देश को गोल्ड सप्लाई करेगा छत्तीसगढ़, बाघमारा में मिला सोने का खजाना
NEWS IN SHORT
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साल सोना न खरीदने की अपील की।
- छत्तीसगढ़ के बाघमारा में दो साल में शुरू होगा गोल्ड खनन।
- शुरुआती जीएसआई सर्वे में 2700 किलो सोने की पुष्टि हुई।
- वेदांता ग्रुप खदान में 500 मीटर गहरी ड्रिलिंग कर रहा।
- भारत अपनी जरूरत का 90% से अधिक सोना आयात करता है।
NEWS IN DETAIL
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है। इसका मुख्य उद्देश्य मिडिल ईस्ट वॉर (मध्य पूर्व युद्ध) के कारण देश की अर्थव्यवस्था, विदेशी मुद्रा भंडार और रुपए को कमजोर होने से बचाना है। भारत अपनी जरूरत का 90% से अधिक सोना आयात करता है, जिससे देश पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। इस बोझ को कम करने के लिए छत्तीसगढ़ का बाघमारा (बलौदाबाजार) एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरा है, जहां अगले 2 साल में खनन शुरू होने जा रहा है।
10 साल की देरी के बाद काम में आई तेजी
बाघमारा खदान का प्रोजेक्ट लगभग 10 साल लेट हो चुका है। वेदांता ग्रुप को 2015 में ही 'लेटर ऑफ इंटेंट' जारी हो गया था, लेकिन फॉरेस्ट क्लीयरेंस और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में याचिका के कारण मामला खिंचता चला गया। अब सभी रुकावटें दूर होने के बाद, पिछले 6 महीनों से यहाँ युद्ध स्तर पर एक्सप्लोरेशन (अन्वेषण) जारी है। 603 हेक्टेयर में फैली इस साइट से सरकार को करीब 81.4 करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान है।
कैसे निकाला जा रहा है सोना?
जीएसआई (GSI) की सर्वे रिपोर्ट के बाद वेदांता ग्रुप यहाँ 500 मीटर तक डीप ड्रिलिंग कर रहा है।
जांच प्रक्रिया: लगभग 50 ड्रिलिंग होल्स से सिलेंडर के आकार के पत्थर निकालकर लैब भेजे जा रहे हैं।
शुरुआती नतीजे: शुरुआती रिपोर्टों में यहाँ 2700 किलो सोने की पुष्टि हुई है। पत्थर के सैंपल्स में सोने के कण साफ चमकते हुए देखे जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गहराई में जांच बढ़ने पर सोने की यह मात्रा और भी बढ़ सकती है।
भारत में सोने का गणित और खदानों की स्थिति
भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जहां शादियों के सीजन में सबसे ज्यादा सोना खरीदा जाता है।
खपत बनाम उत्पादन: भारत में सालाना 700-800 टन सोने की खपत है, जबकि देश की मौजूदा खदानों से बमुश्किल 1 से 1.5 टन सोना ही निकल पाता है।
आर्थिक प्रभाव: आयात के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। वर्तमान में एक डॉलर की कीमत 95 रुपए तक पहुंच चुकी है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव है।
देश की प्रमुख गोल्ड माइन्स:
हट्टी गोल्ड माइन्स (कर्नाटक): देश की सबसे बड़ी सक्रिय खदान, जहाँ से सालाना 1.8 टन सोना निकलता है।
केजीएफ (कर्नाटक): यहाँ से 800 टन सोना निकाला जा चुका है, जो 2001 से बंद है पर इसे दोबारा शुरू करने की योजना है।
नए क्षेत्र: सोनभद्र (यूपी) और रामगिरी (आंध्र प्रदेश) जैसी जगहों पर अभी माइनिंग शुरू होना बाकी है।
बाघमारा देश की चौथी सक्रिय गोल्ड माइन बनने की राह पर है, जो भविष्य में भारत की आत्मनिर्भरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
निष्कर्ष
मध्य पूर्व संकट के बीच प्रधानमंत्री की अपील देश की अर्थव्यवस्था को बचाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे में छत्तीसगढ़ की बाघमारा खदान भारत की गोल्ड माइनिंगआयात निर्भरता को कम करने में गेम-चेंजर साबित होगी। 10 साल की देरी के बाद वेदांता द्वारा शुरू हुआ यह एक्सप्लोरेशन देश को आर्थिक मजबूती की नई राह दिखाएगा।
FAQ
Q1. छत्तीसगढ़ में सोने की खदान कहाँ है?
Ans: बलौदाबाजार जिले के बाघमारा में (603 हेक्टेयर)।
Q2. बाघमारा खदान से कितना सोना मिलेगा?
Ans: शुरुआती अनुमान के मुताबिक करीब 2700 किलो सोना।
Q3. यहाँ खनन कार्य कब शुरू होगा?
Ans: वेदांता ग्रुप अगले 2 साल में खनन शुरू करेगा।
Q4. भारत सालाना कितना सोना आयात करता है?
Ans: भारत अपनी जरूरत का 90% से अधिक (700-800 टन) सोना आयात करता है।
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