इंजीनियर से आईएएस तक, अमृत विकास टोप्पो की कहानी
भारतीय प्रशासनिक सेवा में कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं जो अपनी कार्यशैली से अलग पहचान बनाते हैं। वे केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए नए प्रयोग करते हैं। छत्तीसगढ़ कैडर के 2014 बैच के आईएएस अधिकारी अमृत विकास टोप्पो ऐसे ही अफसरों में गिने जाते हैं। पेट्रोलियम इंजीनियरिंग की पढ़ाई से लेकर भारतीय प्रशासनिक सेवा तक का उनका सफर और फिर जिला प्रशासन से लेकर राज्य स्तर के महत्वपूर्ण विभागों में उनकी जिम्मेदारियां, उन्हें एक बहुआयामी प्रशासक के रूप में स्थापित करती हैं।
झारखंड से निकले, छत्तीसगढ़ को बनाया कर्मभूमि
अमृत विकास टोप्पो का जन्म झारखंड में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित इंडियन स्कूल ऑफ माइंस (आईएसएम) धनबाद से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इंजीनियरिंग के बाद वे कॉरपोरेट क्षेत्र में भी करियर बना सकते थे, लेकिन उन्होंने समाज और देश की सेवा के लिए प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना। कड़ी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्ष 2014 में भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित हुए। उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला, जो आगे चलकर उनकी कर्मभूमि बना।
जमीनी प्रशासन से मिली अलग पहचान
आईएएस बनने के बाद अमृत विकास टोप्पो ने विभिन्न प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन किया। शुरुआती दौर में उन्होंने जमीनी प्रशासन की चुनौतियों को नजदीक से समझा और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान दिया। प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने जिला प्रशासन, राज्य सचिवालय और सार्वजनिक उपक्रमों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। हर पद पर उनकी कार्यशैली परिणाम आधारित और नवाचारों पर केंद्रित रही।
नान से संस्कृति विभाग तक अहम जिम्मेदारी
अमृत विकास टोप्पो ने छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (नान) में महाप्रबंधक के रूप में भी कार्य किया। यह राज्य का एक महत्वपूर्ण विभाग है, जहां सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्यान्न प्रबंधन जैसी बड़ी जिम्मेदारियां होती हैं। इसके साथ ही उन्होंने संस्कृति विभाग में संचालक की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभाली। प्रशासनिक कार्यों के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों और राज्य की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देने में भी उनकी भूमिका रही। उन्होंने योजना, अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग में उप सचिव के रूप में भी कार्य किया। इस पद पर रहते हुए राज्य की विकास योजनाओं, आंकड़ों के विश्लेषण और नीति निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान दिया। जिला प्रशासन से लेकर नीति निर्माण तक का अनुभव उन्हें व्यापक प्रशासनिक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
सक्ती कलेक्टर के रूप में बनाई अलग पहचान
वर्तमान में अमृत विकास टोप्पो सक्ती जिले के कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी विशेषता महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक विकास पर विशेष फोकस माना जाता है। उन्होंने जिले में महिलाओं के लिए नए मॉडल बढ़ावा दिया। इस मॉडल का उद्देश्य महिलाओं को तीन प्रमुख क्षेत्रों में सशक्त बनाना है। इसमें एजुकेशन, एम्प्लॉयमेंट और हेल्थ शामिल है। इस पहल के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी सामाजिक भागीदारी बढ़ाने के प्रयास किए गए।
एनीमिया और टीबी के खिलाफ अभियान
सक्ती जिले में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए भी उन्होंने विशेष अभियान चलाए। खासतौर पर एनीमिया और तपेदिक (टीबी) जैसी समस्याओं के खिलाफ जनभागीदारी आधारित मॉडल विकसित करने का प्रयास किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और जागरूकता अभियान चलाने पर विशेष जोर दिया गया। इन अभियानों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए विभिन्न विभागों और स्वयं सहायता समूहों को भी जोड़ा गया।
जनभागीदारी में विश्वास
अमृत विकास टोप्पो की प्रशासनिक शैली की एक प्रमुख विशेषता यह मानी जाती है कि वे सरकारी योजनाओं को केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रहने देना चाहते, बल्कि उनमें आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं। चाहे महिला स्व-सहायता समूह हों, ग्रामीण समुदाय हों या स्थानीय संस्थाएं, उनकी कार्यशैली में सामुदायिक सहभागिता महत्वपूर्ण स्थान रखती है। पेट्रोलियम इंजीनियरिंग की तकनीकी शिक्षा और प्रशासनिक अनुभव का समन्वय उनकी कार्यशैली में साफ दिखाई देता है। समस्याओं का डेटा आधारित विश्लेषण, योजनाओं की निगरानी और परिणामों पर फोकस उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण की विशेषता मानी जाती है। वहीं दूसरी ओर, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास जैसे विषयों पर उनकी प्राथमिकता एक संवेदनशील प्रशासक की छवि भी प्रस्तुत करती है।
एक युवा आईएएस, जिनसे जुड़ी हैं उम्मीदें
करीब एक दशक से अधिक के प्रशासनिक अनुभव में अमृत विकास टोप्पो ने जिला प्रशासन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, संस्कृति, नीति निर्माण और सामाजिक विकास जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है। वर्तमान में सक्ती जिले के कलेक्टर के रूप में वे प्रशासनिक नवाचार और जनसरोकार आधारित कार्यों के लिए चर्चा में रहते हैं। झारखंड के एक युवा छात्र से लेकर देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा तक का उनका सफर यह बताता है कि तकनीकी शिक्षा और जनसेवा का समन्वय समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
यह खबरें भी पढ़ें...
डॉक्टर से आईएएस तक, हर मोर्चे पर छाप छोड़ने वाले सारांश मित्तर
नक्सल मोर्चे से आबकारी आयुक्त तक, आईएएस पदुम सिंह एलमा
गणित के विद्यार्थी से सहकारिता के सूत्रधार बने आईएएस रमेश शर्मा
सहकारिता आयुक्त की कुर्सी पर आईएएस रमेश शर्मा की एंट्री, 10 दिन से खाली था पद