मिड-डे मील में भेदभाव पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगा जवाब
समझें क्या है पूरा मामला
- हाईकोर्ट के तीन बड़े फैसले
- मिड-डे मील पर सरकार से जवाब
- शिक्षाकर्मियों की पेंशन पर राहत
- विभागीय परीक्षा का रिजल्ट रद्द
- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त हुआ
Bilaspur। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों में चल रही प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि बच्चों को पौष्टिक आहार देने के लिए शुरू की गई मिलेट चिक्की योजना का लाभ सभी जिलों के विद्यार्थियों को क्यों नहीं मिल रहा है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब सप्ताह में तीन दिन बच्चों को 20 ग्राम मिलेट चिक्की देने का निर्णय लिया गया है तो यह सुविधा केवल कुछ जिलों तक सीमित क्यों रखी गई है।
कोर्ट ने सरकार से स्पष्ट जानकारी मांगी है कि प्रदेश के बाकी जिलों के बच्चों को इस योजना से बाहर रखने का कारण क्या है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को तय की गई है।
सिर्फ 7 जिलों में मिल रही मिलेट चिक्की
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र ने राज्य सरकार के शपथ पत्र का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान में मिलेट चिक्की का वितरण केवल 7 जिलों में किया जा रहा है।
इन जिलों में नियद नेल्लानार योजना से जुड़े 5 जिले और जशपुर व रायगढ़ शामिल हैं। कोर्ट ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि जब योजना का उद्देश्य सभी बच्चों को बेहतर पोषण देना है तो इसका विस्तार पूरे प्रदेश में क्यों नहीं किया गया।
दरअसल, सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता और व्यवस्था को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। इसके बाद हाईकोर्ट ने इस मामले को जनहित याचिका के रूप में सुनवाई के लिए स्वीकार किया था।
कोर्ट ने योजना की जमीनी स्थिति की जांच के लिए न्यायमित्र नियुक्त किया था। न्यायमित्र को स्कूलों का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया था।
शिक्षाकर्मियों की पेंशन पर सरकार की अपील खारिज
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शिक्षाकर्मियों से जुड़े पेंशन मामले में भी अहम फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने राज्य सरकार की रिट अपील को खारिज कर दिया। यह मामला शिक्षाकर्मियों के शिक्षक एलबी पद पर संविलियन से पहले की सेवा अवधि को पेंशन लाभ में शामिल करने से जुड़ा था।
कोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा है। सिंगल बेंच ने सरकार को निर्देश दिया था कि शिक्षाकर्मियों की संविलियन से पहले की सेवा अवधि को पेंशन पात्रता में शामिल करने के संबंध में स्पष्ट नीति बनाई जाए।
डिवीजन बेंच ने माना कि इस विषय पर सरकार को दोबारा विचार कर उचित निर्णय लेना चाहिए। इस फैसले से उन शिक्षकों को राहत मिल सकती है, जिनकी पुरानी सेवा अवधि पेंशन लाभ तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
विभागीय परीक्षा में गड़बड़ी पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
छत्तीसगढ़ अधीनस्थ लेखा सेवा विभागीय परीक्षा भाग-दो वर्ष 2017 को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने परीक्षा परिणाम को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने माना कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि परीक्षा के घोषित पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न पूछे गए थे। इसके अलावा परीक्षा से ठीक पहले एडमिट कार्ड में नया विषय जोड़ दिया गया था।
कोर्ट ने इसे अभ्यर्थियों के साथ अन्याय माना। अदालत ने वित्त विभाग को निर्देश दिया है कि स्पष्ट पाठ्यक्रम जारी कर पात्र कर्मचारियों को पर्याप्त तैयारी का समय दिया जाए। इसके बाद विभाग नए सिरे से परीक्षा आयोजित कर सकता है।
तीन मामलों में हाईकोर्ट का सख्त संदेश
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इन तीन फैसलों में बच्चों के पोषण, कर्मचारियों के अधिकार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े अहम मुद्दों पर सरकार को जवाबदेही तय करने का संदेश दिया गया है।
मिड-डे मील मामले में कोर्ट ने समान अवसर और पोषण सुविधा पर सवाल उठाए हैं। वहीं शिक्षाकर्मी पेंशन मामले में सेवा अवधि के अधिकारों को महत्व दिया गया है। विभागीय परीक्षा मामले में हाईकोर्ट ने पारदर्शी प्रक्रिया और अभ्यर्थियों को उचित तैयारी समय देने की जरूरत पर जोर दिया है।
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