दो साल लिव-इन में रहने के बाद शादी से इनकार पर रेप केस नहीं : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

Umeshwari Baghel | Jun 30, 2026, 15:45 IST
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि दो बालिग लंबे समय तक सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहे हों तो केवल शादी से इनकार के आधार पर दुष्कर्म का आरोप साबित नहीं माना जा सकता।

समझें क्या है पूरा मामला

Bilaspuir। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शादी का वादा कर दुष्कर्म के आरोप से जुड़े एक मामले में ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखा है। कोर्ट ने आरोपी सिद्धार्थ सरांगी को बरी किए जाने के खिलाफ महिला की अपील खारिज कर दी। डिवीजन बेंच ने कहा कि दोनों बालिग करीब दो साल तक आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहे थे। ऐसे में केवल शादी से इनकार के आधार पर दुष्कर्म का आरोप साबित नहीं माना जा सकता।



मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल और न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने की। अपील भिलाई नगर निगम में प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर कार्यरत महिला ने दायर की थी। महिला ने रायपुर निवासी सिद्धार्थ सरांगी को सभी आरोपों से बरी किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।



वर्ष 2019 में हुई थी पहचान

मामला रायपुर के खम्हारडीह थाना क्षेत्र का है। महिला ने शिकायत में बताया था कि वर्ष 2019 में रायपुर आईआईएम से एमबीए की पढ़ाई के दौरान उसकी पहचान सिद्धार्थ सरांगी से हुई। इसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वे लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे।



महिला का आरोप था कि युवक ने उससे शादी करने का वादा किया था। इसी भरोसे पर वर्ष 2019 से 2021 के बीच दोनों के बीच कई बार शारीरिक संबंध बने। बाद में युवक ने उम्र, जाति और धर्म अलग होने का हवाला देकर शादी से इनकार कर दिया। महिला ने 28 नवंबर 2021 की एक घटना को लेकर अप्राकृतिक कृत्य का आरोप भी लगाया था।



मामले की सुनवाई रायपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई। अदालत ने 24 जून 2025 को सिद्धार्थ सरांगी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट में अक्विटल अपील दायर की।



महिला ने स्वीकार किया लिव-इन में रहना

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि महिला और आरोपी करीब दो साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहे थे। जिरह में महिला ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया था।



कोर्ट ने कहा कि महिला उच्च शिक्षित और परिपक्व है। वह अपने फैसले लेने में सक्षम थी और रिश्ते के परिणामों को समझती थी। अदालत ने पाया कि यह मामला लंबे समय तक चले सहमति आधारित संबंध से जुड़ा था। रिकॉर्ड से लगातार जबरदस्ती या बल प्रयोग साबित नहीं हुआ।



बेंच ने कहा कि शादी की इच्छा होना और बाद में शादी न होना अलग बात है। केवल शादी नहीं होने के कारण सहमति से बने संबंधों को स्वतः दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में यह देखना जरूरी है कि शादी का वादा शुरुआत से ही झूठा था या रिश्ता बाद में किसी कारण से टूटा।



समझौते और पैसों का विवाद भी सामने आया

सुनवाई के दौरान महिला आयोग में हुए समझौते की चर्चा भी सामने आई। रिकॉर्ड के अनुसार विवाद को 30 लाख रुपए में सुलझाने की बात हुई थी। आरोपी ने महिला को 15 लाख रुपए का चेक दिया था। समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होने के कारण चेक का भुगतान रोक दिया गया। इसके बाद महिला ने चेक आयोग को वापस कर दिया।



हाईकोर्ट ने इस आर्थिक विवाद को भी मामले की परिस्थितियों के साथ देखा। अदालत ने माना कि दोनों के बीच रिश्ता खत्म होने के बाद विवाद बढ़ा था।



मेडिकल जांच में नहीं मिले बल प्रयोग के निशान

मेडिकल जांच करने वाली डॉ. विद्या शिव कुमार के बयान के अनुसार महिला के शरीर पर अप्राकृतिक कृत्य या बल प्रयोग के निशान नहीं मिले थे। हाईकोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट, महिला के बयान, लिव-इन संबंध की अवधि और अन्य साक्ष्यों का संयुक्त मूल्यांकन किया।



अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के रविश सिंह राणा बनाम उत्तराखंड राज्य 2025 मामले का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि बालिग और समझदार व्यक्ति अपने निजी रिश्तों से जुड़े फैसले लेने में सक्षम होते हैं।



हाईकोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया था। आरोपी को बरी करने के फैसले में कोई गंभीर कानूनी त्रुटि नहीं मिली। इसी आधार पर महिला की अपील खारिज कर दी गई और सिद्धार्थ सरांगी की रिहाई बरकरार रखी गई।



महत्वपूर्ण तथ्य

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरोपी सिद्धार्थ सरांगी की रिहाई बरकरार रखी।


महिला की अक्विटल अपील खारिज कर दी गई।


दोनों करीब दो साल तक सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहे।


हाईकोर्ट ने कहा कि केवल शादी से इनकार दुष्कर्म साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।


महिला और आरोपी की पहचान वर्ष 2019 में हुई थी।


महिला ने वर्ष 2019 से 2021 के बीच संबंध होने की बात कही।


ट्रायल कोर्ट ने 24 जून 2025 को आरोपी को बरी किया था।


मेडिकल जांच में बल प्रयोग या अप्राकृतिक कृत्य के निशान नहीं मिले।


महिला आयोग में 30 लाख रुपए में समझौते की बात सामने आई थी।


आरोपी ने 15 लाख रुपए का चेक दिया था, जिसका भुगतान बाद में रोक दिया गया।


हाईकोर्ट ने कहा कि यह देखना जरूरी है कि शादी का वादा शुरुआत से झूठा था या रिश्ता बाद में टूटा।


फैसला न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल और न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने सुनाया।



FAQ

  1. क्या शादी से इनकार करने पर दुष्कर्म का मामला बन सकता है?
    केवल शादी से इनकार के आधार पर दुष्कर्म साबित नहीं होता। कोर्ट यह देखता है कि शादी का वादा शुरुआत से ही झूठा था या रिश्ता बाद में टूटा।
  2. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला की अपील क्यों खारिज की?
    कोर्ट ने पाया कि दोनों बालिग करीब दो साल तक सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। रिकॉर्ड में लगातार जबरदस्ती या बल प्रयोग साबित नहीं हुआ।
  3. मेडिकल जांच में क्या सामने आया?
    मेडिकल जांच में महिला के शरीर पर बल प्रयोग या अप्राकृतिक कृत्य के स्पष्ट निशान नहीं मिले थे। कोर्ट ने रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की रिहाई बरकरार रखी।

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