पति की मौत के बाद बीमा कंपनी ने रोके 20 लाख, महिला ने लड़ी लंबी लड़ाई, अब ब्याज समेत देना होगा पैसा
अब राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को 20 लाख रुपये के साथ 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है।
तीन साल पहले सड़क हादसे में हुई थी मौत
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले से बीमा क्लेम का एक अहम मामला सामने आया है। यहां पति की मौत के बाद महिला को बीमा राशि नहीं मिली। इसके लिए उसे राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।
मामला बोड़ला तहसील के माराडबरा गांव का है। यहां रहने वाली तिहारो चिचाम के पति गणेश चिचाम की सड़क दुर्घटना में मौत हुई थी। यह हादसा 19 नवंबर 2023 को हुआ था।
उस दिन गणेश मोटरसाइकिल से तरेगांव जंगल से अपने गांव लौट रहे थे। रास्ते में मछलीरवां मंदिर के पास उनकी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में गणेश की जान चली गई। पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 304-ए के तहत प्रकरण दर्ज किया था।
एक हजार के प्रीमियम पर था 20 लाख का बीमा
गणेश चिचाम का छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक में बचत खाता था। उनका खाता बैंक की बोड़ला शाखा में संचालित था। बैंक के माध्यम से गणेश ने व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कराया था। इसके लिए एक हजार रुपये का प्रीमियम लिया गया था।
पॉलिसी के मुताबिक दुर्घटना में मौत होने पर 20 लाख रुपये मिलने थे। पति की मौत के बाद पत्नी तिहारो चिचाम ने इसी पॉलिसी के तहत दावा किया। महिला को उम्मीद थी कि बीमा की रकम परिवार का सहारा बनेगी। हालांकि कंपनी ने भुगतान करने से इनकार कर दिया।
बीमा कंपनी ने क्यों खारिज किया क्लेम?
बीमा कंपनी ने गणेश की कथित लापरवाही को दावा खारिज करने का आधार बनाया। कंपनी ने पुलिस की खात्मा रिपोर्ट का भी हवाला दिया। कंपनी का कहना था कि हादसे से जुड़ी परिस्थितियों में मृतक की लापरवाही सामने आई थी।
इसी आधार पर महिला को बीमा राशि देने से इनकार किया गया। इसके बाद महिला के सामने बीमा कंपनी के फैसले को चुनौती देने का रास्ता बचा था।
जिला और राज्य आयोग से भी नहीं मिली राहत
बीमा कंपनी से पैसा नहीं मिलने पर तिहारो चिचाम ने जिला उपभोक्ता आयोग कबीरधाम में शिकायत की। महिला को उम्मीद थी कि आयोग से उसके पक्ष में फैसला आएगा। हालांकि जिला आयोग ने उसे राहत नहीं दी।
इसके बाद मामला राज्य उपभोक्ता आयोग पहुंचा। यहां भी महिला को निराशा हाथ लगी। राज्य आयोग ने जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखा। दो स्तरों पर राहत नहीं मिलने के बावजूद महिला ने कानूनी लड़ाई जारी रखी। उन्होंने अधिवक्ता राजेश कुमार भावनानी के माध्यम से राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अपील की।
राष्ट्रीय आयोग ने कंपनी की दलील नहीं मानी
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने पूरे मामले के दस्तावेजों की जांच की। आयोग ने पाया कि मृतक की लापरवाही साबित करने वाले ठोस प्रमाण नहीं थे। आयोग के मुताबिक केवल एफआईआर और पुलिस की खात्मा रिपोर्ट पर्याप्त आधार नहीं थीं। इनके आधार पर दुर्घटना बीमा का दावा खारिज करना उचित नहीं था।
मामले में रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण रही। इस रिपोर्ट में विषैले पदार्थ के सेवन की पुष्टि नहीं हुई थी। इन तथ्यों को देखते हुए आयोग ने बीमा कंपनी का दावा खारिज करने वाला फैसला उचित नहीं माना।
चार सप्ताह में देने होंगे 20 लाख रुपये
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 8 अक्टूबर 2026 को अपना आदेश सुनाया। आयोग ने जिला और राज्य उपभोक्ता आयोग के पुराने फैसले निरस्त कर दिए।इसके साथ ही तिहारो चिचाम को बीमा पॉलिसी के तहत 20 लाख रुपये पाने का हकदार माना गया।
आयोग ने कंपनी को चार सप्ताह के भीतर पूरी बीमा राशि देने का निर्देश दिया है। सिर्फ इतना ही नहीं। कंपनी को इस रकम पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा। ब्याज की गणना गणेश की मौत के छह महीने बाद से होगी।
बीमा क्लेम के मामलों में अहम है फैसला
इस मामले में राष्ट्रीय आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना। आयोग ने स्पष्ट किया कि मृतक की लापरवाही साबित करने के लिए ठोस प्रमाण जरूरी हैं।
सिर्फ पुलिस की रिपोर्ट और एफआईआर को दावा खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं माना गया। कबीरधाम की तिहारो चिचाम के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। करीब तीन साल की कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें बीमा राशि मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
यह मामला उन बीमाधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिनके दुर्घटना बीमा दावे खारिज हो जाते हैं। हालांकि हर बीमा क्लेम का फैसला संबंधित पॉलिसी की शर्तों और उपलब्ध सबूतों पर निर्भर करता है।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: बीमा कंपनी को कितने रुपये का मुआवजा देना होगा?
जवाब: राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को 20 लाख रुपये देने का आदेश दिया है। इस रकम पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।
सवाल 2: बीमा कंपनी ने महिला का क्लेम क्यों खारिज किया था?
जवाब: कंपनी ने मृतक की कथित लापरवाही और पुलिस की खात्मा रिपोर्ट का हवाला देकर बीमा क्लेम खारिज किया था।
सवाल 3: राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने क्या फैसला सुनाया?
जवाब: आयोग ने 8 अक्टूबर 2026 को महिला के पक्ष में फैसला दिया। कंपनी को चार सप्ताह में बीमा राशि और निर्धारित ब्याज देने का आदेश दिया।