संघर्ष से सफलता तक: IPS विकास कुमार की प्रेरक कहानी

Harrison Masih | Apr 17, 2026, 09:00 IST
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छोटे से गांव से निकलकर आईपीएस अधिकारी बनने वाले विकास कुमार की कहानी संघर्ष, मेहनत और लगन की प्रेरक मिसाल है। देश सेवा के सपने ने उन्हें यूपीएससी की राह पर ला दिया। दो असफल प्रयासों के बाद उन्होंने आईपीएस बनने का सपना पूरा किया।

बिहार के एक साधारण गांव से निकलकर भारतीय पुलिस सेवा तक का सफर आसान नहीं होता। इसके बावजूद IPS विकास कुमार ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं। छत्तीसगढ़ कैडर के 2020 बैच के यह युवा आईपीएस अधिकारी आज अपनी मेहनत, ईमानदारी और जज्बे के लिए पहचाने जाते हैं।



गांव की मिट्टी से निकला अफसर

3 दिसंबर 1991 को बिहार के औरंगाबाद जिले के एक छोटे से गांव में जन्मे विकास कुमार का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके दादा खेती करते थे और पिता बिहार मिलिट्री पुलिस में सिपाही थे। घर में संसाधन सीमित थे, लेकिन सपनों की कोई कमी नहीं थी। शुरुआती पढ़ाई उन्होंने हिंदी माध्यम से सरकारी स्कूल में की, जिसने उनकी नींव को मजबूत बनाया। इसके बाद नवोदय विद्यालय से 10 वीं तक पढ़ाई की।



इंजीनियर से IPS तक का सफर

स्कूल के बाद विकास कुमार (IPS Vikas Kumar) ने अंग्रेजी माध्यम से 11वीं-12वीं में गणित विषय लेकर पढ़ाई की और इसके बाद राष्टीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने टाटा स्टील, जमशेदपुर में मैकेनिकल अधिकारी के रूप में काम भी किया। लेकिन उनके अंदर कुछ बड़ा करने की चाह थी। देश सेवा का सपना, जिसने उन्हें नौकरी छोड़कर यूपीएससी की राह पर ला खड़ा किया।



IPS Vikas Kumar


शुरू हुई असली परीक्षा

2015 में शादी के ठीक एक महीने बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। यहीं से उनकी असली परीक्षा शुरू हुई। लगातार दो प्रयासों में उन्होंने मेंस परीक्षा तो पास की, लेकिन इंटरव्यू तक नहीं पहुंच सके। हार मानना आसान था, लेकिन विकास कुमार ने संघर्ष चुना। तीसरे प्रयास में उन्होंने 203वीं रैंक हासिल कर आईपीएस बन गए। उनका वैकल्पिक विषय समाजशास्त्र था। खास बात यह है कि वे अपने गांव से यूपीएससी क्रैक करने वाले पहले व्यक्ति बने। इतना ही नहीं, उनके चयन से औरंगाबाद जिले में पांच साल से चला आ रहा नो-सेलेक्शन का सिलसिला भी टूट गया।



मैदान में साबित किया खुद को

28 दिसंबर 2020 को आईपीएस जॉइन करने के बाद उन्होंने हैदराबाद की सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग बिलासपुर में हुई, जहां उन्हें सीपत थाने का प्रभारी बनाया गया। सीपत में उन्होंने अपने काम से अलग पहचान बनाई। चाहे वह एनडीपीएस के मामलों में सख्त कार्रवाई हो या मिट्टी तेल चोरी के संगठित सिंडिकेट को जोखिम उठाकर पकड़ना। उन्होंने यह दिखा दिया कि वे सिर्फ अधिकारी नहीं, बल्कि जमीन पर काम करने वाले असली पुलिस अफसर हैं।



तेजी से बढ़ता कैरियर

बिलासपुर के बाद उन्हें जगदलपुर में सीएसपी बनाया गया, जहां उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में काम करते हुए अपनी कार्यक्षमता साबित की। इसके बाद वे कबीरधाम जिले में एडिशनल एसपी बने। इसके बाद वे पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी) सीआईडी और एसपी एसआईबी नक्सल अभियान का काम देखा।



फ़िलहाल वे डीसीपी ट्रैफिक प्रोटोकॉल के पद पर हैं। विकास कुमार पुलिस पब्लिक स्कूल के प्रबंधक भी हैं। उनके स्कूल का छात्र इस बार 10 वीं में सेकंड स्टेट टॉपर रहा है। विकास कुमार की कहानी सिर्फ एक आईपीएस अधिकारी बनने की नहीं है, बल्कि यह कहानी है संघर्ष, धैर्य और निरंतर मेहनत की। एक छोटे गांव से निकलकर देश की प्रतिष्ठित सेवा तक पहुंचने वाला यह सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है।



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