डॉक्टरों की कुर्सी पर गैर-चिकित्सकीय अफसरों की तैनाती पर हाईकोर्ट में घमासान, शासन ने माना- सेटअप में पद ही नहीं
जवाब में माना गया है कि स्वास्थ्य संचालनालय (DHS) के स्वीकृत सेटअप में अतिरिक्त संचालक का पद नहीं है। अब इस मामले में अंतिम सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
छत्तीसगढ़ इन-सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन (CIDA) ने इस नियुक्ति को चुनौती दी है। एसोसिएशन का कहना है कि चिकित्सकीय संवर्ग के पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की नियुक्ति नियमों के अनुसार होनी चाहिए। वहीं, शासन ने अपने पक्ष में भर्ती नियमों का हवाला दिया है। अब हाईकोर्ट यह देखेगा कि नियुक्ति की प्रक्रिया तय नियमों के मुताबिक थी या नहीं।
पद स्वीकृत नहीं था, फिर कैसे हुई नियुक्ति?
CIDA ने अपनी याचिका में स्वास्थ्य संचालनालय के चिकित्सकीय संवर्ग के पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की तैनाती पर सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन ने इस व्यवस्था को चुनौती दी है।
सुनवाई के दौरान शासन ने बताया कि DHS के स्वीकृत सेटअप में अतिरिक्त संचालक का पद नहीं है। इसके बाद 16 अक्टूबर 2026 को संशोधित आदेश जारी किया गया। इस आदेश में संबंधित अधिकारी को अतिरिक्त संचालक के बजाय संयुक्त संचालक (Joint Director) के पद पर पदस्थ किया गया।
इसके बाद भी नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर सवाल बने हुए हैं। मुख्य सवाल यह है कि जब पद स्वीकृत नहीं था, तो पहले उस पर नियुक्ति का आदेश कैसे जारी हुआ? क्या आदेश जारी करने से पहले स्वीकृत पदों और भर्ती नियमों की जांच की गई थी? अब इन मुद्दों पर अदालत में सुनवाई होगी।
भर्ती नियमों के आधार पर शासन ने रखा पक्ष
शासन ने अधिकारी की नियुक्ति के समर्थन में भर्ती नियमों का हवाला दिया है। उसका तर्क है कि प्रशासनिक जरूरत के अनुसार संबंधित प्रावधान के तहत नियुक्ति की जा सकती है।
हालांकि, CIDA ने इस दलील पर सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन के मुताबिक, वैकल्पिक भर्ती प्रक्रिया अपनाने के लिए तय नियमों का पालन जरूरी है। कार्मिक विभाग की पूर्व सहमति का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है।
अब अदालत में यह जांच होगी कि नियुक्ति के दौरान इन प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि प्रशासनिक जरूरत के आधार पर संबंधित पद पर नियुक्ति करना नियमों के अनुरूप था या नहीं।
डॉक्टरों की पदोन्नति की पात्रता पर भी सवाल
इस मामले में शासन ने याचिकाकर्ता डॉक्टरों की पात्रता का मुद्दा भी उठाया है। संयुक्त संचालक के पद से जुड़े उप संचालक पद पर पदोन्नति के लिए तीन साल के अनुभव की पात्रता का सवाल सामने आया है।
इस वजह से मामला अब केवल गैर-चिकित्सकीय अधिकारी की नियुक्ति तक सीमित नहीं रहा। डॉक्टरों की पदोन्नति से जुड़े नियमों पर भी बहस होगी।
अदालत को नियुक्ति की प्रक्रिया के साथ पात्रता से जुड़े मुद्दों पर भी विचार करना होगा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही इस विवाद पर स्थिति साफ होगी।
18 नवंबर को होगी अंतिम सुनवाई
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी इंद्रजीत बर्मन की ओर से निजी वकील नियुक्त किए जाने की जानकारी सामने आई। उनकी ओर से जवाब पेश करने के लिए अतिरिक्त समय भी मांगा गया।
इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख तय की। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर है।
CIDA का कहना है कि चिकित्सकीय संवर्ग के पदों पर नियुक्तियां तय भर्ती नियमों, पात्रता और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए। वहीं, शासन ने प्रशासनिक जरूरत और भर्ती नियमों के आधार पर अपना पक्ष रखा है।
फिलहाल, शासन ने यह स्वीकार किया है कि DHS के स्वीकृत सेटअप में अतिरिक्त संचालक का पद नहीं था। 16 अक्टूबर 2026 को संशोधित आदेश जारी कर संबंधित अधिकारी को संयुक्त संचालक के पद पर पदस्थ किया गया। लेकिन नियुक्ति की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं, इसका फैसला अभी बाकी है। हाईकोर्ट की अगली सुनवाई में इस विवाद से जुड़े अहम सवालों पर विचार होगा।