शिकायतें, भ्रष्टाचार और जीरो प्रोडक्टिविटी के बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक पहुंची लड़ाई
Raipur. छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में बड़े पैमाने पर हुए तबादलों ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। वर्षों से एक ही जगह जमे डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर्स और हॉस्पिटल कोऑर्डिनेटर्स को हटाने के साथ ही विभाग को इस बात का अंदेशा भी था कि, कई अधिकारी ट्रांसफर रुकवाने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। यही वजह रही कि तबादला आदेश जारी होने के तुरंत बाद आनन फानन में विभाग ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्टमें कैविएट दायर कर कानूनी मोर्चा भी संभाल लिया।
विभाग ने सभी 33 जिलों के डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर्स और पांच हॉस्पिटल कोऑर्डिनेटर्स का तबादला किया है। इनमें से कई अधिकारी पिछले 8 से 10 वर्षों से एक ही जिले में पदस्थ थे। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, लगातार मिल रही शिकायतों और कमजोर कार्यप्रणाली के बाद यह फैसला लिया गया।
जानकारी के अनुसार, कई जिलों से अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। आरोप थे कि योजनाओं की मॉनिटरिंग प्रभावित हो रही थी। कामकाज की रफ्तार धीमी पड़ चुकी थी और कई मामलों में भ्रष्टाचार की शिकायतें भी दर्ज हुई थीं। विभाग का मानना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर जमे रहने से जवाबदेही कमजोर हो जाती है और इसका असर सीधे स्वास्थ्य योजनाओं पर पड़ता है।
तबादले के साथ शुरू हुई कानूनी तैयारी
सूत्र बताते हैं कि विभाग को पहले ही संकेत मिल गए थे कि कुछ अधिकारी कोर्ट (CG High Court) जाकर तबादले पर रोक लगाने की कोशिश कर सकते हैं। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अधिवक्ता अमिया भूषण के माध्यम से हाईकोर्ट में कैविएट दायर की। कैविएट दायर करने का मकसद साफ था। यदि कोई अधिकारी अदालत पहुंचे तो बिना विभाग का पक्ष सुने कोई आदेश पारित न हो। प्रशासनिक मामलों में अक्सर अधिकारी तत्काल राहत लेने की कोशिश करते हैं, इसलिए इस बार विभाग पहले से अलर्ट मोड में नजर आया।
कुछ अधिकारी पहुंचे हाईकोर्ट
विभाग की आशंका सही साबित हुई और कुछ अधिकारी हाईकोर्ट भी पहुंच गए। हालांकि विभागीय अधिकारियों का दावा है कि सभी तबादले ट्रांसफर पॉलिसी के तहत किए गए हैं और पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप अपनाई गई है। बताया जा रहा है कि कोर्ट पहुंचे मामलों में संबंधित पक्षों को तत्काल राहत नहीं मिली और कुछ याचिकाएं निरस्त भी हो गईं। इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे स्वास्थ्य अधिकारी धर्मेंद्र गवई ने कहा कि यह पूरी तरह नीतिगत फैसला है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से एक ही जगह पदस्थ रहने के कारण उत्पादकता प्रभावित हो रही थी और विभाग लगातार शिकायतें प्राप्त कर रहा था। गवई के मुताबिक हमें पहले से अंदेशा था कि कुछ लोग हाईकोर्ट जाएंगे, इसलिए विभाग ने पहले ही कैविएट दायर कर दी थी। तबादले पूरी तरह नियमानुसार किए गए हैं।
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