छत्तीसगढ़ जेल भ्रष्टाचार : कैदियों से अवैध उगाही, प्रहरी सस्पेंड
NEWS IN SHORT
- मनेंद्रगढ़ जेल प्रहरी संतोष तिवारी रिश्वत लेते वीडियो में कैद।
- कैदियों को सुविधा और गवाह प्रभावित करने का दिया लालच।
- जेल प्रशासन ने आरोपी प्रहरी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया।
- सारंगढ़ उपजेल में परिजनों से ऑनलाइन अवैध उगाही का मामला।
- बिलासपुर हाई कोर्ट ने सरकार से जाँच रिपोर्ट तलब की।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की जेलों में कैदियों से अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हाल ही में सारंगढ़ उपजेल में ऑनलाइन वसूली का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि मनेंद्रगढ़ उपजेल से एक नया और चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है। इस वायरल वीडियो ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राधे-राधे बोलकर ली 50 हजार की रिश्वत
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो नवंबर 2025 का बताया जा रहा है। इसमें मनेंद्रगढ़ उपजेल में पदस्थ प्रहरी संतोष तिवारी हत्या के आरोपियों के परिजनों के घर जाकर बड़ी शालीनता से 'राधे-राधे' कहते हुए 50 हजार रुपए की नकदी लेते दिखाई दे रहा है।
मामले के मुख्य बिंदु
सौदा: प्रहरी ने हत्या के मामले में बंद तीन आरोपियों को जेल के भीतर प्रताड़ना से बचाने और विशेष सुविधाएं देने के नाम पर 1 लाख 30 हजार रुपए की मांग की थी।
धमकी और लालच: परिजनों का आरोप है कि प्रहरी ने पैसे न देने पर कैदियों को प्रताड़ित करने की धमकी दी थी। साथ ही, उसने मुख्य गवाहों को प्रभावित कर केस कमजोर करने का झांसा भी दिया था।
कार्रवाई: वीडियो सामने आने के बाद जेलर संजय खैरावर की पुष्टि पर जेल सुपरिटेंडेंट ने संतोष तिवारी को तत्काल प्रभाव से **सस्पेंड** कर दिया है। निलंबन अवधि में उसका मुख्यालय केंद्रीय जेल अंबिकापुर तय किया गया है।
सारंगढ़ उपजेल: हाई कोर्ट तक पहुंचा ऑनलाइन वसूली का मामला
इससे पहले सारंगढ़ उपजेल में भी इसी तरह का भ्रष्टाचार सामने आया था, जो अब बिलासपुर हाई कोर्ट की निगरानी में है।
डिजिटल भ्रष्टाचार: यहां जेल कर्मियों ने कैदियों के परिजनों से बाकायदा ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए अवैध उगाही की।
मारपीट और प्रताड़ना: पैसा न देने या धौंस जमाने के लिए कैदियों के साथ मारपीट की खबरें भी सामने आईं।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: छत्तीसगढ़ चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ी नाराजगी जताई थी। याचिकाकर्ता दीपक और दिनेश चौहान ने कोर्ट में ऑनलाइन पेमेंट के सबूत भी पेश किए हैं, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच रिपोर्ट पेश करने की बात कही है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ की इन दो उपजेलों के मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जेल की सलाखों के पीछे 'सुविधाओं' और 'सुरक्षा' के नाम पर एक संगठित उगाही का तंत्र सक्रिय है। कानून के रखवालों द्वारा ही कानून को ठेंगा दिखाने की इन घटनाओं ने न्याय व्यवस्था और जेल सुधारों की पोल खोल दी है। फिलहाल, दोनों मामलों में विभागीय जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का इंतजार है।
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