छत्तीसगढ़ फार्मेसी काउंसिल रजिस्ट्रार की नियुक्ति रद्द: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

VINAY VERMA | Mar 12, 2026, 23:41 IST
Photograph: (the sootr)
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार अश्विनी गुरडेकर की नियुक्ति को गलत ठहराया और उसे निरस्त कर दिया है। काउंसिल में विवाद लंबे समय से चल रहा था।

RAIPUR. छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल में लंबे समय से चल रहे विवाद पर आखिरकार फैसला आ गया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार की नियुक्ति को नियम विरुद्ध बताते हुए इसे पूरी तरह निरस्त कर दिया। कोर्ट के आदेश के बाद अब वर्तमान रजिस्ट्रार अश्विनी गुरडेकर को पद छोड़ना पड़ेगा। इस फैसले के बाद काउंसिल के भीतर लंबे समय से चल रहा विवाद फिर सुर्खियों में आ गया है।



सदस्यों ने उठाए थे नियुक्ति पर सवाल

फार्मेसी काउंसिल के कई सदस्यों ने शुरुआत से ही नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि पात्रता नियमों की अनदेखी कर विवादास्पद तरीके से नियुक्ति कराई गई। मामले को लेकर कई बार स्वास्थ्य विभाग और मंत्री तक शिकायतें भी पहुंचाई गईं। लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर असंतुष्ट सदस्य आखिरकार न्याय के लिए अदालत पहुंचे।



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नियमविरुद्ध नियुक्ति बनी विवाद का कारण

फार्मेसी काउंसिल के संविधान के अनुसार रजिस्ट्रार पद पर विशेष पात्रता जरूरी मानी जाती। अब तक प्रथा रही कि क्लास टू से रिटायर्ड मेडिकल ऑफिसर को नियुक्त किया जाता। लेकिन लंबे समय से मांग उठ रही थी कि अनुभवी वरिष्ठ फार्मासिस्ट को जिम्मेदारी मिले। इसके लिए काउंसिल ने संशोधित संविधान बनाकर शासन को स्वीकृति के लिए भेजा।



संशोधन को सरकारी स्वीकृति नही

काउंसिल ने प्रस्ताव दिया था कि रजिस्ट्रार पद पर उच्च शिक्षित फार्मासिस्ट नियुक्त किए जाएं। इसके लिए पीएचडी फार्मेसी, एम फार्मा या समकक्ष योग्यता को अनिवार्य बनाने की सिफारिश हुई थी। साथ ही प्रशासनिक अनुभव रखने वाले योग्य उम्मीदवारों के पैनल से चयन की बात की गई थी। लेकिन शासन स्तर पर इस संशोधित प्रस्ताव को अभी तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है।



डी फार्मा हैं अश्विनी गुरडेकर

इसी बीच शासन ने डी फार्मा योग्यता वाले क्लास टू फार्मासिस्ट को रजिस्ट्रार बना दिया। आरोप लगा कि बी फार्मा की पत्राचार डिग्री को अतिरिक्त योग्यता मान लिया गया। काउंसिल के सदस्यों का कहना था कि यह नियमों और पद की गरिमा दोनों के खिलाफ है। इसी विवाद ने धीरे-धीरे काउंसिल के भीतर बड़ा प्रशासनिक टकराव पैदा कर दिया।



वित्तीय अनियमितताओं के भी आरोप

काउंसिल के कुछ सदस्यों ने नियुक्ति के साथ वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगाए। उनका दावा था कि कई दस्तावेज और प्रमाण स्वास्थ्य विभाग को भी सौंपे गए। लेकिन लगातार शिकायतों के बावजूद किसी स्तर पर ठोस कार्रवाई होती नहीं दिखाई दी। इसी कारण सदस्यों ने आखिरकार अदालत का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया।



हाईकोर्ट ने नियुक्ति को बताया नियम विरुद्ध

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया को पूरी तरह गलत माना। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नियमों की अनदेखी कर की गई नियुक्ति वैध नहीं मानी जाएगी। इसी आधार पर रजिस्ट्रार अश्विनी गुरडेकर की नियुक्ति को निरस्त करने का आदेश दिया। साथ ही उन्हें पद से हटाने का स्पष्ट निर्देश भी जारी कर दिया गया।



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काउंसिल में नई नियुक्ति पर नजर

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब काउंसिल में नए रजिस्ट्रार की नियुक्ति की जानी है संभावना है कि अब पात्रता नियमों और योग्यता के आधार पर नया चयन होगा। काउंसिल के कई सदस्य चाहते हैं कि अब योग्य फार्मासिस्ट को जिम्मेदारी दी जाए। फिलहाल सबकी निगाहें शासन के अगले फैसले और नई नियुक्ति प्रक्रिया पर टिकी हैं।



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