अफसरों की मनमानी पर भड़का छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, आदेश ताक पर रखने वाले अधिकारियों पर सीधे FIR की चेतावनी

Umeshwari Baghel | May 25, 2026, 15:59 IST
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना और अफसरों की मनमानी बढ़ रही है। फैसले के बावजूद लोगों को न्याय पाने के लिए बार-बार कोर्ट जाना पड़ता है। पिछले आठ साल में अवमानना के मामले छह गुना बढ़े हैं।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना बढ़ी
  • अफसरों की मनमानी से पीड़ित बार-बार कोर्ट पहुंचे
  • 8 साल में अवमानना के मामले छह गुना बढ़े
  • कानून कहता है: 6 महीने जेल और जुर्माना संभव
  • विशेषज्ञों का सुझाव: दोषी अफसर से खर्च वसूलें

NEWS IN DETAIL

Bilaspur। बिलासपुर में हाल ही में देखा गया है कि छत्तीसगढ़ में हाईकोर्ट के आदेशों को कई सरकारी अफसर अनदेखा कर रहे हैं। अदालत से फैसला मिलने के बाद भी लोग इसका फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। अपने हक को लागू करवाने के लिए उन्हें बार-बार कोर्ट की चक्कर काटनी पड़ रही है। छोटे कर्मचारियों से लेकर बड़े आईएएस, आईपीएस, यूनिवर्सिटी के कुलपति और सरकारी कंपनियों के सीएमडी तक इस कतार में शामिल हो चुके हैं।



अवमानना के मामले बढ़े

हाईकोर्ट में लंबित अवमानना के मामले बता रहे हैं कि सरकारी महकमे कितने लापरवाह हैं। दिसंबर 2015 में केवल 391 मामले लंबित थे, जो दिसंबर 2022 तक बढ़कर 2324 हो गए। यानी सिर्फ आठ साल में ये छह गुना बढ़ गए। 2025 और 2026 में फिर से तेजी आई और अप्रैल 2026 तक 1945 मामले अभी भी पेंडिंग हैं। ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि प्रशासन में जवाबदेही की कमी है और इससे पूरी न्याय प्रणाली पर सवाल उठते हैं।



फैसले के बाद भी न्याय नहीं

कई विभागों के अफसर कोर्ट के आदेशों को फाइलों में दबा देते हैं। जब तय समय में काम नहीं होता, तो परेशान लोग भारी खर्च करके फिर से कोर्ट का रुख करते हैं। जानकार कहते हैं कि यह स्थिति न्याय व्यवस्था को कमजोर करती है और लोगों का कानून पर भरोसा खत्म होने लगता है।



गाइडलाइन बनाने की मांग

साल 2020 में इस अफसरशाही पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई। वकील संतोष पांडेय ने कहा कि अधिकारी आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि कानून में पहले से ही पर्याप्त उपाय मौजूद हैं।



हाईकोर्ट की टिप्पणी

हाल के वर्षों में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। उदाहरण के लिए, 7 मई 2025 को शिक्षकों की भर्ती में रोक के बावजूद जॉइनिंग दिए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। जल संसाधन विभाग में नियमों के खिलाफ पोस्टिंग के मामले में दोषी अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी भी दी गई। राजस्व रिकॉर्ड गायब होने और सड़कों पर आवारा मवेशियों के कारण होने वाले हादसों को रोकने के आदेश पर अमल न करने पर भी कार्रवाई हुई है।



कानून क्या कहता है

अदालत के आदेशों की अवहेलना करने पर कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट एक्ट 1971 के तहत कार्रवाई होती है। जानबूझकर आदेश न मानना सिविल अवमानना माना जाता है। इसके तहत अधिकतम छह महीने जेल और दो हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। कोर्ट चाहे तो दोनों एक साथ भी दे सकता है। अगर अधिकारी बिना शर्त माफी मांग लेता है तो राहत भी मिल सकती है।



विशेषज्ञों की राय

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रजनीश सिंह बघेल कहते हैं कि अब स्थिति गंभीर है। आदेशों की अवहेलना करने वाले अफसरों को सीधे जेल भेजने जैसी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। अवमानना के मामलों को अधिकारी के सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज करना चाहिए और कोर्ट-कचहरी में होने वाला पूरा खर्च दोषी की जेब से वसूला जाना चाहिए।



प्रशासनिक व्यवस्था बिखर रही है

अफसरशाही अदालत के आदेशों को ठेंगे पर रखेगी, तो शासन और कानून की स्थिति कमजोर हो जाएगी। न्यायपालिका की इतनी सख्ती के बाद भी अगर अधिकारियों का रवैया नहीं सुधरा, तो आने वाले समय में कोर्ट और सरकार में सीधे टकराव हो सकता है, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।



FAQ

  1. अवमानना क्या है?
    अदालत के आदेशों की अवहेलना करना अवमानना कहलाता है।
  2. दोषी अफसर को क्या सजा हो सकती है?
    अधिकतम 6 महीने जेल और 2 हजार रुपए जुर्माना।
  3. अवमानना के मामले कितने बढ़े हैं?
    दिसंबर 2015 से अप्रैल 2026 तक मामले लगभग छह गुना बढ़े।
  4. विशेषज्ञों का सुझाव क्या है?
    दोषी अफसरों से खर्च वसूलें और सीधे सख्त कार्रवाई करें।
  5. लोगों को क्या परेशानी हुई?
    अदालत के आदेशों के बावजूद अफसरों की लापरवाही से लोग न्याय के लिए भटकते रहे


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