GAD ने विभागों और कलेक्टरों को दिए ट्रेनिंग कराने के निर्देश, विभागीय बजट से होगा खर्च
छत्तीसगढ़ के सरकारी दफ्तरों में अब फाइलों के साथ तनाव भी कम करने की तैयारी है। लगातार काम के दबाव, तनाव और बर्नआउट से जूझ रहे अफसर-कर्मचारियों के लिए सरकार ने आर्ट ऑफ लिविंग की ट्रेनिंग कराने का फैसला किया है। सामान्य प्रशासन विभाग यानी GAD ने सभी विभागों, विभागाध्यक्षों और कलेक्टरों को इसके लिए निर्देश दिए हैं।
ट्रेनिंग बड़े अफसरों तक सीमित नहीं
GAD ने जारी आदेश में कहा है कि अलग-अलग प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों के जरिए अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए यह ट्रेनिंग कराई जा सकती है। इसके लिए विभाग अपने अधीन काम करने वाले ग्रुप ए, बी और सी के कर्मचारियों को शामिल कर सकेंगे। यानी यह ट्रेनिंग सिर्फ बड़े अफसरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि निचले स्तर के कर्मचारियों को भी इसका हिस्सा बनाया जा सकेगा।
ट्रेनिंग का खर्च विभाग उठाएगा
खास बात यह है कि ट्रेनिंग के लिए कर्मचारियों से कोई अलग राशि लेने की बात नहीं है। प्रशिक्षण पर होने वाला पूरा खर्च संबंधित विभाग अपने ट्रेनिंग बजट से उठाएगा। विभागों को आर्ट ऑफ लिविंग से संपर्क कर अपने कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित कराने को कहा गया है।
योग से लेकर सुदर्शन क्रिया तक
ट्रेनिंग में सिर्फ भाषण या मोटिवेशनल क्लास नहीं होगी। इसमें योगासन, प्राणायाम, ध्यान और सुदर्शन क्रिया जैसी गतिविधियां शामिल हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के प्रस्ताव के मुताबिक इसका मकसद काम के दबाव को संभालने, भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करना है।
फाइलों के साथ तनाव भी संभालेंगे
सरकार के मुताबिक ट्रेनिंग से अधिकारियों और कर्मचारियों में निर्णय लेने की क्षमता, टीम के साथ काम करने और रोजमर्रा की परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटने जैसे कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी। यानी सरकारी सिस्टम में काम करने वाले कर्मचारियों को अब सिर्फ नियम-कायदे और फाइलों की ट्रेनिंग नहीं, बल्कि तनाव संभालने की भी ट्रेनिंग मिलेगी।
केंद्र के बाद छत्तीसगढ़ में पहल
आर्ट ऑफ लिविंग के सरकारी कार्यक्रमों को लेकर केंद्र के कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन (CBC) के साथ भी समझौता हो चुका है। इसी मॉडल पर छत्तीसगढ़ में यह पहल शुरू की जा रही है। सरकार का तर्क है कि कर्मचारी अगर मानसिक दबाव से बाहर रहेंगे तो कामकाज में भी सुधार आएगा।
अब सवाल ट्रेनिंग के असर का
हालांकि असली सवाल यह है कि योग, ध्यान और सुदर्शन क्रिया से सरकारी दफ्तरों का तनाव कितना कम होता है। ट्रेनिंग कराना एक पहल है, लेकिन कर्मचारियों पर काम का बोझ, लगातार बढ़ती जिम्मेदारियां और दफ्तरों की कार्यप्रणाली भी तनाव की बड़ी वजह हैं। ऐसे में देखना होगा कि यह ट्रेनिंग महज एक कार्यक्रम बनकर रह जाती है या सरकारी कामकाज में इसका वास्तविक असर भी दिखाई देता है।
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