छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का नया रोस्टर जारी: 7 मई से 4 डिवीजन और 14 सिंगल बेंचों में होगी सुनवाई
News In Short
- 7 मई से हाईकोर्ट में चार डिवीजन और 14 सिंगल बेंचों में सुनवाई शुरू।
- पहली बेंच: चीफ जस्टिस व जस्टिस अग्रवाल विशेष मामले देखेंगे।
- दूसरी बेंच: आपराधिक और 2022 तक के अल्ट्रा वायर्स मामले।
- तीसरी-बेंच: लंबित एक्विटल अपील; चौथी-बेंच: सिविल, टैक्स, मैट्रीमोनियल मामले।
- 14 सिंगल बेंचों में भी नियमित सुनवाई जारी।
News In Details
Raipur. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले न्यायिक कार्यों के सुचारू संचालन के लिए अपने रोस्टर में बड़ा बदलाव किया है। नए रोस्टर के अनुसार, 7 मई, गुरुवार से हाईकोर्ट में चार डिवीजन बेंच और 14 सिंगल बेंचों में नियमित सुनवाई शुरू हो जाएगी। यह बदलाव विभिन्न प्रकार के सिविल, आपराधिक, जनहित और टैक्स मामलों के त्वरित निपटारे को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
चार डिवीजन बेंचों का विवरण:
पहली डिवीजन बेंच:
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल इस बेंच में शामिल रहेंगे। यह बेंच रिट अपील, हेबियस कॉर्पस, जनहित याचिका, आपराधिक अवमानना और विशेष मामलों की सुनवाई करेगी। इसके अलावा अल्ट्रा वायर्स मामलों पर भी सुनवाई की जाएगी।
दूसरी डिवीजन बेंच:
जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की यह बेंच उन सभी आपराधिक मामलों की सुनवाई करेगी, जो अन्य बेंचों को आवंटित नहीं हैं। साथ ही, यह वर्ष 2022 तक के अल्ट्रा वायर्स मामलों की सुनवाई भी करेगी।
तीसरी डिवीजन बेंच:
जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस एन.के. व्यास की यह बेंच वर्ष 2016 से लंबित सभी एक्विटल अपीलों की सुनवाई करेगी। इसके तहत संबंधित याचिकाओं पर भी सुनवाई की जाएगी।
चौथी डिवीजन बेंच:
जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की यह बेंच उन सभी सिविल मामलों की सुनवाई करेगी, जो अन्य बेंचों में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा, यह बेंच मैट्रीमोनियल फर्स्ट अपील, टैक्स से जुड़े मामले और अनुच्छेद 323-ए और 323-बी के तहत दायर रिट याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगी।
सिंगल बेंचों की सुनवाई:
चीफ जस्टिस की स्पेशल बेंच सहित कुल 14 सिंगल बेंचों में भी नियमित सुनवाई जारी रहेगी। इससे सुनिश्चित होगा कि हर प्रकार के मामले समय पर निपटें और लंबित मामलों का बोझ कम हो। हाईकोर्ट (CG High Court) प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए रोस्टर का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाना और ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान मामलों की सुनवाई में व्यवधान से बचना है।
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