MBBS के बाद UPSC में 20वीं रैंक, होम कैडर छोड़ छत्तीसगढ़ चुना, जानिए आईएएस डॉ कमलप्रीत सिंह की प्रेरक कहानी

VINAY VERMA | Oct 10, 2026, 17:56 IST
आईएएस कमलप्रीत सिंह
24 सितंबर 1977 को पंजाब के लुधियाना जिले के अहमदगढ़ में जन्मे डॉ कमलप्रीत सिंह की शुरुआती कहानी किसी आम मध्यमवर्गीय परिवार की तरह है। माता-पिता दोनों शिक्षक थे। पिता चाहते थे कि बेटा डॉक्टर बने। बेटे कमलप्रीत सिंह ने भी पिता की इच्छा को अपना लक्ष्य बनाया और MBBS की पढ़ाई पूरी की।

लेकिन मेडिकल की पढ़ाई के दौरान उनकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने आगे चलकर उन्हें देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक तक पहुंचा दिया।



मेडिकल कॉलेज में मिला UPSC का रास्ता

MBBS की पढ़ाई के दौरान डॉ कमलप्रीत सिंह को UPSC के बारे में जानकारी मिली। सीनियर्स के संपर्क में आए तो सिविल सेवा की तैयारी का विचार मजबूत हुआ। मेडिकल की पढ़ाई के साथ उन्होंने इस नए रास्ते को समझना शुरू किया। धीरे-धीरे डॉक्टर बनने के साथ देश की प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना भी आकार लेने लगा।



पहली कोशिश ने सिखाया, दूसरी में कमाल

UPSC की पहली कोशिश में डॉ कमलप्रीत सिंह ने प्रारंभिक परीक्षा तो निकाल ली, लेकिन मुख्य परीक्षा की बाधा पार नहीं कर सके। असफलता के बाद उन्होंने तैयारी को और व्यवस्थित किया। लंबे समय तक लगातार पढ़ने की आदत उनके काम आई। दूसरी कोशिश में उन्होंने प्री और मेंस दोनों पास किए और इंटरव्यू तक पहुंचे। आखिरकार 20वीं रैंक के साथ उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए हुआ।



विकसित छत्तीसगढ़ इवेंट में आईएएस कमलप्रीत सिंह

20वीं रैंक और बड़ा फैसला

इतनी अच्छी रैंक का मतलब था कि IAS डॉ कमलप्रीत सिंह के सामने कैडर चुनने के बेहतर विकल्प थे। पंजाब उनका गृह राज्य था। लेकिन उन्होंने होम कैडर लेने के बजाय छत्तीसगढ़ को चुना। इसके पीछे उनकी सोच थी कि अपने गृह राज्य में रिश्तेदारी और पहचान का असर प्रशासनिक काम की निष्पक्षता पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने ऐसा राज्य चुना, जहां वे अपनी जिम्मेदारी को पूरी स्वतंत्रता से निभा सकें।




डॉक्टर की सोच, अफसर की जिम्मेदारी

मेडिकल बैकग्राउंड ने उनके काम करने के नजरिए को भी प्रभावित किया। डॉक्टर की पढ़ाई ने अनुशासन, लंबे समय तक काम करने और दबाव में निर्णय लेने की आदत दी। यही अनुभव प्रशासनिक सेवा में भी काम आया। कमलप्रीत सिंह की पत्नी भी MBBS डॉक्टर हैं। यानी परिवार में चिकित्सा का पेशा होने के बावजूद उन्होंने प्रशासन की राह चुनी।



काम के साथ फिटनेस का जुनून

डॉ कमलप्रीत सिंह की दिलचस्पी सिर्फ फाइलों और सरकारी काम तक सीमित नहीं रही। उन्हें खेलों में खास रुचि है। MBBS के दिनों से ही जिम करने की आदत रही है। बैडमिंटन खेलना भी पसंद है। व्यस्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच फिटनेस पर ध्यान देना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा है।



आईएएस कमलप्रीत सिंह

लगभग हर बड़े विभाग में जिम्मेदारी

2002 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के अधिकारी डॉ कमलप्रीत सिंह ने राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों में काम किया है। वे सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव, लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त, समग्र शिक्षा के मिशन डायरेक्टर, कृषि उत्पादन आयुक्त, कृषि एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव रह चुके हैं। इसके अलावा वाणिज्य एवं उद्योग, वित्त, सार्वजनिक उपक्रम और वाणिज्यकर विभाग में भी जिम्मेदारी संभाली।




प्रशासन से लेकर निर्माण तक

डॉ कमलप्रीत सिंह आबकारी आयुक्त और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक भी रहे। स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालने से पहले वे लोक निर्माण विभाग के सचिव और छत्तीसगढ़ रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक थे। अलग-अलग विभागों में काम करने का यह अनुभव उन्हें प्रशासन के कई हिस्सों को करीब से समझने का मौका देता रहा।



कोरोना काल में दिखाया कुशल प्रबंधन

कोरोना के दौरान डॉ. कमलप्रीत सिंह के पास शासन के महत्वपूर्व विभाग थे। उस दौरान सबसे बड़ी चुनौतियों में दूसरे देश और राज्यों में फंसे लोगों को छत्तीसगढ़ वापस लाना था। इसके अलावा खाद्य की उपलब्धता को बनाए रखना था। परिवहन और खाद्य सचिव के रुप में डॉ. कमलप्रीत सिहं ने दोनों जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। दूसरे विभागों से समन्वय और उनके कुशल प्रबंधन का नतीजा था कि विभाग द्वारा संचालित सभी योजना निर्बाध संचालित होती रही।




आज स्कूल शिक्षा की जिम्मेदारी

वर्तमान में डॉ कमलप्रीत सिंह सचिव स्कूल शिक्षा विभाग के पद पर हैं। ये तकनीक को विशेष महत्व देते हैं। जिसका भरपूर प्रयोग स्कूल शिक्षा विभाग में कर रहे हैं। ऑनलाइन अटेंडेंस हो या किताबों की ट्रेकिंग सभी को तकनीक से जोड़ा जा रहा है। इससे न केवल विभाग आधुनिक होगा बल्कि मॉनिटरिंग सिस्टम भी स्ट्रांग होगा। हाल ही में संविदा भर्तियों के लिए कंप्यूटर आधारित चयन प्रक्रिया की शुरुआत कर रहे हैं। जिससे नियुक्ति में गड़बड़ी की आशंका ना रहे। इसके अलावा डॉ. कमलप्रीत सिंह पुराने खरीदी-सप्लाई के नियमों में भी संसोधन कर रहे हैं। जिसका सबसे अधिक फायदा छग के भविष्य यानि छात्र-छात्राओं को मिलेगा।



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