डॉक्टर से आईएएस तक, हर मोर्चे पर छाप छोड़ने वाले सारांश मित्तर

Harrison Masih | Jun 13, 2026, 21:08 IST
आईएएस सारांश मित्तर
डॉ. सारांश मित्तर एक एमबीबीएस डॉक्टर से आईएएस अधिकारी बनने तक की प्रेरणादायक यात्रा के लिए जाने जाते हैं। पंजाब के अमृतसर से निकलकर उन्होंने यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर 2010 बैच में छत्तीसगढ़ कैडर जॉइन किया।

अगर छत्तीसगढ़ कैडर के उन युवा आईएएस अधिकारियों की बात की जाए जिन्होंने स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन, आदिवासी क्षेत्रों, उद्योग और कृषि जैसे विविध क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ी है, तो डॉ. सारांश मित्तर का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। एक डॉक्टर से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बनने तक का उनका सफर मेहनत, लगन और जनसेवा के प्रति समर्पण की कहानी है।



पंजाब से छत्तीसगढ़ तक का सफर

डॉ. सारांश मित्तर का जन्म पंजाब के अमृतसर में हुआ। उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने के बजाय सिविल सेवा की राह चुनी। कठिन तैयारी के बाद उन्होंने यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्ष 2010 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अधिकारी बने। आईएएस बनने के बाद उन्होंने बस्तर में सहायक कलेक्टर के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया। शुरुआती दौर में ही उन्होंने जमीनी प्रशासन, राजस्व और ग्रामीण विकास की बारीकियों को समझा। डॉ. मित्तर ने दंतेवाड़ा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के रूप में कार्य किया। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, पंचायतों को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।



IAS Saransh Mittar


रायपुर नगर निगम में नई कार्यशैली

मार्च 2015 में उन्हें रायपुर नगर निगम का आयुक्त बनाया गया। इस दौरान शहरी विकास, स्वच्छता, यातायात सुधार और नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया। राजधानी के तेजी से बढ़ते शहरी ढांचे को व्यवस्थित करने की दिशा में कई पहल उनके कार्यकाल से जुड़ी रहीं। एक चिकित्सक होने के कारण स्वास्थ्य क्षेत्र की समझ उनके लिए अतिरिक्त ताकत साबित हुई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में मिशन डायरेक्टर के रूप में उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य किया।



कलेक्टर के रूप में पहचान

डॉ. सारांश मित्तर ने सरगुजा और बिलासपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों के कलेक्टर के रूप में कार्य किया। बिलासपुर में उनका कार्यकाल लगभग दो वर्ष से अधिक रहा, जो उनके सबसे लंबे प्रशासनिक कार्यकालों में से एक माना जाता है। कोविड-19 महामारी के दौरान प्रशासनिक प्रबंधन, राहत कार्य और जनसहभागिता को लेकर उनकी कार्यशैली चर्चा में रही। जिला प्रशासन के बाद उन्हें राज्य सड़क विकास निगम और छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं की जिम्मेदारी मिली। उन्होंने उद्योगों के लिए आधारभूत ढांचे के विकास और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया। साथ ही विभिन्न सरकारी कंपनियों में निदेशक और प्रबंध संचालक के रूप में भी भूमिका निभाई।



पंजाबी कम्युनिटी के साथ आईएएस मित्तर

चिप्स और डिजिटल गवर्नेंस

डॉ. मित्तर ने छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशनल सोसायटी चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में भी कार्य किया। इस दौरान डिजिटल गवर्नेंस, ई-ऑफिस और विभिन्न ऑनलाइन सरकारी सेवाओं को बढ़ावा देने के प्रयास किए गए। उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी के बाद उन्हें कृषि एवं सहकारिता विभाग में विशेष सचिव तथा बाद में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी सौंपी गई। किसानों तक बेहतर बीज, आधुनिक कृषि तकनीक और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर उनका फोकस रहा।



एक डॉक्टर की संवेदनशीलता, एक प्रशासक की दृढ़ता

डॉ. सारांश मित्तर की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि उन्होंने चिकित्सा और प्रशासन दोनों क्षेत्रों की समझ को जनहित के कार्यों में उपयोग किया। आदिवासी अंचलों से लेकर बड़े शहरों, स्वास्थ्य से लेकर उद्योग और कृषि से लेकर डिजिटल गवर्नेंस तक उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर एक बहुआयामी प्रशासक के रूप में अपनी पहचान बनाई है। छत्तीसगढ़ कैडर के युवा और सक्रिय आईएएस अधिकारियों में उनकी गिनती होती है। डॉक्टर से आईएएस बनने की उनकी यात्रा उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने करियर के माध्यम से समाज में व्यापक बदलाव लाना चाहते हैं।



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