सीएम के प्रमुख सचिव के नाम फेक आईडी, दो घंटे में 58 दोस्त, शुरू हुई वसूली
छत्तीसगढ़ में साइबर ठगों ने अब सोशल मीडिया को वसूली का नया अड्डा बना लिया है। इस बार निशाने पर आम आदमी नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुबोध सिंह आ गए। शातिर ने फेसबुक पर उनकी फर्जी आईडी बनाई, महज दो घंटे में 58 लोगों को दोस्त बनाया और फिर परिचितों से पैसे मांगने का खेल शुरू कर दिया। मामला सामने आते ही पुलिस हरकत में आई और जांच शुरू कर दी गई है।
आईएएस भी नहीं बचे
सरकारी जानकारी के मुताबिक ठग ने सोमवार को ही आईएएस सुबोध सिंह के नाम से फेसबुक पर फेक प्रोफाइल बनाई। प्रोफाइल तैयार होते ही उसने तेजी से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना शुरू किया। देखते ही देखते दो घंटे के भीतर 58 लोग उसके दोस्त बन गए। इसके बाद परिचितों को मैसेज भेजकर पैसों की मांग शुरू कर दी गई।
वसूली का नया फॉर्मूला
साइबर ठग अब बैंक कॉल या ओटीपी के बजाय भरोसे का फायदा उठा रहे हैं। किसी बड़े अधिकारी, नेता या परिचित की फर्जी प्रोफाइल बनाकर पहले विश्वास जीतते हैं, फिर इमरजेंसी, जरूरी काम या ऑनलाइन पेमेंट का बहाना बनाकर रुपए मांगते हैं। कई लोग बिना पुष्टि किए पैसे भी ट्रांसफर कर देते हैं।
रिपोर्ट के बाद जांच
फर्जी आईडी और पैसों की मांग की जानकारी मिलते ही सुबोध सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर फेक अकाउंट बनाने वाले की तलाश शुरू कर दी है। साथ ही फेसबुक से संबंधित तकनीकी जानकारी भी जुटाई जा रही है, ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके।
पुराने मामलों से नहीं लिया सबक
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी छत्तीसगढ़ में कई वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं के नाम पर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बन चुके हैं। पूर्व मुख्य सचिव, कई आईएएस अधिकारियों, आईपीएस अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के नाम से भी फेक प्रोफाइल बनाकर परिचितों से पैसे मांगने के मामले सामने आ चुके हैं। अधिकांश मामलों में ठग दूसरे राज्यों से ऑपरेट करते पाए गए।
नेताओं के नाम भी इस्तेमाल
बीते वर्षों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कई मंत्रियों और विधायकों के नाम से भी फर्जी फेसबुक व व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाकर लोगों से आर्थिक मदद मांगने की शिकायतें दर्ज हुई थीं। कई मामलों में साइबर पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने की एडवाइजरी भी जारी की थी, लेकिन ठग लगातार नए तरीके अपनाते रहे।
हर दिन बदल रही चाल
साइबर अपराधी अब एआई आधारित फोटो, असली प्रोफाइल जैसी तस्वीरें और हूबहू नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। यही वजह है कि फर्जी और असली अकाउंट में फर्क करना मुश्किल हो रहा है। पुलिस का कहना है कि किसी भी सोशल मीडिया मैसेज पर पैसे भेजने से पहले संबंधित व्यक्ति से फोन पर पुष्टि जरूर करें।
सिस्टम के सामने चुनौती
सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव जैसे वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का दुरुपयोग हो सकता है, तो आम लोगों की सुरक्षा कितनी मजबूत है? सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर वसूली का यह धंधा अब साइबर पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसे किसी भी संदिग्ध अकाउंट की तुरंत शिकायत करें और बिना सत्यापन किसी को भी ऑनलाइन रकम न भेजें।
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