बैलाडीला से लौह अयस्क चोरी, पंडेवार के जंगलों में मिले 40 अवैध डंप
NEWS IN SHORT
- पंडेवार के जंगलों में लौह अयस्क के 40 अवैध डंप मिले।
- ग्रामीणों की सतर्कता से आधी रात को खुली तस्करों की पोल।
- बैलाडीला में सख्ती के बाद तस्करों ने बदला अपना ठिकाना।
- फर्जी रॉयल्टी पर्चियों के सहारे चल रहा था तस्करी का खेल।
- वन विभाग ने जांच शुरू कर तस्करों पर निगरानी बढ़ाई।
NEWS IN DETAIL
जिले के पंडेवार के जंगलों में लंबे समय से चल रहे लौह अयस्क (आयरन ओर) की चोरी और तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। बैलाडीला क्षेत्र में प्रशासन और कंपनियों द्वारा निगरानी बढ़ाए जाने के बाद तस्करों ने अब पंडेवार और बीजापुर के मिरतुल इलाके को अपना नया ठिकाना बना लिया है। ग्रामीणों की सतर्कता और सूचना के बाद वन विभाग और पुलिस महकमा हरकत में आया है।
ग्रामीणों की मुस्तैदी से खुला राज
अब तक पंडेवार के जंगलों से ट्रैक्टरों के जरिए चोरी-छिपे लौह अयस्क निकालने की चर्चा थी, लेकिन शनिवार रात को जंगल की ओर जाते 14 चक्का भारी ट्रकों ने पूरे गिरोह की पोल खोल दी। भारी वाहनों को देखकर स्थानीय युवाओं को शक हुआ, जिसके बाद उन्होंने तुरंत प्रशासन को इसकी सूचना दी।
एक वर्ग किलोमीटर में फैले डंप
तस्करों ने करीब एक वर्ग किलोमीटर के दायरे में लौह अयस्क के 40 से अधिक डंप (ढेर) तैयार कर रखे थे। अनुमान के मुताबिक, हर एक ढेरी की कीमत लगभग 2 लाख रुपए है।
स्थानीय सांठगांठ: गांव के ही कुछ लोग तस्करों से मिले हुए हैं, जो सप्ताह में एक-दो बार ट्रैक्टरों और छोटे वाहनों से पहाड़ियों के किनारों से लौह अयस्क नीचे उतरवाते थे।
सुरक्षित ठिकाना: इस चोरी के माल को बस्ती से करीब दो किलोमीटर दूर जंगल के भीतर ऐसे स्थानों पर डंप किया जाता था, जहां भारी ट्रक आसानी से पहुंच सकें।
निगरानी: आम ग्रामीणों को डराने और दूर रखने के लिए तस्करों के गुर्गे उस इलाके की बकायदा निगरानी करते थे।
फर्जी रॉयल्टी पर्चियों का खेल
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे काले कारोबार को अंजाम देने के लिए फर्जी रॉयल्टी पर्चियों का सहारा लिया जा रहा है। एक ऐसी कंपनी, जिसे खनन की लीज मिली हुई है लेकिन विरोध के कारण वहां काम शुरू नहीं हो सका, उसी कंपनी के नाम की फर्जी पर्चियों का इस्तेमाल कर ट्रकों को जगदलपुर और रायपुर भेजा जा रहा है। हाल ही में सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी और कुछ सरपंचों ने आलनार क्षेत्र में बिना खनन के हो रहे अवैध परिवहन को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा था।
अधिकारियों का रुख:
मामले की गंभीरता को देखते हुए रेंजर डॉ. प्रितेश पांडे ने कहा कि जंगल में जहां भी अवैध भंडारण मिला है, उसे जब्त किया जाएगा। टीम भेजकर पूरी जांच कराई जा रही है और तस्करी से जुड़े संदिग्धों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
निष्कर्ष
पंडेवार के जंगलों में मिला अवैध डंपिंग यार्ड यह साबित करता है कि बैलाडीला में सुरक्षा बढ़ने के बाद तस्करों ने अपना रास्ता बदल लिया है। स्थानीय ग्रामीणों की सतर्कता ने इस बड़े सिंडिकेट को उजागर कर दिया। अब प्रशासन को फर्जी रॉयल्टी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई करनी होगी।
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