वापस हुआ नेतागिरी करने वाले सरकारी कर्मचारी पर कार्रवाई का आदेश, विवाद के बाद बैकफुट पर आई सरकार
RAIPUR : छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के राजनीतिक दल या अन्य संस्था में पद न लेने के आदेश को वापस ले लिया है। इस मामले में विवाद के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और आदेश को स्थगित कर दिया। एक दिन पहले सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने एक ऑर्डर जारी किया था। इसमें कहा गया कि कोई भी सरकारी सेवक किसी भी राजनीतिक दल या किसी भी संस्था में कोई पद नहीं लेगा और न ही किसी राजनीतिक गतिविधि में शामिल होगा।
यदि ऐसा किया तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह पर फरमान सभी विभागों, एचओडी, कमिश्नर और कलेक्टरों को जारी किया गया था। कांग्रेस ने इस ऑर्डर पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस ने पूछा कि क्या यह ऑर्डर आरएसएस की शाखाओं में जाने वाले लोगों पर भी जारी होगा या उनको इससे छूट रहेगी।
सरकार ने यह ऑर्डर जारी किया था :
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों के प्रावधानों के अनुसार समस्त शासकीय सेवकों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने पद के दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्पक्षता, ईमानदारी एवं निष्ठा के साथ करें। उक्त नियमों के अंतर्गत यह स्पष्ट रूप से प्रावधानित है कि कोई भी शासकीय सेवक किसी भी प्रकार के राजनीतिक दल या संगठन का सक्रिय सदस्य नहीं होगा।
किसी भी राजनीतिक गतिविधि में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लेगा। किसी अन्य शासकीय, अशासकीय संस्था, समिति, संगठन या निकाय में बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के कोई पद धारण नहीं करेगा एवं न ही उक्त के द्वारा आयोजित किसी गतिविधि में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित होगा। ऐसे किसी पद या दायित्व को ग्रहण नहीं करेगा, जिससे उसके शासकीय कार्यों की निष्पक्षता प्रभावित हो।
अतः निर्देशित किया जाता है कि समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी यह सुनिश्चित करें कि वे उपरोक्त प्रावधानों का कड़ाई से पालन करें। यदि किसी शासकीय सेवक द्वारा इन नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसके विरुद्ध छग सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 एवं छ.ग. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के प्रावधानों के अंतर्गत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस ने उठाया था सवाल:
इस ऑर्डर के जारी होते ही इस पर सियासत शुरु हो गई । कांग्रेस ने इस ऑर्डर पर सवाल उठाए । कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि क्या यह नियम आरएसएस पर भी लागू होगा। उन्होंने कहा कि जो लोग आरएसएस की शाखाओं या उनके सम्मेलनों में भाग लेते हैं क्या उन पर भी कार्रवाई होगी। सरकार को इस ऑर्डर में यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या यह जानबूझकर चुन चुन कर लोगों पर कार्रवाई करने के लिए फरमान निकाला गया है या फिर राष्ट्रीय स्वयं सेवक जैसी संस्थाओं में भाग लेने पर भी समान कार्रवाई होगी।
विभिन्न संस्थाओं के सदस्य होते हैं कर्मचारी :
राजनीतिक दलों के सदस्य आमतौर पर सरकारी कर्मचारी नहीं होते। ऑर्डर में यह तो समझ में आया कि सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल के सदस्य होकर या कोई पद लेकर निष्पक्ष काम नहीं कर सकते। लेकिन ऑर्डर में यह भी लिखा कि किसी अन्य शासकीय, अशासकीय संस्था, समिति, संगठन या निकाय में बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के कोई पद धारण नहीं करेगा।
इससे यह साफ नहीं होता है कि क्या सरकारी कर्मचारी किसी सामाजिक संस्था या निजी संस्था के कार्यक्रमों में भी भाग नहीं ले सकता। क्योंकि समाज में विभिन्न प्रकार के जातिगत संगठन होते हैं जिनके सदस्य सभी लोग हैं। कर्मचारियों के अपने संगठन होते हैं जैसे अजाक्स,सपाक्स। क्या इनमें भी सरकारी कर्मचारी शामिल नहीं हो पाएंगे। यह बड़ा सवाल था।
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