सरकार बोली खनन की मंजूरी नहीं, कांग्रेस का सवाल फिर कोल ब्लॉक की नीलामी क्यों

Arun Tiwari | Sept 14, 2026, 14:55 IST
तारा कॉल ब्लॉक की नीलामी पर विवाद
तारा कॉल ब्लॉक की नीलामी पर विवाद
हसदेव-अरण्य के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के बाद छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान तेज हो गया है। सरकार का कहना है कि फिलहाल सिर्फ नीलामी हुई है, खनन के लिए पर्यावरण और वन समेत कई मंजूरियां जरूरी हैं।

हसदेव-अरण्य के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत गरमा गई है। राज्य सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल सिर्फ कोल ब्लॉक की नीलामी हुई है, खनन की अनुमति नहीं मिली है। वहीं कांग्रेस ने सरकार की सफाई पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि यदि खनन की अनुमति अभी नहीं दी गई है तो साय सरकार ने तारा ब्लॉक की नीलामी के लिए केंद्र को अनुशंसा क्यों की थी।



सिर्फ नीलामी,खनन नहीं:

छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य क्षेत्र में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर राज्य में सियासी घमासान तेज हो गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि तारा कोल ब्लॉक में फिलहाल केवल नीलामी की प्रक्रिया पूरी हुई है। सफल बोलीदाता को अभी खनन शुरू करने के लिए माइनिंग प्लान की मंजूरी, खनन पट्टा, पर्यावरणीय स्वीकृति और वन स्वीकृति समेत कई वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। सरकार का कहना है कि इन अनुमतियों के बिना न तो खनन शुरू हो सकता है और न ही वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की जा सकती है।



नीलामी की सिफारिश क्यों:

वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार की इस सफाई को खारिज करते हुए सवाल उठाया है कि अगर राज्य सरकार खनन की अनुमति देने के पक्ष में नहीं है तो उसने केंद्र सरकार से तारा कोल ब्लॉक की नीलामी की सिफारिश क्यों की? कांग्रेस ने दावा किया है कि साय सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय को पत्र लिखा था। कांग्रेस ने सरकार से यह भी पूछा है कि क्या वह तारा में खनन के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति देने पर सहमति नहीं देने की गारंटी देगी?



9 कंपनियों ने लगाई बोली, CG Syn-Gas को मिला ब्लॉक:

छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अनुसार तारा कोल ब्लॉक की नीलामी में कुल नौ बोलियां प्राप्त हुई थीं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह ब्लॉक CG Syn-Gas and Chemicals Limited को मिला है। कांग्रेस का आरोप है कि यह कंपनी अडानी समूह से जुड़ी है और अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सहयोगी कंपनी मुंद्रा सिनर्जी लिमिटेड की सब्सिडियरी है।



सरकार का कहना है कि नीलामी में सफल होना अपने आप में खनन की अनुमति नहीं है। कंपनी को आगे केंद्र और राज्य स्तर पर निर्धारित सभी कानूनी और पर्यावरणीय प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। माइनिंग प्लान, खनन पट्टा, पर्यावरणीय मंजूरी और वन स्वीकृति के बाद ही वास्तविक खनन गतिविधि शुरू हो सकेगी।



कांग्रेस ने उठाए नीयत पर सवाल:

कांग्रेस ने सरकार के इस तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केवल यह कहना कि अभी खनन की अनुमति नहीं मिली है, पर्याप्त जवाब नहीं है। दीपक बैज ने आरोप लगाया कि साय सरकार ने खुद 11 दिसंबर 2025 को तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के लिए केंद्र को अनुशंसा की थी।



बैज ने कहा कि इसके विपरीत कांग्रेस की तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने 23 जून 2023 को केंद्र सरकार को पत्र लिखकर तारा समेत नौ कोल ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने की मांग की थी। कांग्रेस के मुताबिक 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने भी सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर हसदेव-अरण्य में किसी नए कोल ब्लॉक के आवंटन या नीलामी पर रोक लगाने की मांग की थी।



कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि 16 जुलाई 2023 को तत्कालीन राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर हसदेव-अरण्य में किसी नई खदान के आवंटन या विकास की आवश्यकता नहीं होने की बात कही थी।



2011 का आवंटन रद्द होने के बाद नीलामी व्यवस्था:

तारा कोल ब्लॉक का विवाद नया नहीं है। यह ब्लॉक वर्ष 2011 में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को आवंटित किया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश के कई कोल ब्लॉकों के साथ तारा का पुराना आवंटन भी रद्द हो गया।



इसके बाद केंद्र सरकार ने कोयला ब्लॉकों के आवंटन के लिए नीलामी व्यवस्था लागू की। मौजूदा प्रक्रिया भी इसी व्यवस्था के तहत हुई है। राज्य सरकार का तर्क है कि पुराने आवंटन और वर्तमान नीलामी को अलग-अलग प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।सरकार ने यह भी कहा है कि नीलामी के बाद सफल कंपनी को खनन शुरू करने से पहले पर्यावरण और वन से संबंधित सभी निर्धारित मंजूरियां हासिल करनी होंगी।



कांग्रेस ने 2019-2022 के पत्राचार का भी उठाया मुद्दा:

सरकार की ओर से हसदेव-अरण्य क्षेत्र में कोयला ब्लॉकों को लेकर पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में हुए पत्राचार का भी उल्लेख किया गया है। सरकार के अनुसार वर्ष 2019 और 2021 में कोल ब्लॉकों के आवंटन को लेकर केंद्र से पत्राचार हुआ था। वर्ष 2022 में विधानसभा में हसदेव क्षेत्र के कोल ब्लॉकों को लेकर अशासकीय संकल्प भी पारित हुआ था।



सरकार ने हसदेव-अरण्य के दूसरे कोल ब्लॉक पीईकेबी का उदाहरण देते हुए कहा है कि क्षेत्र में वन और पर्यावरण स्वीकृतियों की प्रक्रिया पहले भी आगे बढ़ी है। सरकार के दस्तावेजों के अनुसार पीईकेबी को जुलाई 2011 में स्टेज-1 और मार्च 2012 में स्टेज-2 फॉरेस्ट क्लियरेंस मिली थी।



10 लाख से ज्यादा पेड़ काटे जाने का कांग्रेस का दावा:

कांग्रेस ने तारा कोल ब्लॉक को लेकर पर्यावरणीय खतरे का मुद्दा भी उठाया है। पार्टी का दावा है कि तारा कोल ब्लॉक करीब 5 हजार एकड़ में फैला है और इसमें 4 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र घने जंगल का है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि परियोजना के कारण 10 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई हो सकती है।



कांग्रेस ने यह भी कहा कि तारा ब्लॉक लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास स्थित है और यहां खनन से हाथियों के आवागमन के रास्तों पर गंभीर असर पड़ सकता है। पार्टी का दावा है कि इससे हाथियों के साथ-साथ क्षेत्र की दूसरी वन्यजीव प्रजातियों के लिए भी खतरा बढ़ेगा।



हालांकि, इन दावों के बीच सरकार का कहना है कि किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले पर्यावरणीय प्रभावों का निर्धारित मानकों के अनुसार आकलन किया जाएगा और आवश्यक पर्यावरणीय एवं वन स्वीकृतियों के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव होगी।



हसदेव पर वैज्ञानिक अध्ययन का भी हवाला:

राज्य सरकार ने हसदेव-अरण्य क्षेत्र को लेकर भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के वैज्ञानिक अध्ययन का भी उल्लेख किया है। सरकार के मुताबिक अध्ययन में क्षेत्र की जैव विविधता, वन्यजीव, जलग्रहण क्षेत्र और पर्यावरणीय संवेदनशीलता का आकलन किया गया था। सरकार का कहना है कि अध्ययन में तारा सहित कुछ कोल ब्लॉकों को कड़े पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और संरक्षण प्रावधानों के साथ खनन के लिए विचार योग्य माना गया था।



सरकार ने वन संरक्षण के अपने दावे के समर्थन में फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट-2023 के आंकड़े भी सामने रखे हैं। इसके अनुसार वर्ष 2021 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्राच्छादन में 683.62 वर्ग किलोमीटर की शुद्ध वृद्धि दर्ज की गई, जो राज्यों में सर्वाधिक बताई गई है।



अब सरकार से कांग्रेस की सीधी गारंटी की मांग:

तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के बाद विवाद का केंद्र अब यही सवाल बन गया है कि क्या नीलामी के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी पर्यावरण और वन स्वीकृतियां मिलेंगी।



कांग्रेस ने सरकार से सीधे पूछा है कि यदि सरकार वास्तव में हसदेव-अरण्य के पर्यावरण और जंगलों को लेकर गंभीर है तो क्या वह तारा कोल ब्लॉक के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया में सहमति नहीं देने की गारंटी देगी? क्या सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि तारा में कोयला उत्खनन शुरू नहीं होगा?



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