छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग में फर्जी रिसीविंग से साढ़े तीन करोड़ की ठगी
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में बिना सामान सप्लाई किए करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए का भुगतान लेने की साजिश सामने आई है। यह खुलासा तब हुआ जब स्वास्थ्य संचालनालय को कोर्ट के जरिए एक वेंडर का नोटिस मिला। नोटिस में बिलासपुर सीएमएचओ (CMHO – Chief Medical and Health Officer) कार्यालय को जननी शिशु सुरक्षा किट की सप्लाई का दावा करते हुए भुगतान मांगा गया था। जांच में सामने आया कि जिस मद में 2019 में सिर्फ 78 लाख रुपए का बजट स्वीकृत हुआ था, उसी में करोड़ों की सप्लाई दिखाई गई। लेकिन स्टोर में सामान पहुंचा ही नहीं। मामला अब पुलिस को सौंप दिया गया है। यह घोटाला सात साल पुराना है और अब कोर्ट के हस्तक्षेप से इसकी परतें खुलनी शुरू हुई हैं।
कैसे हुआ खुलासा
स्वास्थ्य संचालनालय को कोर्ट के जरिए एक वेंडर का नोटिस मिला था। इस नोटिस में बिलासपुर सीएमएचओ कार्यालय से जननी शिशु सुरक्षा किट की सप्लाई के एवज में भुगतान की मांग की गई थी। नोटिस मिलते ही विभाग सतर्क हो गया। इसके बाद रिकॉर्ड और स्टोर की गोपनीय जांच शुरू कराई गई।
जांच में क्या सामने आया
जांच में पता चला कि जिस जननी शिशु सुरक्षा किट की सप्लाई का दावा किया जा रहा था, वह सामान स्टोर में कभी पहुंचा ही नहीं। यह सबसे चौंकाने वाला तथ्य निकलकर सामने आया। संबंधित स्टोर कीपर से पूछताछ भी की गई। लेकिन चार साल बाद रिसीविंग जारी करने और बिना सामान प्राप्त किए दस्तावेज बनाने पर उनका कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
सिर्फ 78 लाख के बजट में करोड़ों की सप्लाई
रिकॉर्ड के अनुसार इस खरीदी के लिए साल 2019 में शासन ने केवल 78 लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया था। लेकिन इसी मद में करोड़ों रुपए की सप्लाई दिखाई गई। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि इतने सीमित बजट के बावजूद करोड़ों की खरीदी किस नियम और किसके आदेश पर दर्शाई गई। यह पूरा मामला विभाग के लिए भी असामान्य माना जा रहा है।
2019 से 2026 तक का घटनाक्रम
साल 2019 में जननी शिशु सुरक्षा किट की खरीदी के लिए 78 लाख रुपए का बजट स्वीकृत हुआ था। इसके चार साल बाद 2023 में बिलासपुर सीएमएचओ कार्यालय के स्टोर की रिसीविंग जारी की गई। अब 2026 में उसी पुरानी रिसीविंग के आधार पर करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए के भुगतान का दावा किया जा रहा है। जांच में स्टोर में सामान न मिलने पर फर्जीवाड़े की आशंका जताई गई है।
मामला अब पुलिस के हवाले
प्रथम दृष्टया फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी राशि हासिल करने की कोशिश के सबूत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच पुलिस को सौंप दी है।
विभाग ने पुलिस को भेजे पत्र में फर्जी रिसीविंग, संभावित जालसाजी और विभागीय अधिकारियों व ठेकेदार की भूमिका की विस्तृत जांच करने का आग्रह किया है।
अधिकारी ने क्या कहा
स्वास्थ्य संचालनालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह विभाग के लिए भी बेहद असामान्य मामला है। उनके मुताबिक भुगतान तो नहीं हो सका, लेकिन सरकारी धन हड़पने की गहरी साजिश के संकेत जरूर मिले हैं। अधिकारी ने बताया कि एफआईआर (FIR – First Information Report) दर्ज कराई जा रही है। पुलिस जांच में पूरी सच्चाई सामने आने की उम्मीद जताई गई है।
FAQ
- CMHO का पूरा नाम क्या है?
CMHO का पूरा नाम Chief Medical and Health Officer है। यह जिले के स्वास्थ्य विभाग का सबसे वरिष्ठ अधिकारी होता है। इस मामले में बिलासपुर सीएमएचओ कार्यालय से जुड़ा नोटिस सामने आया था। - FIR का पूरा नाम क्या है?
FIR का पूरा नाम First Information Report है, जिसे हिंदी में प्रथम सूचना रिपोर्ट कहते हैं। किसी अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस इसे दर्ज करती है। इसी के आधार पर आगे की जांच शुरू होती है। - जननी शिशु सुरक्षा योजना क्या है?
जननी शिशु सुरक्षा योजना केंद्र सरकार की एक स्वास्थ्य योजना है। यह गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को मुफ्त चिकित्सा सुविधा देने के लिए बनाई गई है। इसी योजना के तहत जननी किट की सप्लाई की जाती है।
ये खबरें भी पढ़ें...
छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग भर्ती: 67 पदों के लिए 6 जुलाई है तक आवेदन
एमपी स्वास्थ्य विभाग भर्ती: एक लाख तक सैलरी, 24 जून लास्ट डेट, करें आवेदन
5 नए मेडिकल कॉलेजों को नहीं मिली एनएमसी मान्यता, स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल
योग अब स्वास्थ्य विभाग के हवाले, ट्रैक शू, योगा मैट वाला भ्रष्टाचार दबाने की कोशिश?