स्थानीय लोगों की नजरों से बचते हुए सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन बिता रहा था। झारखंड पुलिस को उसकी मौजूदगी की सूचना साइबर सेल के माध्यम से मिली, जिसके बाद धनबाद से एक विशेष टीम अंबिकापुर पहुंची।
पूरी कार्रवाई को गोपनीय रखा गया और स्थानीय पुलिस को भी पहले इसकी जानकारी नहीं दी गई। पुलिस टीम ने हबीबनगर में उसके ठिकाने की घेराबंदी की। बताया जाता है कि जैसे ही पुलिसकर्मी उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़े, सब्बीर आलम मौके का फायदा उठाकर अपनी कार में बैठा और वहां से फरार हो गया। उसके भाग निकलने के बाद झारखंड पुलिस ने स्थानीय कोतवाली पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और संयुक्त रूप से उसकी तलाश शुरू कर दी गई है।
सब्बीर पर बनी गैंग्स ऑफ वासेपुर:
सब्बीर आलम का नाम धनबाद के चर्चित कोयला कारोबार और गैंगवार से जुड़े कई मामलों में सामने आ चुका है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, वासेपुर में कोयले के कारोबार और वसूली के वर्चस्व को लेकर सब्बीर आलम और कुख्यात कोल माफिया डॉन फहीम खान के परिवारों के बीच वर्षों पुरानी खूनी दुश्मनी चली आ रही थी।
इसी रंजिश ने कई सनसनीखेज वारदातों को जन्म दिया। इस दुश्मनी की सबसे चर्चित घटना 18 अक्टूबर 2001 को हुई थी। आरोप है कि सब्बीर आलम, उसके भाई शाहिद और अन्य साथियों ने मिलकर धनबाद के डायमंड क्रॉसिंग के पास फहीम खान की मां नजमा खातून और चाची शहनाज खातून पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। इस हमले में दोनों महिलाओं की मौत हो गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे झारखंड में सनसनी फैला दी थी।
24 साल से लुक छिपी:
घटना के बाद वर्ष 2002 में पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। कई वर्षों तक फरार रहने के बाद वर्ष 2013 में सब्बीर आलम, उसके भाई शाहिद आलम सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, अदालत में पेशी के दौरान सब्बीर आलम पुलिसकर्मियों को चकमा देकर धनबाद कोर्ट परिसर से फरार हो गया।
इसके बाद से वह लगातार पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा। वर्ष 2018 में धनबाद की अदालत ने इस बहुचर्चित हत्याकांड में सातों आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। लेकिन सब्बीर आलम उस समय भी फरार था। अदालत ने उसके खिलाफ वारंट जारी किया और झारखंड पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी रही।
अम्बिकापुर को बनाया ठिकाना:
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कोर्ट से फरार होने के बाद सब्बीर आलम अंबिकापुर में आकर रहने लगा था। उसने अपनी पहचान बदल ली थी और किराए के मकान में रहकर पुलिस से बचता रहा। झारखंड पुलिस ने उसके रिश्तेदारों और परिचितों के यहां भी कई बार दबिश दी, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। आखिरकार साइबर सेल की मदद से उसकी लोकेशन ट्रेस हुई और विशेष टीम अंबिकापुर पहुंची।
हालांकि, गिरफ्तारी के बेहद करीब पहुंचने के बावजूद पुलिस की कार्रवाई सफल नहीं हो सकी और सब्बीर आलम एक बार फिर भाग निकलने में कामयाब हो गया। अब झारखंड और छत्तीसगढ़ पुलिस संयुक्त रूप से उसकी तलाश कर रही है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और उपलब्ध सुरागों के आधार पर उसकी जल्द गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। वर्षों से कानून की गिरफ्त से बच रहा यह कुख्यात गैंगस्टर एक बार फिर पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
FAQ
- सब्बीर आलम कौन है?
सब्बीर आलम धनबाद के वासेपुर का रहने वाला कुख्यात गैंगस्टर है। वह दो महिलाओं की हत्या के मामले में दोषी करार दिया जा चुका है। वह पिछले कई सालों से छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में फर्जी पहचान से छिपा था। - सब्बीर आलम अंबिकापुर से कैसे फरार हुआ?
पुलिस टीम ने उसके ठिकाने की घेराबंदी की थी। लेकिन गिरफ्तारी से ठीक पहले वह मौका पाकर कार से फरार हो गया। अब दोनों राज्यों की पुलिस उसकी तलाश कर रही है। - सब्बीर आलम किस मामले में सजा हुई थी?
साल 2018 में धनबाद अदालत ने उसे 2001 के दोहरे हत्याकांड में दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। लेकिन वह उस समय भी फरार था। अदालत ने उसके खिलाफ वारंट जारी किया है।
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