झीरम घाटी केस: 5 सितंबर को आएगा कोर्ट का फैसला, 10 आरोपियों पर आना है निर्णय

Harrison Masih | Aug 31, 2026, 15:42 IST
झीरम कांड पर फैसला टला
झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में फैसला अब 5 सितंबर को सुनाया जाएगा। NIA की विशेष अदालत ने 31 अगस्त को आने वाले फैसले को पांच दिन के लिए टाल दिया है।

समझें क्या है पूरा मामला

झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में फैसला अब 5 सितंबर को आएगा। NIA की विशेष अदालत ने फैसला पांच दिन के लिए टाल दिया है। पहले 31 अगस्त को फैसला आने की उम्मीद थी। इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि बाकी 10 आरोपियों पर अब फैसला आना है।



अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में 101 गवाहों के बयान और कई दस्तावेज पेश किए हैं। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती देते हुए अपनी दलीलें रखी हैं।



10 अगस्त को पूरी हुई थी अंतिम बहस

मामले में 10 अगस्त को अंतिम बहस हुई थी। इस दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने कोर्ट के सामने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। अभियोजन पक्ष ने पेश किए गए सबूतों के आधार पर आरोप साबित होने की बात कही, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को गलत बताया।



अंतिम बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब 5 सितंबर को अदालत का फैसला आने की उम्मीद है। झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और चर्चित नक्सली हमलों में से एक है। इस मामले के फैसले पर पीड़ित परिवारों के साथ पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।



2013 में हुआ था झीरम घाटी हमला

दरअसल, 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला किया था। उस समय छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने वाले थे और कांग्रेस राज्यभर में परिवर्तन यात्रा निकाल रही थी।



सुकमा में कार्यक्रम खत्म होने के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला जगदलपुर के लिए रवाना हुआ था। काफिले में करीब 25 गाड़ियां थीं और करीब 200 नेता व कार्यकर्ता मौजूद थे।



काफिले में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, कवासी लखमा, महेंद्र कर्मा और कई बड़े नेता शामिल थे।



पेड़ गिराकर रोका था काफिला

दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी पहुंचा। यहां नक्सलियों ने पहले से पेड़ गिराकर सड़क को बंद कर दिया था। जैसे ही गाड़ियां रुकीं, बड़ी संख्या में नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी।



करीब डेढ़ घंटे तक गोलीबारी होती रही। इस हमले में नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल समेत कई लोगों की मौत हो गई।



इसके बाद नक्सली नीचे आए और काफिले की गाड़ियों को एक-एक करके चेक किया। इसी दौरान उन्हें कांग्रेस नेता और सलवा जुडूम आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल महेंद्र कर्मा मिले। नक्सलियों ने उनकी भी हत्या कर दी।



हमले में कई बड़े नेताओं की हुई थी मौत

झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं की जान गई थी। हमले के बाद पूरे छत्तीसगढ़ में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया था।



जांच के दौरान इस हमले की साजिश और इसमें शामिल लोगों को लेकर कई पहलुओं पर जांच की गई। अब वर्षों बाद NIA कोर्ट के फैसले का इंतजार है।



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