हिमाचल हादसा : छत्तीसगढ़ के एक ही परिवार की उठीं चार अर्थियां
NEWS IN SHORT
- हिमाचल के चंबा में 500 मीटर गहरी खाई में गिरी कार।
- हादसे में दुर्ग के आईटी इंजीनियर के पूरे परिवार की मौत।
- बच्चों की ताइक्वांडो प्रतियोगिता के बाद घूमने गया था परिवार।
- गांव के इतिहास में पहली बार उठीं चार अर्थियां।
- खराब मौसम के बीच ह्यूमन चेन बनाकर निकाले गए शव।
NEWS IN DETAIL
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम कुथरेल को गहरे शोक में डुबा दिया है। चंबा के दुर्गम पहाड़ी इलाके में एक कार के लगभग 500 मीटर गहरी खाई में गिर जाने से बेंगलुरु में कार्यरत आईटी इंजीनियर, उनके परिवार समेत कुल 8 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में कुथरेल निवासी अरविंद चंद्राकर (आईटी इंजीनियर), उनकी पत्नी प्राची चंद्राकर, और उनके दो मासूम बेटों—दर्श और अक्षज—ने अपनी जान गंवा दी। मंगलवार को जब रायपुर एयरपोर्ट से चार एंबुलेंस के जरिए इन सभी के शव गांव पहुंचे, तो पूरा इलाका चीखों और आंसुओं से गूंज उठा।
गांव के इतिहास में पहली बार ऐसा दुखद मंजर
ग्रामीणों के अनुसार, कुथरेल गांव के इतिहास में यह पहली बार है जब एक ही परिवार के चार सदस्यों की अर्थियां एक साथ उठीं। इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। अरविंद, प्राची, दर्श और अक्षज का अंतिम संस्कार एक ही दिन, एक साथ किया गया, जिससे पूरे गांव में मातम छा गया है और घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
ताइक्वांडो प्रतियोगिता के बाद घूमने गया था परिवार
मिली जानकारी के मुताबिक, अरविंद चंद्राकर अपने बच्चों की ताइक्वांडो प्रतियोगिता के सिलसिले में उत्तर भारत गए थे। प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद, वे अपने एक मित्र के परिवार के साथ हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध साच पास क्षेत्र में घूमने निकले थे। 29 मई की रात, कालावन क्षेत्र के पास उनकी टैक्सी अचानक अनियंत्रित हो गई और सीधे गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और कार में सवार किसी भी व्यक्ति को बचाया नहीं जा सका। इस हादसे में दूसरे परिवार के पी.जी. कार्तिघायन, उनकी पत्नी मनीमाला, उनके बेटे नंदन और स्थानीय टैक्सी चालक की भी मौके पर ही मौत हो गई।
ह्यूमन चेन बनाकर निकाले गए शव
दुर्घटना की जानकारी तुरंत नहीं मिल सकी थी। बाद में वाहन की जीपीएस लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर लापता कार का पता लगाया गया। इसके बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने तुरंत संयुक्त खोज अभियान शुरू किया। इलाका बेहद दुर्गम और पहाड़ी होने के साथ-साथ मौसम भी खराब था, जिससे राहत कार्य में भारी मुश्किलें आईं।
आखिरकार, पुलिस प्रशासन और स्थानीय जांबाज ग्रामीणों ने मिलकर एक 'ह्यूमन चेन' (मानव श्रृंखला) बनाई और बेहद सूझबूझ व कड़ी मशक्कत के बाद सभी शवों को 500 मीटर गहरी खाई से बाहर निकाला। कुथरेल गांव में एक ही चिता की आग में पूरे परिवार को विलीन होते देख वहां मौजूद हजारों लोगों का कलेजा मुंह को आ गया। यह हादसा न सिर्फ दो परिवारों को उजाड़ गया, बल्कि छत्तीसगढ़ से लेकर हिमाचल तक हर सुनने वाले को झकझोर गया है।
TIMELINE
- 29 मई (रात): ताइक्वांडो प्रतियोगिता के बाद साच पास घूमते समय कालावन (हिमाचल) के पास कार 500 मीटर गहरी खाई में गिरी; 8 लोगों की मौत।
- 30-31 मई: जीपीएस लोकेशन के आधार पर दुर्घटनाग्रस्त वाहन का पता चला। पुलिस, प्रशासन और स्थानीय लोगों ने 'ह्यूमन चेन' बनाकर शवों को निकाला।
- 2 जून (मंगलवार दोपहर): रायपुर एयरपोर्ट से चार एंबुलेंस के जरिए अरविंद चंद्राकर और उनके परिवार के शव पैतृक गांव कुथरेल (दुर्ग) पहुंचे।
- 2 जून (मंगलवार शाम): पूरे गांव में शोक के माहौल के बीच एक ही दिन, एक साथ परिवार के चारों सदस्यों का अंतिम संस्कार किया गया।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश का यह भीषण सड़क हादसा बेहद हृदयविदारक है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को पल भर में उजाड़ दिया। कुथरेल गांव में एक साथ उठीं चार अर्थियां और जलती चिताएं इस बात का प्रतीक हैं कि नियति कितनी क्रूर हो सकती है। यह दुखद घटना पीछे कभी न भरने वाला शून्य छोड़ गई है।
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