पीएफ में देरी पर रिटायर्ड कर्मचारियों को सरकार देगी सालाना 8 प्रतिशत ब्याज, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रिटायर्ड कर्मचारियों के हक में बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले पैसों में देरी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आदेश में कहा गया है कि यदि भविष्य निधि यानी PF के भुगतान में देरी होती है, तो सरकार को संबंधित कर्मचारी को 8 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा। कोर्ट ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।
12 साल तक लटका रहा कर्मचारी का पैसा
इस मामले में याचिकाकर्ता जगन्नाथ सिंह वर्ष 2011 में सेवानिवृत्त हुए थे, लेकिन उन्हें उनके PF की पूरी राशि नहीं मिली। करीब 1.55 लाख रुपए लंबे समय तक अटके रहे। हैरानी की बात यह है कि यह रकम पूरे 12 साल बाद जारी की गई। इतने लंबे इंतजार के बाद भी कर्मचारी को उसका हक समय पर नहीं मिल पाया, जिससे वह मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान रहा।
विभागीय लापरवाही आई सामने
जांच में सामने आया कि PF की राशि में देरी का कारण विभागीय पासबुक में एंट्री नहीं होना था। यानी एक साधारण प्रशासनिक प्रक्रिया की चूक ने कर्मचारी को वर्षों तक उसके हक से वंचित रखा। कोर्ट ने इसे गंभीर चूक मानते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह होना पड़ेगा।
कोर्ट ने कहा- यह अधिकार है, उपहार नहीं
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभ कर्मचारी का अधिकार होते हैं, न कि कोई सरकारी मेहरबानी या उपहार। कोर्ट ने कहा कि यदि इन लाभों के भुगतान में देरी होती है, तो कर्मचारी को उसका ब्याज मिलना ही चाहिए। यह केवल कानूनी नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।
8% ब्याज देने के दिए आदेश
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को अक्टूबर 2011 से 24 जनवरी 2023 तक की अवधि के लिए 1.55 लाख रुपए पर 8 प्रतिशत सालाना ब्याज दिया जाए। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए कि यह पूरी राशि आदेश की प्रति मिलने के चार महीने के भीतर अदा की जाए। कोर्ट ने समय सीमा तय कर यह संदेश भी दिया कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
फैसले से कर्मचारियों को मिला बड़ा संदेश
इस फैसले को प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे साफ संकेत गया है कि सेवानिवृत्ति लाभों में देरी करने वाले विभागों को अब आर्थिक जिम्मेदारी उठानी होगी। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों पर लगाम लगाने का काम करेगा और अधिकारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए मजबूर करेगा।
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