छत्तीसगढ़ जल जीवन मिशन में बड़ा खेल, 11 हजार करोड़ खर्च पर CAG ने खोली पूरी पोल

VINAY VERMA | Jul 15, 2026, 09:18 IST
हर-घर-जल-CAG-रिपोर्ट
11 हजार करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन अपने लक्ष्य से काफी पीछे है। CAG की रिपोर्ट में अधूरी योजनाएं, फर्जी हर घर जल प्रमाणन, कमजोर प्लानिंग और जल गुणवत्ता निगरानी में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • 11 हजार 034 करोड़ खर्च, फिर भी राज्य 23वें नंबर पर।
  • 29 हजार 153 योजनाओं में सिर्फ 172 पूरी हुईं।
  • सिर्फ 716 गांव बने 'हर घर जल' प्रमाणित।
  • 6 हजार 480 करोड़ की फंडिंग देरी से हाथ से निकली।
  • 75 लैब में सिर्फ 4 पूरी जांच करने में सक्षम।

जल जीवन मिशन की पोल

जल जीवन मिशन को लेकर सरकार लगातार उपलब्धियां गिनाती रही। दावा किया गया कि गांव-गांव तक नल से पानी पहुंच गया। लेकिन अब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने इन दावों की परतें उधेड़ दी हैं। विधानसभा में पेश रिपोर्ट बताती है कि योजना की शुरुआत से लेकर क्रियान्वयन तक कई मोर्चों पर बड़ी चूक हुई। कहीं योजना बिना तैयारी के बनी। कहीं काम पूरा नहीं हुआ। कहीं पानी पहुंचने से पहले ही गांवों को 'हर घर जल' का तमगा दे दिया गया। यानी कागजों में काम तेज दिखा, जमीन पर तस्वीर अलग निकली।



फिर भी राज्य 23वें नंबर पर

जल जीवन मिशन अगस्त 2019 में शुरू हुआ था। उस समय प्रदेश के सिर्फ 6 फीसदी ग्रामीण परिवारों के पास नल कनेक्शन था। मार्च 2024 तक सरकार ने 38.97 लाख परिवारों को नल कनेक्शन देने का दावा किया। इसके लिए 11,034 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हुए। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ देश में 23वें स्थान पर रहा। यानी पैसा भी लगा और समय भी, लेकिन नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आए।



29 हजार योजनाएं मंजूर, पूरी हुईं सिर्फ 172

रिपोर्ट का सबसे बड़ा झटका यहीं है। मिशन के तहत 29,153 एकल ग्राम और 70 बहु-ग्राम जल योजनाएं मंजूर हुईं। लेकिन मार्च 2024 तक सिर्फ 172 एकल ग्राम योजनाएं ही पूरी हो सकीं। इससे भी बड़ी बात यह कि इनमें से केवल 32 योजनाओं का संचालन ग्राम पंचायतों या स्थानीय समितियों को सौंपा गया। बाकी योजनाएं अब भी सरकारी तंत्र पर निर्भर हैं। ऐसे में उनके लंबे समय तक चलने पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।



छत्तीसगढ़ में हर घर जल अधूरा


'हर घर जल' का सर्टिफिकेट, लेकिन नल सूखे

सरकार का लक्ष्य था कि मार्च 2024 तक राज्य के सभी 19,656 गांव हर घर जल घोषित हो जाएं। लेकिन केवल 716 गांव ही प्रमाणित हो सके। यानी कुल गांवों का महज 3.64 फीसदी। लेखा परीक्षा में कई ऐसे गांव भी मिले, जहां पाइपलाइन और जलापूर्ति का काम पूरा नहीं हुआ था, फिर भी उन्हें 'हर घर जल' का प्रमाणपत्र दे दिया गया। इतना ही नहीं, प्रदेश का एक भी जिला और एक भी विकासखंड ऐसा नहीं मिला, जहां हर ग्रामीण परिवार तक नल का पानी पहुंच गया हो।



बिना प्लानिंग शुरू हुआ मिशन

सीएजी ने साफ कहा कि मिशन की बुनियाद ही कमजोर रही। गांवों की कार्ययोजना बने बिना जिला योजना तैयार कर ली गई। राज्य की समग्र योजना बनाई ही नहीं गई। जल सुरक्षा योजना भी कागजों से आगे नहीं बढ़ी। इसका सीधा नुकसान फंडिंग पर पड़ा। शुरुआती दो साल की देरी के कारण राज्य 6,480 करोड़ रुपए की राशि हासिल नहीं कर पाया। इसमें केंद्र और राज्य, दोनों की हिस्सेदारी शामिल थी। यानी तैयारी की कमी ने विकास की रफ्तार भी रोक दी।



सोलर योजना फेल, पानी की जांच भी अधूरी

रिपोर्ट में सौर ऊर्जा आधारित जल योजनाओं पर भी सवाल उठाए गए हैं। कई जगह सोलर सिस्टम की क्षमता से ज्यादा नल कनेक्शन दे दिए गए। इसका असर करीब 28,984 परिवारों पर पड़ा। उन्हें तय मानक के मुताबिक पानी नहीं मिल सका। दूसरी ओर पानी की गुणवत्ता जांचने वाली व्यवस्था भी कमजोर मिली। राज्य की 75 लैब में सिर्फ चार ही ऐसी थीं, जो सभी जरूरी मानकों पर जांच कर सकती थीं। 37 फीसदी लैब के पास जरूरी NABL मान्यता तक नहीं थी।



अब सिर्फ दावा नहीं, काम चाहिए

सीएजी ने सरकार को कई सिफारिशें भी दी हैं। कहा है कि योजना बनाने का तरीका बदले। फंड का बेहतर उपयोग हो। जल स्रोतों की सुरक्षा पर काम हो। लैब मजबूत हों। योजनाओं की निगरानी बढ़े। ग्राम पंचायतों की भागीदारी भी बढ़ाई जाए। क्योंकि नल लगाना ही काफी नहीं है। हर घर तक रोज सुरक्षित पानी पहुंचाना ही असली लक्ष्य है।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ जल जीवन मिशन में देश में कौन से स्थान पर है?
    उत्तर: सीएजी (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 11,034 करोड़ रुपए से अधिक की भारी-भरकम राशि खर्च करने के बावजूद छत्तीसगढ़ जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन के मामले में देश भर के राज्यों में 23वें स्थान (पिछड़े राज्यों में) पर है।
  2. छत्तीसगढ़ के कितने गांवों को 'हर घर जल' का प्रमाण पत्र मिला है?
    उत्तर: राज्य के कुल 19,656 गांवों में से केवल 716 गांवों (महज 3.64 प्रतिशत) को ही 'हर घर जल' प्रमाणित किया गया है। सीएजी जांच में यह भी सामने आया कि कई गांवों में काम पूरा हुए बिना ही कागजों पर फर्जी सर्टिफिकेट बांट दिए गए।

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