छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग सख्त, 43 डॉक्टरों से वसूले जाएंगे करोड़ों रुपए
NEWS IN SHORT
ग्रामीण सेवा न देने पर 43 डॉक्टरों पर बड़ी कार्रवाई।
डॉक्टरों से वसूले जाएंगे 17 करोड़ 75 लाख रुपए पेनाल्टी।
बांड नियमों के उल्लंघन पर स्टायपेंड की भी होगी वसूली।
नोटिस के बावजूद जॉइन न करने पर कलेक्टर करेंगे कार्रवाई।
स्वास्थ्य मंत्री ने दी लापरवाह डॉक्टरों के खिलाफ सख्त चेतावनी।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने से कतराने वाले डॉक्टरों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। एमबीबीएस और स्पेशलिस्ट कोर्स करने के बाद अनिवार्य ग्रामीण पोस्टिंग जॉइन न करने वाले 43 डॉक्टरों से विभाग 17 करोड़ 75 लाख रुपए की पेनाल्टी वसूलने जा रहा है। विशेष बात यह है कि इस राशि में केवल बांड की रकम ही नहीं, बल्कि पढ़ाई के दौरान सरकार द्वारा दिया गया स्टायपेंड भी शामिल होगा।
बांड की शर्तों का उल्लंघन
नियमों के मुताबिक, एमबीबीएस और पीजी की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों को दो साल की अनिवार्य ग्रामीण सेवा देनी होती है। इसके लिए एडमिशन के समय ही बांड भरवाया जाता है।
एमबीबीएस (UG): 25 लाख रुपये का बांड।
विशेषज्ञ (PG): 50 लाख रुपये का बांड।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के कड़े रुख के बाद स्वास्थ्य संचालनालय ने मंगलवार को इस वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी है। संबंधित जिलों के कलेक्टरों को इन डॉक्टरों से भू-राजस्व की बकाया राशि की तरह वसूली करने के निर्देश दिए गए हैं।
नोटिस का असर और अजीबोगरीब बहाने
पिछले साल जून और सितंबर में 655 एमबीबीएस और 155 विशेषज्ञों की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए थे। इनमें से कई डॉक्टरों ने जॉइन नहीं किया, जिसके बाद विभाग ने दिसंबर में नोटिस जारी करना शुरू किया। नोटिस मिलते ही 54 डॉक्टरों (37 यूजी और 17 पीजी) ने आनन-फानन में मेडिकल सर्टिफिकेट और जॉइनिंग लेटर सौंप दिया, जिससे वे कार्रवाई से बच गए। शेष 43 डॉक्टरों ने नोटिस का जवाब तो दिया, लेकिन जॉइन करने से मना कर दिया। डॉक्टरों ने तर्क दिए कि जहां पोस्टिंग हुई है वहां सुविधाएं नहीं हैं, किसी ने छोटे बच्चों की पढ़ाई तो किसी ने बुजुर्ग माता-पिता की देखरेख का हवाला दिया।
कड़ी कार्रवाई की तैयारी
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बांड भरते समय डॉक्टरों को स्पष्ट था कि उनकी सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों में ली जाएंगी। ऐसे में अब किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह कड़ा कदम उठाना आवश्यक है ताकि भविष्य में डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारी से न भागें।
निष्कर्ष
अनिवार्य ग्रामीण सेवा से पीछे हटना न केवल कानूनी बांड का उल्लंघन है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी से विमुख होना भी है। सरकार द्वारा 17 करोड़ 75 लाख रुपए की वसूली का यह कड़ा फैसला स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने और भविष्य के डॉक्टरों को अनुशासन एवं कर्तव्य के प्रति सचेत करने के लिए एक आवश्यक कदम है।
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